scriptराजस्थान में यहां 7 वर्ष से चिकित्सक का पद रिक्त, एक कर्मचारी के भरोसे पशु चिकित्सालय | In Rajasthan, the post of doctor is vacant for 7 years, the veterinary hospital is dependent on one employee | Patrika News
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राजस्थान में यहां 7 वर्ष से चिकित्सक का पद रिक्त, एक कर्मचारी के भरोसे पशु चिकित्सालय

Rajasthan News : बारां जिले के जलवाड़ा कस्बे में राजकीय पशु चिकित्सालय में अरसे से कर्मचारियों का टोटा होने से पशु पालकों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं।

बारांJun 22, 2024 / 02:09 pm

Omprakash Dhaka

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Baran News : जलवाड़ा कस्बे में राजकीय पशु चिकित्सालय में अरसे से कर्मचारियों का टोटा होने से पशु पालकों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं। यहां पशु चिकित्सक, पशु चिकित्सा सहायक सहित अन्य पद सृजित हैं। लेकिन यहां मात्र पशु चिकित्सा सहायक का ही पद भरा हुआ है। चिकित्सक मुकेश मीणा का अक्टूबर 2016 में स्थानांतरण होने के बाद से ही यह पद रिक्त है।

दो दर्जन गांव इसी अस्पताल पर निर्भर

पशु चिकित्सालय क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांवों का प्रमुख केंद्र हैं। इस पर कुंडी, रामपुरा, पीतमपुरा, किशनपुरा, अहमदा, अहमदी,रामबिलास, बालापुरा, कदीली, जन्म झिरी, खल्दा, खल्दी नदी पार के अरनिया, देंगनी जागीर सहित अन्य गांवो के पशु पालक अपने रोगी पशुओं का उपचार करवाने के लिए यहां लेकर आते हैं। इन पशुओं का उपचार पशु चिकित्सा सहायक ही करता है। यदि गंभीर बीमारी से ग्रसित पशु यहां आ जाए तो चिकित्सक के अभाव में उनका उपचार नहीं हो पता है। ऐसे में पशुपालकों को अपने गंभीर रोगी पशुओं को उपचार के लिए अन्यत्र लेकर जाना पड़ता है। यहां के पशु चिकित्सालय में दवाइयों का भी टोटा है। पशु चिकित्सक सहायक महावीर मौर्य ने बताया कि चुनावों की आचार संहिता के चलते समय पर टेंडर नहीं होने से दवाइयों की कमी आई हैं।

… तो बंद रहता है पशु चिकित्सालय

यहां पशु चिकित्सालय में मात्र एक ही कर्मचारी पशु चिकित्सा सहायक महावीर मौर्या ही है। वहीं चिकित्सालय का संचालन कर रहा हैं। वह महीने में चार बार नोडल केंद्र किशनगंज में बैठकों व अन्य सरकारी कार्यों से जाता है। ऐसे में पशु चिकित्सालय बंद रहता है। यहां पशुपालक जब अपने रोगी पशुओं को उपचार के लिए लेकर आते हैं तो चिकित्सालय पर ताला लगा देख कर निराश ही घर लौट जाते हैं। यदि क्षेत्र के गांवो में टीकाकरण के लिए जाए तब भी ऐसी स्थिति में चिकित्सालय के ताला लग जाता हैं। कई बार समय पर रोगी पशुओं को उपचार नहीं मिलने से उनकी जान पर बन आती है।

बारिश में होती है सबसे ज्यादा परेशानी

पशु चिकित्सालय में पांच कमरे हैं। इसमें से चार कमरों की छत अरसे से प्रति वर्ष बारिस में टपकती हैं। मात्र एक कमरे की छत ही नहीं टपकती है। छत में जगह-जगह सरिये निकले हुए हैं। जब बारिश आती है तो चिकित्सालय का फर्श गीला हो जाता है। ऐसे में दवाइयां की सुरक्षा करना भी मुश्किल हो जाता है। दवाइयों को बरसात से बचाने के लिए पाल या बरसाती का उपयोग करना पड़ता हैं।

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