बरसों बाद भी सुधर नहीं रहे आदिवासियों के हालात

बारां. जिले के आदिवासी सहरिया बहुल क्षेत्र में लोगों को मूलभूत सुविधाएं मयस्सर नहीं हो रही। कहीं रोजगार का संकट विकट है तो कई सहराणों (सहरिया बस्तियों) में रात को अंधेरा पसरा रहता है। पेयजल संकट गहराने के साथ अब कई गांवों में हालात बेकाबू होने लगे हैं। हैण्डपम्पों के हवा फेंकने से लोगों मीलों दूर की दूरी तय कर पेयजल का जुगाड़ करते हैं। सरकारी अधिकारियों ने अभी कोई प्रयास शुरू नहीं किए, खराब हैण्डपम्पों की मरम्मत भी शुरू नहीं हुई। सहरियाओं का जीवन स्तर सुधारने के लिए सरकार एक ओर करोड़ों रुपए खर्च

By: Ghanshyam

Published: 19 Mar 2020, 08:52 AM IST

केलवाड़ा. इनदिनों भले ही सुबह व शाम को गुनगुनी सर्दी का असर बरकरार है, दिन में गर्मी की आहट शुरू होते ही जिले के आदिवासी अंचल में पेयजल संकट गहराने लगा है। कस्बे के निकटवर्ती 120 सहरिया परिवारों की बस्ती वाले गांव चैनपुरा के लोग तो अभी से दो किलोमीटर दूर से पेयजल का प्रबंध कर रहे हैं। इस गांव में प्राकृतिक जलस्त्रोत सिर्फ एक नदी है, जो अब सूख चुकी हैद्ध जो नलकूप लगे हुए हैं, उनका जलस्तर गिरने से अनुपयोगी हो गए।
चैनपुरा में करीब 11 वर्ष पूर्व एक एनजीओ व एडीपी बारां द्वारा पेयजल वितरण के लिए टंकी का निर्माण कराया गया था, जिसमें केवल एक बार ही पेयजल भरा गया है। टंकी केवल शोपीस बनकर ही रह गई है, ग्रामीणों को पेयजल सुविधा नहीं मिल रही है। जिससे ग्रामीण दूरदराज से पानी लाने को मजबूर हैं। ग्रामीण गोपाल सहरिया, पांची बाई सहरिया, प्रीतम सहरिया, विसना सहरिया ने बताया कि कई बार ग्राम पंचायत व जलदाय विभाग को अवगत कराया है, लेकिन ना तो जलदाय विभाग ने सुनी है और ना ही ग्राम पंचायत ध्यान दे रहा। इनकी अनदेखी के चलते यहां लोग काम काज छोड़कर डेढ़ से दो किलोमीटर दूर निजी नलकूप से पानी लाने के लिए मजबूर है।
इन्हें निजी नलकूप का सहारा
निकटवर्ती ग्राम पंचायत खांखरा के गांव जंवाईपुरा में भी पेयजल संकट गहराने लगा है। यहां सिर्फ सहरिया परिवार रहते हैं, लेकिन न तो हैण्डपम्प है और न ही कोई कुआ। यहां भी ग्रामीण दूरदराज से पानी लाने को मजबूर हो गए हैं। प्रकाश सिंह चौहान ने बताया कि ग्राम पंचायत ने ग्रामीणों की मांग के बाद एक प्लास्टिक टंकी बस्ती में रखवाई है, जिसे एक निजी ट्यूबवैल से भरा जाता है। ऐसे में पूरी बस्ती एक ही टंकी पर आश्रित है। पानी के अभाव में लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन यहां पर दम तोड़ता दिखाई देती है। कई बार विद्युत आपूर्ति नहीं होने की दशा में संपूर्ण गांव में जल संकट गहरा जाता है।
आकर खो गया स्वच्छ भारत मिशन
चैनपुरा निवासी हेमराज सहरिया, सावित्री सहरिया, गेंदा बाई, प्रीतम सहरिया, रामस्वरूप, सेन्दु, चंदर सहरिया, सीताराम, किशोरी, सुगना बाई व ममता बाई ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत ठेकेदारों के द्वारा हमारी बस्ती में शौचालय तो बना दिए, लेकिन शौचालय शोपीस बनकर रह गए हैं। ऐसे में खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। क्षेत्रवासियों की माने तो क्षेत्र में विगत वर्षों से जलस्तर गिरता जा रहा है। इसके चलते हैण्डपंप अनुपयोगी हो गए हैं। शाहाबाद पंचायत समिति के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि ग्राम पंचायतों को गांवों में पेयजल के पुख्ता बंदोबस्त करने के प्रबंध किए जाने चाहिए। जलदाय विभाग भी सरकार की मंशा के अनुरूप ऐसे गांवों को चिन्हित कर वैकल्पिक उपाय करने चाहिए।

Ghanshyam Bureau Incharge
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