बरुबेह भीलान को आजादी का इन्तजार,गंभीर मरीजों को चारपाई से लाना पडता है गांव से बाहर

बरुबेह भीलान को आजादी का इन्तजार,गंभीर मरीजों को चारपाई से लाना पडता है गांव से बाहर

Shiv Bhan Singh | Publish: Sep, 07 2018 05:42:50 PM (IST) Baran, Rajasthan, India

हरनावादाशाहजी. सीमावर्ती झालावाड जिले की शोरती ग्राम पंचायत के बरुबेह भीलान गांव के लोग पिछले पांच साल से बंद रास्ते की पीडा का दंश झेलने को मजबूर हैं।

प्रमोद जैन
हरनावादाशाहजी. सीमावर्ती झालावाड जिले की शोरती ग्राम पंचायत के बरुबेह भीलान गांव के लोग पिछले पांच साल से बंद रास्ते की पीडा का दंश झेलने को मजबूर हैं। उनकी इस मजबूरी का आलम यह है कि गांव में कोई गंभीर हालत में बीमार या प्रसूता को चिकित्सा की जरुरत पड जाए तो उसे खाट (पलंग) पर लेकर ही गांव से करीब एक किलोमीटर दूर रोड तक लाना पडता है।
मनोहरथाना पंचायत समिति के तहत राजस्व गांव दो मजरों में बंटा हुआ है। दूसरा मजरा बरुबेह गूजरान है जो कि यहां से पांच किलोमीटर से अधिक दूर है। ग्राम पंचायत मुख्यालय शोरती से महज ढाई किलोमीटर दूर स्थित बरुबेह भीलान करीब 44 घरों की बस्ती हेै। यहां तक पंहुचने के लिए शोरती से पाडलिया जाने वाले रास्ते तक तो ठीक है लेकिन रोड छोड कर गांव जाने के लिए लोगों को पगडंडियों वाले रास्ते से होकर ही गुजरना पडता है। ये पगडंडियां भी खेतों के बीच होकर गुजरने से कीडे कांटों के साथ साथ चिकनी मिट्टी की फिसलन झेलनी की मजबूरी लोगों को उठानी पड रही है।भील जाति के लोगों की बस्ती के इस गांव तक चौडा रास्ता नहीं होने से कोई साधन वहां पर पंहुच पाता है। ऐसे में मरीजों को चारपाई के सहारे ही गांव से रोड तक लाना पडता है।
कई बार बता चुके परेशानी
गांव के घनश्याम भील,रोडलाल भील का कहना है कि पूर्व में गांव के लिए रास्ता बना हुआ था। लेकिन रास्ते की जमीन जिनके खाते की थी उन्होंने उस रास्ते को बंद कर दिया ऐसे में पिछले पांच सालों से गांव का रास्ता ही बंद हो गया। बरसात के दिनों में तो जान पर बन आती है। इसके लिए कई बार उच्चाधिकारियों को अवगत करा चुके हैं। जिले के एक कोने में पडे होने से सरकारी योजनाओं का लाभ भगवान भरोसे ही चल रहे है।
बच्चों के सामने भी चुनौती
रास्ते की समस्या गांव में आने जाने की है तो वहीं गांव के प्राथमिक विद्यालय में पढने वाले बच्चों के लिए भी यहां मुसीबतें कम नही है। करीब दो दशक पूर्व बना विद्यालय का जर्जर भवन इसका उदाहरण है। भवन में केवल दो कमरे व छोटा सा बरामदा है। जर्जर होने के कारण छत बरसात में टपकती है। जिस कारण स्कूल ही बंद करना पड जाता है। गांव से स्कूल पंहुचने के लिए बच्चों को भी पगडंडी वाले रास्ते से ही गुजरना पडता है। प्रधानाध्यापक रामसिंह भील ने बताया स्कूल में इस बार कुल 34 का नामांकन है। बच्चों के आने जाने के लिए रास्ता नही है। जिससे बच्चों को काफी परेशान होना पडता है। इस बारे में सरपंच रिंकु मीणा एवं सामाजिक कार्यकत्र्ता हेमराज मीणा ने बताया कि ग्रामीण बहुत परेशान हैं। इसके लिए पूर्व में भी प्रयास कर चुके है। जबकि उपखंड अधिकारी ने बताया कि उनके जानकारी में नही है फिर भी मामले को दिखवाया जाएगा।

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