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Hospitalखुद स्ट्रेचर घसींटकर ले जाते है परिजन

-व्हील चेयर गेट पर नहीं मिलने से हो रही परेशानी

बारां

Published: March 29, 2022 11:32:08 pm

बारां. जिला अस्पताल में यों तो संसाधनों की कमी नहीं है, लेकिन समय पर तत्काल व्यवस्था सुलभ नहीं हो रही है। मरीजों व उनके परिजनों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। यहां अस्पताल में घूसते ही स्ट्रेचर और व्हील चेयर को लेकर परेशानी रहती है। सबसे अधिक समस्या अचेत अवस्था में पहुंचने वाले व घायल लहूलूहान मरीजों को लेकर अस्पताल पहुंचने पर हो रही है। परिजन खुद निजी वाहन व एम्बुलेंस से मरीज का उतारते है, फिर स्ट्रेचर पर लेटाकर खुद स्ट्रेचर खींच कर चिकित्सक कक्ष व वार्ड तक ले जाते है। इस समय परिजनों को सहानुभूति और सहयोग की खास आवश्यकता होती है, लेकिन कई बार स्ट्रेचर पर कर्मचारी नहीं मिलने से असुविधा होती है।
खुद स्ट्रेचर घसींटकर ले गए परिजन
शाम करीब पांच बजे अटरू क्षेत्र के कासमपुरा गांव निवासी लाड़बाई की तबीयत बिगडऩे पर परिजन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे तो भर्ती टिकट बनने में ही काफी समय लग गया। हालांकि वे पहले ही फिजीशियन को दिखाकर उनकी सलाह पर ही भर्ती कराने आपातकालीन वार्ड में पहुंचे थे। भर्ती टिकट बनने तक मरीज लाड़बाई उनके निजी वाहन में ही रही। बाद में परिजनों ने उसे उतारा तथा स्ट्रेचर पर लेटाकर खुद घसींटते हुए आपातकालीन वार्ड लेकर गए। ड्यूटी चिकित्सक ने देखा तो दवाइयां लिखी। इस तरह मरीज का उपचार शुरू होने में करीब आधा घंटे का समय लग गया।
खून बहने के बाद भी खुद पहुंचा
शाम करीब 5.37 बजे शहर के कुंजविहार कॉलोनी निवासी रामदयाल निर्माण कार्य स्थल पर मजदूरी करते समय पट्टी गिरने से घायल हो गया था। उसके एक पैर के पंजे से खून की धार फूट रही थी। वह एक परिजन युवक के कंधे पर हाथ रखकर किसी तरह चिकित्सक तक पहुंचा, लेकिन उसे व्हील चेयर नहीं मिली। इसी दौरान एक वार्ड ब्वाय ने खून बहने से फर्श खराब होते देखा तो उसकी संवेदना जागी और उसने उसे कुर्सी पर बैठाकर वार्ड के बाहर ही कॉटन पट्टी बांधकर पैर से बहते खून को रोका। हालांकि बाद में वार्ड में उसके टांके भी लगाए गए तथा भर्ती किया गया।
एम्बुलेंस के बंदोबस्त में लग गया आधा घंटा
वैसे घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस की कमी नही है। लेकिन अस्पताल पुलिस चौकी को ट्रेन से एक व्यक्ति के कटने की सूचना मिली। इसके बाद पुलिस कर्मी यादराम एम्बुलेंस का बंदोबस्त करने में जुटा तो मौजूद कर्मचारियों द्वारा सही तरीके से जानकारी नहीं देने पर उसे एम्बुलैंस का बंदोबस्त करने ही काफी देर लग गई। बाद में एक एम्बुलेंस चालक तैयार हुआ तथा उसने घायल को अस्पताल पहुंचाया। इस प्रक्रिया में करीब आधा घंटा लग गया। आधे घंटे तक घायल रेलवे ट्रेक के समीप ही तड़पता रहा। उसका एक पैर कुचल जाने से चिकित्सकों ने उसे कोटा रैफर किया।
Hospitalखुद स्ट्रेचर घसींटकर ले जाते है परिजन
Hospitalखुद स्ट्रेचर घसींटकर ले जाते है परिजन
-स्ट्रेचर आपातकालीन वार्ड के गेट पर रखी रहती है। व्हील चेयर हेल्प डेस्क पर रहती है। अनजाने में लोग वहां तक नहीं पहुंचते तो उन्हें ही परेशानी हो सकती है। स्ट्रेचर पर 24 घंटे कर्मचारी रहता है। ऐसी कोई बात नहीं है। मरीजों की सुविधा का खास ध्यान रखा जा रहा है।
-डॉ. राजेन्द्र कुमार मीणा, पीएमओ, जिला अस्पताल

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