उपचार के लिए रोगियों की कतारें

जिला चिकित्सालय में शनिवार को रोगियों को उपचार के लिए गहमा-गहमी रही। आउटडोर में करीब अट्ठारह सौ से अधिक रोगी पहुंचे, लेकिन कई रोगियों को चिकित्सक नहीं मिले तो अधिकांश रोगियों को नम्बर के लिए खासा इन्तजार करना पड़ा। सैकड़ों रोगी व उनके परिजन तो नम्बर नहीं आने से निराश लौट गए।

By: Dilip

Published: 10 Mar 2019, 11:09 AM IST

बारां. जिला चिकित्सालय में शनिवार को रोगियों को उपचार के लिए गहमा-गहमी रही। आउटडोर में करीब अट्ठारह सौ से अधिक रोगी पहुंचे, लेकिन कई रोगियों को चिकित्सक नहीं मिले तो अधिकांश रोगियों को नम्बर के लिए खासा इन्तजार करना पड़ा। सैकड़ों रोगी व उनके परिजन तो नम्बर नहीं आने से निराश लौट गए। कई मरीजों ने निजी चिकित्सालयों मेंं पहुंच उपचार लेना पड़ा। जो चिकित्सक आउटडोर में उपचार परामर्श के लिए मौजूद थे, उनके कक्षों के बाहर लम्बी कतारें लगी रही। आलम यह रहा कि लम्बी कतारों में लगे रोगियों को इन्तजार भारी पड़ा। जिला चिकित्सालय के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि चार चिकित्सकों के शिविर में जाने व दो के अवकाश पर यह हालात बने।
सुबह से कर रहे इन्तजार
सुबह करीब साढ़े दस बजे जिला चिकित्सालय में एक चिकित्सक कक्ष के बाहर कतार में खड़े शहर निवासी जगदीश सुमन ने बताया कि वह उसकी मां को बुखार आने से दिखाने आया है, पर्ची बनवाने के बाद से नम्बर आने का इन्तजार कर रहा है, लेकिन भीड़ अधिक होने से नम्बर नहीं आ रहा। मां को बुखार चढ़ रहा है।
चार चिकित्सक शिविर में
चिकित्सालय सूत्रों के अनुसार शनिवार को विभागीय उपचार शिविर होने से डॉ. अनुराग खींची, डॉ. पंकज परूथी, डॉ. एसके मालव व डॉ. बृजेश गोयल उसमें ड्यूटी पर चले गए। एक डॉ. भोलाराम दिलावर दुर्घटनाग्रस्त होने से अवकाश पर चल रहे हैं। इससे भी अस्पताल का आउटडोर प्रभावित रहा है। सबसे अधिक रोगियों की भीड़ अस्थि विभाग के आउटडोर में नजर आई।
जनरल कक्ष में भीड़
यहां आउटडोर में जनरल उपचार कक्ष में सुबह तीन चिकित्सक उपचार परामर्श दे रहे थे। ऐसे में इस कक्ष के बाहर सर्वाधिक गहमा-गहमी बनी हुई थी। इस कक्ष में बैठे चिकित्सकों को फुर्सत तक नहीं थी। वे एक के बाद एक मरीज की जांच कर परामर्श देने व उपचार पत्र बनाने में व्यस्त रहे।
फिजीशियन डॉ. हंसराज सुमन ने बताया कि आउटडोर अब तक बढ़ा हुआ है। रइनदिनों सर्दी, खांसी व वायरल के रोगी अधिक आ रहे हैं। जो भी रोगी आते हैं, उनका उपचार किया जा रहा है।
इतने पद हे रिक्त
यहां आउटडोर के अनुसार जिला चिकित्सालय में 90 चिकित्सकों की नियुक्ति होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान में 52 चिकित्सक ही पदस्थ हैं।
नर्सिंग कर्मचारियों के स्वीकृत पदों में से भी एक तिहाई पद रिक्त हैं। नर्सिंगकर्मियों व चिकित्सकों के अवकाश रहने से भी उपचार व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ता है। जिले व शहर की बढ़ती आबादी के अनुसार कर्मचारियों की संख्या बढऩी चाहिए।

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