महकती है धरतीपुत्रों की मेहनत की गंध

10 अप्रेल 1991 को जिले का दर्जा प्राप्त करने के बाद से अब तक के सफर में कई उतार-चढ़ाव आए हैं। कभी

By: मुकेश शर्मा

Published: 10 Apr 2016, 11:40 PM IST

बारां।10 अप्रेल 1991 को जिले का दर्जा प्राप्त करने के बाद से अब तक के सफर में कई उतार-चढ़ाव आए हैं। कभी विकास के रास्ते खुले तो कभी रफ्तार में कमी भी आई, लेकिन 25 वर्षों बाद बारां पहले से ज्यादा मजबूत हुआ है। कृषि प्रधान इस जिले में विकास रूपी पौधे को पोषित करने में धरतीपुत्रों का पसीना शामिल रहा तो वन, पुरासम्पदा एवं सांस्कृतिक समृद्धता ने जिले को अलग पहचान दिलाई है।

बारां के धनिया, धान, लहसुन की कई प्रदेशों में धाक है तो कृषि आज भी यहां की अर्थव्यवस्था की धुरी है। बारह लाख से अधिक आबादी वाले बारां जिले के दिल में ग्रामीण संस्कृति धड़कती है। 6 हजार 992 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले जिले में शहरी क्षेत्र केवल 82.18 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में है, शेष ग्रामीण। जिले के शहरी क्षेत्र में जहां बारां का डोल मेला सांस्कृतिक मायने में अव्वल है तो किशनगंज का फूलडोल लोकोत्सव, अन्ता की ढाई कड़ी की रामलीला, अटरू की धनुषलीला, सीताबाड़ी व गुगोर मेले में जिले की सांस्कृतिक विविधता जीवंत होती है। ग्रामीण अंचल में कई अन्य उत्सव-लोकोत्सव जिले की संस्कृति का पोषण करते हैं। विकास के पथ भी बीते कुछ वर्षों में रफ्तार बढ़ी ही है।

बढ़ते गए कदम


जिला बनने के बाद यहां अलग प्रशासनिक ढांचा खड़ा करने की शुरुआत हुई। नए उपखंडों, तहसीलों एवं उपतहसीलों के गठन की शुरुआत हुई। मौजूदा समय में जिले में 8 उपखंड, 8 तहसीलें हैं। कोटा रोड स्थिति मिनी सचिवालय भवन में एक ही जगह जिला कलक्टर, पुलिस अधीक्षक कार्यालय समेत कई विभागों के दफ्तर संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा सड़कों के मामले मेंसौगातें मिली। करोड़ों की लागत से जिले में 141 किमी. में फोरलेन हाई-वे बना तो बारां-झालावाड़ मेगा हाई-वे की सड़क भी गत वर्षों में नई बनी। मांगरोल-बारां-खानपुर स्टेट हाई-वे का निर्माण भी करोड़ों की लागत से हुआ। बारां-अटरू-अकलेरा हाई-वे-90 पर 122 करोड़ के काम हुए हैं। 30 करोड़ से बारां में सिटी फोरलने सड़क बनी।



बिजली के क्षेत्र में छबड़ा थर्मल पावर प्लांट, अन्ता एनटीपीसी व कवाई अदानी पावर प्लांट जिले को पावर हब बना रहे हैं। वर्तमान में यहां राज्य विद्युत उत्पादन निगम के छबड़ा सुपर थर्मल पावर प्लांट में 250 मेगावाट की चार इकाइयों में विद्युत उत्पादन हो रहा है तथा सुपर क्रिटिकल प्लांट के 660-660 मेगावाट की दो इकाइयों का निर्माण प्रगति पर है। इसके एनटीपीसी अन्ता में 419 मेगावाट व सालपुरा में अदानी पावर प्लांट में दो इकाइयों में बिजली बन रही है।


मन मोह लेती कृष्णमृगों की कुलाचें


2 लाख 23 हजार हैक्टेयर वन क्षेत्र वाला बारां जिला वन क्षेत्र के मामले में प्रदेश में तीसरे स्थान पर है। यहां के जंगलों में कई जड़ी-बूटियां एव वनोपज मिलती है। शाहाबाद के जंगलों में बीते वर्षों में पैंथर की मौजूदगी भी प्रमाणित हुई है। सोरसन वन क्षेत्र में कृष्णमृगों के बढ़ते कुनबे के बीच इसे पर्यटन के नक्शे पर लाने के प्रयास भी हुए। यहां डेढ़ हजार से अधिक कृष्णमृग हैं। यह बात अलग है कि जिले के सोरसन वन क्षेत्र को अब तक अभयारण्य का दर्जा नहीं मिला। सोरसन को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के प्रयास भी धरातल पर नहीं आ रहे।

आज कई कार्यक्रम


बारां. जिला स्थापना अवसर पर रविवार को विभिन्न कार्यक्रम होंगे। अतिरिक्त जिला कलक्टर नरेश मालव ने बताया कि सुबह शोभायात्रा, दोपहर में क्विज प्रतियोगिता एवं सांय को सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जाएगा। सुबह साढ़े आठ बजे प्यारेराम जी मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद शोभायात्रा निकलेगी जो धर्मादा चौराहा से होते हुए श्रीराम स्टेडियम पर सम्पन्न होगी। शोभायात्रा में सजे-धजे 5 ऊंट एवं 5 घोड़े सम्मिलित होंगे। साथ ही सिर पर कलश लिए सैंकड़ों महिलाएं मंगल गीत गाती चलेंगी। दोपहर दो बजे न्यू ऐरा स्कूल में बारां को जानो प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा वहीं सांय 8 बजे से लाफ्टर शो के साथ सांस्कृतिक संध्या का आयोजन शुरू होगा।
मुकेश शर्मा Reporting
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