ग्यारह मुल्कों में बारां का डंका बजाने वाली ग्यारसी बाई ने जीवन को चुपचाप कहा अलविदा

Shivbhan Sharan Singh

Publish: Jul, 13 2018 08:08:36 PM (IST)

Baran, Rajasthan, India
ग्यारह मुल्कों में बारां का डंका बजाने वाली ग्यारसी बाई ने जीवन को चुपचाप कहा अलविदा

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने बनाई थी फिल्म
आमिर खान ने किया था सम्मान
सहरिया समाज की शख्सियत ग्यारसीबाई का निधन

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने बनाई थी फिल्म
आमिर खान ने किया था सम्मान
सहरिया समाज की शख्सियत ग्यारसीबाई का निधन
भंवरगढ़/बारां. सिविल सोसाइटी की ओर से ी शक्ति पुरस्कार प्राप्त व बारां जिले को विश्व पटल पर पहचान दिलाने वाली सहरिया समाज की शख्सियत एवं जाग्रत महिला संगठन व संकल्प संस्था की वरिष्ठ कार्यकर्ता ग्यारसीबाई सहरिया (५८) का गुरुवार रात आकस्मिक निधन हो गया। देर रात भंवरगढ़ स्थित संस्था परिसर में उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा। इसके बाद उन्हें चिकित्सालय ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया। बंधुआ मजदूरी, सूचना का अधिकार, मनरेगा व महिला हिंसा से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने वाली ग्यारसीबाई जिले के आदिवासी अंचल में सहरिया महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती थीं। उन्हें कई मौकों पर सम्मानित किया जा चुका है। गत आठ मई को बारां में आयोजित कार्यक्रम में पत्रिका समूह के प्रधान संपादक डॉ. गुलाब कोठारी ने भी ग्यारसीबाई को सम्मानित किया था।
अमेरिका में भी नाम
ऑल ऑफ द फेम, सिविल सोसायटी की ओर से ग्यारसीबाई को स्त्री शक्ति पुरस्कार से नवाजा गया तो वह टीवी पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम सत्यमेव जयते में भी शामिल हुई जहां सिने अभिनेता आमिर खान ने उनकी जिंदगी से प्रभावित होते हुए उनका सम्मान किया। इसके अलावा अमेरिका की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की टीम द्वारा ग्यारसी बाई पर एक फिल्म का निर्माण कर वहां के विद्यार्थियों को दिखाया जा रहा है।
ऐसे बढ़े कदम
संकल्प संस्था के महेश बिंदल ने बताया कि किशनगंज क्षेत्र के एक छोटे से गांव फल्दी की निवासी ग्यारसी बाई 1992 से आदिवासी अंचल में सहरिया व अन्य पिछड़े वर्ग के लिए काम कर रही थीं। अभावों से जूझने के बावजूद वे पीछे नहीं हटीं। उनके काम को देखते हुए राज्य स्तर पर कई बार सम्मान भी मिला। मनरेगा, सूचना का अधिकार, बंधुआ मजदूरी, महिला हिंसा जैसे मुद्दों को लेकर उठी आवाज में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। रैलियों, प्रदर्शन के दौरान वे अधिकारियों से बेबाकी से बात करने में नहीं हिचकती थी। साक्षरता के नाम पर केवल अपना नाम लिखना जानने वाली ग्यारसी बाई पिछले काफी समय से कम्प्यूटर पर हाथ चलाना जानने लगी थी। उनकी प्रेरणा से कई अन्य बालिकाएं कम्प्यूटर ज्ञान पाने के लिए आगे आईं।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

Ad Block is Banned