ध्यान चूका तो समझो गई भैंस पानी में, खतरों से भरी है रैफी नदी, चार माह होते हैं जोखिम से भरे

Shiv Bhan Singh | Updated: 09 Oct 2019, 03:51:13 PM (IST) Baran, Baran, Rajasthan, India

ध्यान चूका तो समझो गई भैंस पानी में, खतरों से भरी है रैफी नदी, चार माह होते हैं जोखिम से भरे

देवरी. देवरी क्षेत्र के वीलखेड़ा माल होते हुए गोयरा , होडापुरा, वरईपुरा , पुरा , तीघरा, खरवाया , गल्थुनी एवं पोहरी मध्यप्रदेश को सीधा जोड़ने वाले मार्ग पर होडापुरा गांव को पार करते समय रैफी नदी की पुलिया पर बरसात के चार माह लगातार करीब दो तीन फिट की चादर चलती रहती है जिससे इन चार माह मार्ग अवरुद्ध रहता है । एवं देवरी कस्बे का संपर्क कट जाता है ।

ध्यान चूका तो समझो गई भैंस पानी में, खतरों से भरी है रैफी नदी, चार माह होते हैं जोखिम से भरे

देवरी . देवरी क्षेत्र के वीलखेड़ा माल होते हुए गोयरा , होडापुरा, वरईपुरा , पुरा , तीघरा, खरवाया , गल्थुनी एवं पोहरी मध्यप्रदेश को सीधा जोड़ने वाले मार्ग पर होडापुरा गांव को पार करते समय रैफी नदी की पुलिया पर बरसात के चार माह लगातार करीब दो तीन फिट की चादर चलती रहती है जिससे इन चार माह मार्ग अवरुद्ध रहता है । एवं देवरी कस्बे का संपर्क कट जाता है । ग्रामीणों का प्रशांत , आकाश का कहना है की चुनाव के समय राजनेता आते है ओर रैफी नदी पर बड़ा पुल बाँधने की बात करते है । लेकिन अभी तक ऐसा नही हुआ । बारिश के इन चार महीने दर्जनो भर गांवो के लोग अपनी जान जोखिम में डालकर रैफी नदी की रपट पर चल रही चादर को पार करते है। एवं लगातार रपट पर चादर चलने से काई जम जाती है जिससे कई बार दुपहिया वाहन चालक इस काई की फिसलन से चोटिल भी हुए है । जिससे हमेशा दुर्घटना का अंदेशा लगा रहता है।

घंटो इंतजार करना होता है

रैफी नदी बड़ी नदी है इसमे मध्यप्रदेश के कई गांवो का पानी आता है एवं पुलिया छोटी होने के कारन तुरंत उफान पर हो जाती है उन गांवो के लोगों कोएवं राहगीरों को नदी में उफान होने की स्थिति में नदी के घाट पर ही घंटो इंतजार करना पड़ता है जब नदी का उफान कम नही होता तब पास के गांव गोयरा या सहराना बस्ती में ही राहगीरों रात गुजारनी पड़ती है । जबकि इस वर्ष लगातार बारिश के चलते नदी में रोज उफान देखने को मिला ओर आज भी करीब दो फिट की चादर चलने से मार्ग अवरुद्ध है । लोगों को पोहरी शिवपुरी मध्यप्रदेश होते हुए राजस्थान आना होता है जिससे आर्थिक एवं समय का नुकसान उठाना पड़ता है।

जंगल के रास्ते से आने जाने को मजबूर

रैफी नदी की रपट पर लगातार चादर चलने से आने जाने वाले राहगीरों को जंगल के रास्ते होते हुए चौराखाड़ी से देवरी आना होता है जिसमे इस साल लगातार बारिश के चलते चौराखाडी मार्ग पर भी रैफी नदी पड़ती है जिससे इस बारिश में यह पुलिया भी नदी के तेज बहाव के चलते क्षतिग्रस्त हुई । बाद में मरम्मत करा दी । लेकिन जंगल का रास्ता होने की वजह से राहगीर आने जाने से कतराते है एवं डर लगा रहता है । या फिर पोहरी शिवपुरी मध्यप्रदेश मार्ग से राजस्थान आना जाना होता है जिसमे समय एवं अर्थ दोनो का नुकसान होता है । ऐसे में रैफी नदी पर बड़े पुल का निर्माण हो जाए तो समस्या का समाधान हो जाएगा ।

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