नए मेयर के सामने होंगी ये चुनौतियां

केंद्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के कारण नवनिर्वाचित मेयर डॉ. उमेश गौतम के सामने होंगी तमाम चुनौतियां।

By: suchita mishra

Published: 11 Dec 2017, 12:57 PM IST

बरेली। भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित मेयर डॉ. उमेश गौतम 12 दिसम्बर को मेयर पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह के बाद जल्द ही बोर्ड की पहली बैठक आयोजित की जाएगी। नए मेयर के सामने शहर में तमाम चुनौतियां हैं, जिन्हें दूर करना है। हालांकि उन्हें विरासत में एक अरब से ज्यादा रुपये मिल रहे हैं, साथ ही केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है। इसलिए उनके सामने रुपयों की कमी की कोई चिंता नही होगी। लेकिन फिर उनके सामने चुनौतियां भी भरपूर हैं।

स्पष्ट बहुमत नहीं
सबसे पहली समस्या भाजपा की यह है कि उसके पास बोर्ड में बहुमत नहीं है। नगर निगम के चुनाव में 80 में से 37 पार्षद भारतीय जनता पार्टी के जीते हैं, जबकि बहुमत के लिए भाजपा को 41 पार्षदों की जरूरत है। इसलिए किसी भी प्रस्ताव को पास कराने के लिए भाजपा को निर्दलीय पार्षदों के सहारे रहना पड़ेगा। हालांकि भाजपा को पूरा भरोसा है कि वो सदन में अपना बहुमत पूरा कर लेगी।

कूड़ा निस्तारण की समस्या
कूड़ा निस्तारण इस चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा रहा है क्योंकि कूड़ा निस्तारण के लिए सपा सरकार में शुरू हुआ सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट भाजपा के मेयर उमेश गौतम की यूनिवर्सिटी के बगल में था। प्लांट का मामला एनजीटी गया, जहां से प्लांट को चलाने पर रोक लगा दी गई थी। पूरे चुनाव में प्लांट को न चलने की जिम्मेदारी सपा और भाजपा एक दूसरे पर डालते रहे हैं। चुनाव में उमेश गौतम ने वायदा किया था कि वो एक साल के अंदर प्लांट को चलवा देंगे और इसके लिए जमीन भी खरीद ली गई है।

टैक्स की विसंगतियां
नगर निगम के टैक्स को भाजपा के मेयर उमेश गौतम ने बड़ा मुद्दा बनाया था और उन्होंने वायदा किया था कि उनके मेयर बनने के बाद बोर्ड की पहली बैठक में ही टैक्स की विसंगतियां दूर की जाएंगी जिससे कि जनता को बड़ी राहत मिलेगी। अब ये देखना होगा कि पूर्व मेयर टैक्स की विसंगतियों को दूर करने में असमर्थता जता चुके हैं तो भाजपा के मेयर इसे दूर करने के लिए क्या उपाय निकालते हैं।

अतिक्रमण की समस्या
शहर की अधिकांश सड़कें अतिक्रमण से पटी पड़ी हैं, इसके साथ ही सड़क किनारे रेता बजरी का कारोबार भी बड़ी तादाद में किया जाता है। अतिक्रमण की वजह से जाम की समस्या से लोगों को रोजाना दो चार होना पड़ता है, लेकिन नेता वोट बैंक कटने के डर से इन पर कार्रवाई का साहस नही दिखा पाते।

अवैध डेयरी
शहर के विभिन्न हिस्सों में करीब 500 अवैध डेयरियां है जिसमे हजारों पशु है। इन डेयरियों में पलने वाले जानवर सड़क पर गंदगी फैलाते हैं और इन डेयरियों से निकलने वाले गोबर को डेयरी मालिक नालियों में बहा देते हैं। इससे नाले चौक हो जाते है और जलभराव की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इन डेयरियों को शहर से बाहर करने के लिए प्लान तो बना लेकिन इस पर काम नहीं शुरू हो पाया है। डेयरी को शहर से हटाने में भी नेताओं को वोट बैंक का डर सताने लगता है।

जलभराव की समस्या
बरेली में जलभराव एक बहुत बड़ी समस्या है क्योंकि बरसात के दिनों में पुराना शहर, सुभाषनगर जैसे इलाके टापू बन जाते हैं और कई कई दिन तक यहां पानी भरा रहता है। इस समस्या को दूर करने के लिए नालों से अतिक्रमण हटाने के साथ ही नाले बनाने की जरूरत है, जो कि अब पूरा होने की उम्मीद है क्योंकि केंद्र और प्रदेश में भाजपा सरकार है। ऐसे में नए निर्माण के लिए धन की कोई कमी नही होगी।


मेयर के लिए राहत की बात
नए मेयर के लिए सबसे बड़ी राहत की बात है कि नगर निगम के खजाने में विभिन्न मदों में एक अरब से ज्यादा रुपये पड़े हुए हैं, साथ ही अगर टैक्स वसूली हो जाए तो 25 करोड़ रुपये और निगम के खाते में आ जाएंगे।इसके साथ ही विभिन्न योजनाओं के तहत अभी निगम को 100 करोड़ से ज्यादा रुपया मिलना बाकी है। इसलिए ये नए मेयर के लिए राहत की बात है कि इस समय नगर निगम का खजाना फुल है और उन्हें धन की कमी से नही जूझना होगा।

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