नानवेज शौकीनों के लिए गुड न्यूज, मीट में मिलावट को ढूंढ़ कर निकालेगी आईवीआरआई की किट

आईवीआरआई (IVRI) की पशुधन उत्पादन प्रौद्योगिकी विभाग ने इस कीट का नाम 'खाद्य पशु प्रजाति पहचान किट' ( Food Animal Species Identification Kit) रखा है। किट को पेटेंट कराने की प्रकिया चल रही है।

By: Mahendra Pratap

Published: 16 Dec 2020, 06:12 PM IST

बरेली (उत्तर प्रदेश). मीट के शौकीनों के लिए एक बड़ी खबर। मीट में मिलावट से परेशान लोगों को आईवीआरआई ने तोहफा दिया। सामान्य अनुमति प्राप्त मीट जैसे बकरा, भेंड में अब आसानी से की गई मिलावट (adulterated) की पहचान हो सकेगी। बरेली के भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (Indian Veterinary Research Institute Bareilly) ने एक किट तैयार की है, जिससे मीट में बीफ और पोर्क की मिलावट का आसानी से पता लगाया जा सकेगा। आईवीआरआई की पशुधन उत्पादन प्रौद्योगिकी विभाग ने इस कीट का नाम 'खाद्य पशु प्रजाति पहचान किट' (फूड एनिमल स्पीसीज आइडेंटिफिकेशन किट) रखा है। किट को पेटेंट कराने की प्रकिया चल रही है।

भारत में मवेशियों की करीब 40 नस्लें पाई जाती हैं। बाजार में बिकने वाले मांस में कई बार बीफ मिलने की शिकायतें आती रहती हैं। पर इस जांच के लिए विदेशी किट तो है पर स्वदेशी किट अभी नहीं है। और बाजार में उपलब्ध किट सिर्फ यह बताती है कि इसमें मिलावट है। पर आईवीआरआई की नई किट यह बता सकेगी कि इसमें किसका और कितना मीट मिला हुआ है। सामान्य अनुमति प्राप्त मांस बकरा, भेंड आदि को माना जाता है।

कितना और किनकी मिलावट को बताएगी :- आईवीआरआई के पूर्व निदेशक डॉ. आर. के. सिंह ने बताया कि अभी तक ऐसी कोई किट नहीं थी जो एक साथ कई पशुओं के मांस की जांच कर सके। आईवीआरआई की ईजाद किट बता सकेगी कि नमूने में कितना और कौन-कौन से पशुओं का मांस मिलाया गया है।

कीट बताएगी मिलावट :- खाद्य पशु प्रजाति पहचान किट के बारे में जानकारी देते हुए आईवीआरआई के पशुधन उत्पादन विभाग के वैज्ञानिक डॉ राजीव रंजन कुमार (Rajiv Ranjan Kumar) ने बताया कि डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड (डीएनए) की मदद से इस किट से सामान्य अनुमति प्राप्त मांस में बीफ (buffalo meat-beef ) और पोर्क (pork) की मिलावट का पता लगाया जा सकेगा।

आईसीएआर की शाखाओं में हुआ परीक्षण :- वैज्ञानिक डॉ राजीव रंजन कुमार ने बताया, संस्थान को करीब साढ़े तीन साल पहले यह परियोजना मिली थी। मुख्य अन्वेषक के रूप में उनके साथ विभाग की पूरी टीम ने इस तकनीक को तैयार करने में सहयोग किया। इस तकनीक का परीक्षण हैदराबाद सहित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) की अन्य शाखाओं में किया गया है।

किट पेटेंट कराने की तैयारी :- वैज्ञानिकों के मुताबिक किट की खास बात यह है कि 25 मिलीग्राम मांस के नमूने से डीएनए के जरिए आसानी से यह पता चल सकेगा कि मांस किस प्रजाति के पशु का है। इस किट को पेटेंट कराने की प्रकिया चल रही है।

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