बुद्ध पूर्णिमा पर इस बार बन रहा है ख़ास योग, पीपल,शनि और शिव पूजन से होगा विशेष लाभ,जाने पूजा का शुभ मुहूर्त

बुद्ध पूर्णिमा पर इस बार बन रहा है ख़ास योग, पीपल,शनि और शिव पूजन से होगा विशेष लाभ,जाने पूजा का शुभ मुहूर्त

jitendra verma | Publish: May, 17 2019 07:14:14 PM (IST) | Updated: May, 17 2019 07:14:15 PM (IST) Bareilly, Bareilly, Uttar Pradesh, India

इस पूर्णिमा से स्वाति नक्षत्र तथा छत्र योग में पीपल, हनुमान, शनिदेव, शिव भगवान की पूजा मंत्र जाप का आरम्भ विशेष कामनाओं की पूर्ति करने वाला होगा।

बरेली। वैशाख मास की पूर्णिमा को ही भगवान विष्णु का 23वां अवतार भगवान बुद्ध के रूप में हुआ था। इसलिए इसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं। वैशाखी पूर्णिमा बड़ी ही पवित्र तिथि मानी गई है। यह “सत्य विनायक पूर्णिमा“ भी मानी जाती है। भगवान श्री कृष्ण के बचपन के सहपाठी दरिद्र ब्राह्मण सुदामा जब द्वारिका उनके पास मिलने पहुंचे, तब श्री कृष्ण ने उन्हें सत्य विनायक व्रत का विधान बताया। इसी व्रत के प्रभाव से सुदामा की सारी दरिद्रता जाती रही।

इस बार बन रहे हैं ख़ास योग

बालाजी ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित राजीव शर्मा ने बताया कि इस बार यह वैशाख पूर्णिमा 18 मई शनिवार को विशाखा नक्षत्र के शुभ योग में मनायी जायेगी। शनिवार को विशाखा नक्षत्र की तुला राशि में शुभ योग का निर्माण होता है, वैशाख माह के शनिवार को पूर्णिमा का संयोग होने के कारण तथा इस परिधावी सम्वतसर 2076 का राजा भी शनि होने के कारण अनिष्ट योगों के निवारण के लिए श्री महामृत्युंजय मंत्र के जाप, रूद्राष्टाध्यायी का पाठ, शिव लिंगार्चन, अभिषेक, स्तोत्र पाठ, पूजा आदि से देवाधिदेव शिव की कृपा प्राप्त की जा सकती है। महर्षि मार्कण्डेय ने इसी शुभ योग पर अल्पायु के अशुभ योग से मुक्ति के लिए शिव की पूजा उपासना की थी। इस शुभ योग में पवित्र नदी में स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन कुश के आसन पर बैठ कर उत्तर-पूर्व की दिशा की ओर मुख कर शिव के मंत्र का जाप, पारद शिवलिंग की पूजा-अर्चना विशेष फलदायक होती है। शिव मंदिर में जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

ऐसे करें पूजन

आर्थिक कष्ट, धनाभाव को दूर करने के लिए पीपल के नीचे भगवान शिव की मूर्ति स्थापित करके चन्दन, पुष्प, अक्षत, जल चढ़ा कर “ऊँ नमः शिवायः“ मंत्र का यथा संभव जाप करें। शनि की अशुभ दृष्टि दूर करने के लिए इस पूर्णिमा से पीपल पर नियमित जल चढ़ायें, प्रत्येक शनिवार पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके वृक्ष के नीचे दीपक जलायें, शनि की पूजा कर कष्ट निवारण की प्रार्थना करें। मंगल द्वारा होने वाले कष्ट निवारण के लिए पीपल के नीचे हनुमान जी के मंत्रों का जाप करें। इस वैशाखी पूर्णिमा से आरम्भ कर प्रति मंगलवार “ऊँ ह्रीं हनुमते श्री राम दूताय नमः“ का यथा सम्भव जाप करें। इस दिन अलग-अलग पुण्य कर्म करने से अलग-अलग फलों की प्राप्ति होती है। धर्मराज के निमित्त जलपूर्ण कलश और पकवान दान करने से गोदान के समान फल प्राप्त होता है। पांच या सात ब्राह्मणों को मीठे तिल दान करने से सब पापों का क्षय हो जाता है। यदि तिलों के जल से स्नान करके घी, चीनी और तिलों से भरा पात्र भगवान विष्णु को निवेदन करें और उन्हीं से अग्नि में आहुति दें अथवा तिल और शहद का दान करें, तिल के तेल का दीपक जलायें, जल और तिलों का तर्पण करें अथवा गंगा आदि में स्नान करें, तो व्यक्ति सब पापों से निवृत्त हो जाता है। यदि इस दिन एक समय भोजन करके पूर्णिमा, चन्द्रमा अथवा सत्य नारायण का व्रत करें तो सब प्रकार के सुख, सम्पदा और श्रेय की प्राप्ति होती है। इस पूर्णिमा से स्वाति नक्षत्र तथा छत्र योग में पीपल, हनुमान, शनिदेव, शिव भगवान की पूजा मंत्र जाप का आरम्भ विशेष कामनाओं की पूर्ति करने वाला होगा।

पूजा का विशेष समय
प्रातः 06ः00 बजे से 07ः00 बजे अमृत चैघड़िया में
प्रातः 09ः00 बजे से 10ः00 बजे शुभ के चैघड़िया में
अपरान्ह 01ः30 बजे से सांय 06ः00 बजे तक चर, लाभ, अमृत के चैघड़िया में।

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