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बारां

कोई कोर्ट-कचहरी और पुलिस थाना नहीं, यहां आज भी मिल-बैठकर होता है फैसला

बोहत कस्बे में 40 से अधिक कालबेलिया परिवार निवास करते हैं। पिछले कई परिवार की पिढियों से इस समाज के लोग हर तरह का फैसले सब बैठकर फरियादी व आरोपी दोनों की बात सुनकर उपस्थित सब की रायशुमारी लेकर फैसला सुनाते हैं। उक्त फैसला किसी के पक्ष या विपक्ष में रहे, सब को मानना पडता है। किसी भी व्यक्ति को कोर्ट-कचहरी तक नहीं जाने देते हैं।यह लोग खुशी गम को पुरुष महिलाएं मिलकर बांटते हैं।

बारांJun 12, 2024 / 11:21 pm

mukesh gour

बोहत कस्बे में 40 से अधिक कालबेलिया परिवार निवास करते हैं। पिछले कई परिवार की पिढियों से इस समाज के लोग हर तरह का फैसले सब बैठकर फरियादी व आरोपी दोनों की बात सुनकर उपस्थित सब की रायशुमारी लेकर फैसला सुनाते हैं। उक्त फैसला किसी के पक्ष या विपक्ष में रहे, सब को मानना पडता है। किसी भी व्यक्ति को कोर्ट-कचहरी तक नहीं जाने देते हैं।यह लोग खुशी गम को पुरुष महिलाएं मिलकर बांटते हैं।

बोहत कस्बे में 40 से अधिक कालबेलिया परिवार निवास करते हैं। पिछले कई परिवार की पिढियों से इस समाज के लोग हर तरह का फैसले सब बैठकर फरियादी व आरोपी दोनों की बात सुनकर उपस्थित सब की रायशुमारी लेकर फैसला सुनाते हैं। उक्त फैसला किसी के पक्ष या विपक्ष में रहे, सब को मानना पडता है। किसी भी व्यक्ति को कोर्ट-कचहरी तक नहीं जाने देते हैं।यह लोग खुशी गम को पुरुष महिलाएं मिलकर बांटते हैं।

बारां जिले के बोहत कस्बे का मामला, यहां 40 से अधिक कालबेलिया समाज के परिवारों की बरसों से चली आ रही सामाजिक न्याय की परंपरा

बोहत. कस्बे में 40 से अधिक कालबेलिया परिवार निवास करते हैं। पिछले कई परिवार की पिढियों से इस समाज के लोग हर तरह का फैसले सब बैठकर फरियादी व आरोपी दोनों की बात सुनकर उपस्थित सब की रायशुमारी लेकर फैसला सुनाते हैं। उक्त फैसला किसी के पक्ष या विपक्ष में रहे, सब को मानना पडता है। किसी भी व्यक्ति को कोर्ट-कचहरी तक नहीं जाने देते हैं।यह लोग खुशी गम को पुरुष महिलाएं मिलकर बांटते हैं।
हर समस्या का निकलता है समाधान

शौकीन कालबेलिया ने बताया कि चाहे समाज में शादी, नाता प्रथा लडाई झगड़ा कोई सा ही मामला हो, सब की राय लेकर जो दंड देना है इसका फैसला लेते हैं। पिछले कई वर्षों से राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के बहार पेड की छाया में बैठ कर फैसला लेते आए हैं। कालबेलिया समाज के व्यक्ति झुंड में रहते हैं। प्रत्यक्ष उदाहरण है कि कस्बे के वार्ड नं 4 में इनके मकान एक साथ हैं, लेकिन जैसे इनके परिवार में सदस्यों की संख्या बढ रही है। वैसे ही लोग हिंगोनिया तालाब की भूमि पर अतिक्रमण कर टापरियां बनाकर निवास करने लगे हैं। ग्राम पंचायत सरपंच बाबूलाल चंदेल का कहना है कई लोगों के नाम से आवास स्वीकृत होने के बाद यह लोग टापरियां बनाकर निवास करते हैं। बृजमोहन कालबेलिया, लटूरलाल, दिवानशु, मोरपाल कालबेलिया का कहना है कि हमारे समाज के लोगों व महिलाओं को बैठ कर समाज के हित में फैसले लेने बैठने के लिए हथाइ के नाम से जगह होनी चाहिए। समाज के लोगों का कहना है कि कालबेलिया समाज कभी सांपों को संभालने वाले हुआ करते थे। कालबेलिया शब्द ही काल अर्थात सर्प और बलिया अर्थात मित्र शब्दों से मिलकर बना है। कालबेलिया जनजाति समाज का पारंपरिक पेशा सांप को पकडऩा होता है, लेकिन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम लागू होने इस पर रोक लगे के बाद इस जाति के सामने संकट खड़ा हो गया है। अब यह सपेरा के रूप में अपनी पारंपरिक आजीविका दूर चले गए हैं। वर्तमान में जो भी काम उन्हें मिलता है वहीं ये करने लगे हैं।
पंचायत ने की समाधि के लिए जगह स्वीकृत

सरपंच बाबूलाल चंदेल का कहना है की कालबेलिया परिवार समाज में किसी की मौत हो जाती है तो शव का दाह संस्कार नहीं करके समाधि दी जाती है। ग्राम पंचायत के वार्ड 3 के मुक्तिधाम के पास कालबेलिया समाज के समाधि के नाम से जगह स्वीकृत है।

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