पलायन करने वाले पात्र किसान को लेकर परेशानी

पलायन करने वाले पात्र किसान को लेकर परेशानी

Shivbhan Sharan Singh | Publish: Aug, 12 2018 01:32:37 PM (IST) Baran, Rajasthan, India

कृषि ऋण माफ योजना का लाभ लेने के लिए कृषकों को कई जतन करने पड़ रहे हैं तो गांवों से पलायन कर गए

कृषि ऋण माफी योजना
दस्तावेज नहीं, अटकी कई लाभार्थियों की आस
बारां. सरकार की कृषि ऋण माफ करने की योजना का लाभ लेने के लिए कृषकों को कई जतन करने पड़ रहे हैं तो सहकारी संस्थाओं के लिए गांवों से पलायन कर गए लोगों को तलाशना भारी पड़ रहा है। सरकार की योजना के तहत जिले के लगभग ३६ हजार कृषकों के ऋण माफ करना है। इनमें २७ हजार किसानों के खातों में तो कर्ज माफी की राशि जमा हो गई, लेकिन ९ हजार किसानों तक योजना का लाभ पहुंचाना अभी शेष है। इनमें वे ऋणी कृषक हैं, जिन्होंने अब तक भामाशाह कार्ड नहीं बनवाए तथा कई की मौत हो गई। इनका चिन्हीकरण तो सहज होगा, लेकिन जो कृषक गांवों से पलायन कर गए, उन्हें तलाशना सहकारी समितियों व बैंकों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
ढाई हजार के नहीं भामाशाह कार्ड
विभागीय सूत्रों का कहना है कि इनदिनों ऋण माफी के प्रमाण पत्र वितरित किए जा रहे हैं। इस दौरान करीब ढाई हजार ऋणी कृषक ऐसे हैं, जिनके पास भामाशाह कार्ड नहीं है। यह लोग कर्ज माफी की राशि अपने खाते में जमा कराने के लिए पहुंचते है तो उनसे भामाशाह कार्ड मांगे जाते हैं। इसके बाद ऐसे आशार्थी ई-मित्र केन्द्रों पर भामाशाह कार्ड के लिए पंजीयन कराने पहुंचते हैं।
ऐसे करेंगे समाधान
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि पलायन करने वाले किसानों के खातों में कर्ज माफी की राशि समायोजित करने के लिए अब पटवारी व सम्बन्धित ग्राम सेवकों से रिपोर्ट मांगी गई है। यह लोग कृषकों के पलायन करने की जानकारी को सत्यापित कर विभाग को सौंपेंगे। इसके बाद उच्चस्तरीय निर्देशानुसार कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
&सरकार की घोषणा के अनुसार जिले में अब तक ११२ करोड़ रुपए के कर्ज माफ कर राशि किसानों के खातों में समायोजित कर दी गई है। ऐसे किसानों को कर्ज माफी के प्रमाण पत्र भी वितरित कर दिए हैं। जिन पात्र कृषकों के पास भामाशाह कार्ड नहीं हैं, उनसे कार्ड के लिए पंजीयन कराने को कहा है तथा पंजीयन रसीद नम्बर के आधार पर राशि का समायोजन खातों में किया जाएगा। पलायन करने वाले कृषकों की भी सूचियां पटवारी व ग्राम सेवकों से ली जाएंगी।
संजय पाठक, प्रबंध निदेशक, सहकारी बैंक
हजारों किसान कर गए पलायन
सहकारी विभाग के अधिकारियों के अनुसार कर्ज माफी के पात्र किसानों की जो सूचियां तैयार कराई थीं, उनमें ६ हजार ५०० कृषक ऐसे मिले हैं, जो या तो दुनिया छोड़ गए या फिर गांवों से अन्यत्र पलायन कर गए। ऐसे में इनके ऋण खातों में कर्ज माफी की राशि समायोजित करना संभव नहीं है। इसका कारण इन ऋणियों द्वारा वांछित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करना है। मृत कृषकों के मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर माफी की राशि का समायोजन किया जा रहा है।

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