मोर पवित्र पक्षी, इसका शिकार नहीं करें

जिले में बढ़ते जा रहे राष्ट्रीय पक्षी 'मोरÓ के शिकार की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए शनिवार को वन

दबलाना।जिले में बढ़ते जा रहे राष्ट्रीय पक्षी 'मोरÓ के शिकार की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए शनिवार को वन विभाग की ओर से शंकरपुरा कंजर कॉलोनी में लोगों से समझाइश की गई।प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुरेन्द्र सिंह ने उपस्थित लोगों से अपील की कि मोर का शिकार नहीं करे। मोर पवित्र पक्षी है जिसका पंख भगवान श्रीकृष्ण के माथे पर लगाया जाता है।इस मौके पर उपस्थित कंजर युवाओं ने बताया कि झालावाड़ जिले की तरह बूंदी जिले में भी कंजर समाज के लोगों को वन विभाग में नियुक्ति दी जाए।

वे सामाजिक प्रतिबन्ध के चलते शिकारियों का विरोध कर प्रशासन को उनके नाम नहीं बता सकते। यदि युवकों की टीम गठित कर दी जाए तो मोर के शिकार पर पूर्ण रूप से काबू पाया जा सकता है।इस अवसर पर कंजर समाज के पंच पटेलों ने मोर के शिकारी का नाम बताने पर किसी प्रकार का सामाजिक दंड नहीं करने की घोषणा की।इस दौरान मुख्य वन संरक्षक कोटा इन्द्रराज सिंह, मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव कोटा पी.के. उपाध्याय, वन संरक्षक कोटा अनिल कपूर, बूंदी के उपवन संरक्षक दिग्विजय गुप्त, वन्यजीव कोटा के उपवन संरक्षक राकेश शर्मा भी मौजूद थे।

सुरक्षा की सौंपी जिम्मेदारी

वन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर ही विभाग के प्लांटेशन सुरक्षा में विच्छराम कंजर व पप्पू कंजर को नियुक्त करने की बात कही।इस दौरान कई लोग मौजूद थे।


ग्रामीण व वन्यजीव प्रेमी करते रह गए इंतजार

बूंदी. प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) बूंदी आए और वन्यजीव प्रेमियों से नहीं मिले। इसे लेकर बाद में यहां वन्यजीव प्रेमियों ने नाराजगी जाहिर की। पीसीपीएफ का नैनवां उपखंड क्षेत्र का दौरा भी प्रस्तावित था, लेकिन यहां भी ग्रामीण इंतजार करते रह गए। वन्यजीव प्रेमी बिट्ठल सनाढ्य ने बताया कि इस प्रकार के दौरे से कोई परिणाम नहीं निकलते। बूंदी जिले में सर्वाधिक राष्ट्रीय पक्षी का शिकार हो रहा है, जो यहां लोगों के लिए चिंता का विषय है। अधिकारियों को चाहिए था कि वे लोगों को मिलकर इस पर रोक के लिए ठोस कार्रवाई के लिए चर्चा करते।
मुकेश शर्मा Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned