निकाय चुनावों के बाद बारां की कमान आएगी एससी महिला के हाथ

निकाय चुनावों के बाद बारां की कमान आएगी एससी महिला के हाथ

बारां. स्थानीय निकाय प्रमुखों के लिए रविवार को जयपुर में निकाली गई लॉटरी में बारां नगर पालिका सभापति का पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित किया गया। राज्य भर के निकाय प्रमुखों के लिए निकाली गई लाटरी में अन्ता नगर पलिका व छबड़ा नगर पालिका का पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है जब कि मांगरोल अन्य पिछड़ा (ओबीसी) वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है।

निकाय चुनावों के बाद बारां की कमान आएगी एससी महिला के हाथ

बारां. स्थानीय निकाय प्रमुखों के लिए रविवार को जयपुर में निकाली गई लॉटरी में बारां नगर पालिका सभापति का पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित किया गया। राज्य भर के निकाय प्रमुखों के लिए निकाली गई लाटरी में अन्ता नगर पलिका व छबड़ा नगर पालिका का पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है जब कि मांगरोल अन्य पिछड़ा (ओबीसी) वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। निकाय प्रमुखों के लिए लाटरी की घोषणा के साथ ही निकायों की राजनीति के पासे बदल गए हैं। राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ता अभी से अपने दांव पैच लगाने लगे हैं। नवीन अरक्षण के बाद बारां में जहां एस सी से जुड़ी महिलाओं में उत्साह है वहीं अन्ता और छबड़ा में सामान्य वर्ग उत्साहित है। मांगरोल में ओबीसी वर्ग का उत्साह हिलोरे मार रहा है। सभी सीटों पर वर्ग बदलने से नेय नेताओं का पदार्पण होगा। इससे पहले वर्ष 2014 में निकली लाटरी में बारां सभापति की सीट ओबीसी के लिए आरक्षित थी। इसी प्रकार अन्ता एससी महिला,मांगरोल सामान्य व छबड़ा ओबीसी महिला के लिए आरक्षित थी।

जीवन झूल जाता है तारों पर, फिर कर पाते हैं रास्ता पार
वारां. जहां चाह वहां राह की कहावत चरितार्थ करते हुए नाले पर बनाए गए दो तारों के रास्ते से यूं तो समसपुर गांव के ग्रामीण गुजरकर समय व लम्बी दूरी तो बचा लेते हंै लेकिन वहीं दूसरी और इस दौेरान इनकी जान का खतरा भी बना रहता है।
जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर मांगरोल रोड स्थित पर समसपुर गांव के लोगों को खेती बाड़ी के काम में लम्बी दूरी की राह परेशानी का सबब बनी हुई है। गांव में करीब दो दर्जन से अधिक किसानों के खेत गांव में बह रहे नाले के दूसरी और स्थित है। इसके चलते उन्हे अपने खेत तक पहुंचने के लिए बोरेड़ी गांव के मार्ग से होकर चार पांच किलोमीटर की लम्बी दूरी तय कर के खेतों तक पहुंचना पड़ता है।
ऐसे में उन्हे काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। इन किसानों को अपनी सैकड़ों बीघा की जमीन को हंकाई जुताई से लेकर फसल निकालने तक काफी पीड़ा होती है। कई वर्षो से इस पीड़ा का समाधान तो प्रशासन कर नहीं पाया। लेकिन गांव के लोगों ने नाले के उपर दो तारों को बल्लियों से बांध कर रास्ता तैयार किया हुआ है। इस पर से ये लोग आते जाते हैं। इस दो तारों की राह पर पुरुष ही नहीं महिलाएं व बच्चे भी निकलते हंै। वही इसी के रास्ते चारा भी लेकर आते हैं।

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Shivbhan Sharan Singh
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