Independence day : क्रांतिकारियों का गढ़ थी नौमहला मस्जिद,अंग्रेजों के खिलाफ तैयार हुई थी रणनीति

Independence day : क्रांतिकारियों का गढ़ थी नौमहला मस्जिद,अंग्रेजों के खिलाफ तैयार हुई थी रणनीति

jitendra verma | Updated: 15 Aug 2019, 11:56:55 AM (IST) Bareilly, Bareilly, Uttar Pradesh, India

1857 की क्रान्ति के दौरान ये मस्जिद क्रांतिकारियों का गढ़ थी और यहाँ पर ही क्रांतिकारी एकत्र होकर अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति बनाते थे।

बरेली। 15 अगस्त 1947 को हमारा देश आजाद हुआ था। आज के दिन हम देश को आजाद कराने में शहीद हुए तमाम क्रांतिकारियों को याद करते हैं। 1857 की क्रान्ति को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ पहला स्वतन्त्रता संग्राम आंदोलन माना जाता है। इस क्रान्ति में रुहेलखंड का भी अहम योगदान रहा है। 1857 की क्रान्ति में रुहेला सरदार नवाब खान बहादुर खान की सेना ने अंग्रेजों को घुटने टेकने को मजबूर कर दिया था। बरेली में इस क्रान्ति की तमाम निशानियां आज भी मौजूद हैं जिनमे से एक है सिविल लाइंस की नौमहला मस्जिद। 1857 की क्रान्ति के दौरान ये मस्जिद क्रांतिकारियों का गढ़ थी और यहाँ पर ही क्रांतिकारी एकत्र होकर अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति बनाते थे।

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मस्जिद का अहम योगदान

इस मस्जिद का निर्माण 1749 में सैयद शाजी बाबा ने कराया था जिसका पक्का निर्माण 1906 में हुआ। 1857 की क्रान्ति में इस मस्जिद में रुहेलखण्ड के क्रांतिकारी अकसर एकत्र होते थे और अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति तैयार करते थे।इन योजनाओं को बनाने में प्रमुख रूप से नवाब खान बहादुर खां, दीवान शोभाराम और बरेली कॉलेज के शिक्षक मौलवी महमूद अहसन, फारसी शिक्षक कुतुबशाह और कॉलेज के कई राष्ट्रवादी छात्र सम्मिलित होते थे। नवाब खान बहादुर खां व सूबेदार बख्त खां के मध्य कई मीटिंगों के बाद तय हो पाया कि अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांति की जानी है।

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मस्जिद में हुई तकरीर से पड़ा बड़ा असर

बताया जाता है कि 22 मई 1857 को जुम्मे के दिन शिक्षक मौलवी महमूद अहसन ने मस्जिद में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ तकरीर की जिसका यहाँ की जनता पर गहरा प्रभाव पड़ा और अंग्रेजों के खिलाफ क्रान्ति की शुरुआत हुई और खान बहादुर खान की सेना ने अंग्रेजों को परास्त कर दिया। अंग्रेज रुहेला सरदारों से हार कर नैनीताल भाग गए थे।

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शहीदों की कब्र है मस्जिद में

मस्जिद की देख रेख करने वाले बताते हैं कि नौमहला मस्जिद क्रांतिकारियों का प्रमुख गढ़ था और यहाँ पर अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति बनाई जाती थी इसकी जानकारी जब अंग्रेजी हुकूमत को हुई तो उन्होंने मस्जिद पर हमला कर दिया और यहाँ पर इस्माइल शाह को अजान देते समय शहीद कर दिया गया इसके साथ ही अंग्रेजों से अपनी अस्मत बचाने के तमाम महिलाओं ने कुए में कूद कर जान दे दी।उन्होंने बताया कि तमाम क्रांतिकारियों को यहाँ दफनाया गया है।

 

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