सावन के सोमवार को ऐसे मिलेगा ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक का फल

सावन के सोमवार को ऐसे मिलेगा ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक का फल

Bhanu Pratap | Publish: Aug, 12 2018 10:53:32 AM (IST) Bareilly, Uttar Pradesh, India

पूरे भारत में 12 ज्योर्तिलिंग हैं, वहां साक्षात भगवान शंकर का वास है। एक माह में सभी ज्योर्तिलिंग के दर्शन के लिए नहीं जाया जा सकता है।

बरेली। सावन का पवित्र माह चल रहा है और इन दिनों भगवान शिव के भक्त भोले की भक्ति में डूबे हुए है। सावन माह में सोमवार का बड़ा महत्त्व है। सावन के सोमवार पर बड़ी तादात में श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक करते है। बहुत से लोगों की इच्छा होती है कि वो ज्योतिर्लिंग जा कर वहां जलाभिषेक करें लेकिन ऐसा सम्भव नहीं हो पाता है। बालाजी ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित राजीव शर्मा के अनुसार अगर श्रावण मास में सोमवार को 12 बिल्व पत्र पर सफेद चंदन से प्रत्येक ज्योतिर्लिंग का नाम लिखकर, प्रत्येक ज्योतिर्लिंग के मंत्र उच्चारण के साथ किसी भी शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं तो वही फल प्राप्त होगा जो ज्योतिर्लिंग पर जल अर्पित करने से मिलता है।

इन मंत्रों का करें उच्चारण
1. श्री सोम नाथ ज्योतिर्लिंग का मंत्र निम्न हैः-
ऊँ सोमनाथाय ज्योर्तिर्लिंगाय नमः

2. श्री घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग का मंत्र हैः-
ऊँ घुश्मेश्वराय ज्योतिर्लिंगाय नमः

3. श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का मंत्रः-
ऊँ मल्लिकार्जुनाय ज्योतिर्लिंगाय नमः

4. श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग का मंत्रः-
ऊँ केदाराय ज्योतिर्लिंगाय नमः

5. श्री त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का मंत्रः-
ऊँ त्र्यंबकेश्वराय ज्योतिर्लिंगा य नमः

6. श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का मंत्रः-
ऊँ महाकालाय ज्योतिर्लिंगाय नमः

7. श्री ओंकारनाथ ज्योतिर्लिंग का मंत्रः-
ऊँ आंकारेश्वराय ज्योतिर्लिगाय नमः

8. श्री बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का मंत्रः-
ऊँ बैद्यनाथाय ज्योतिर्लिंगाय नमः

9. श्री भीमशंकर ज्योतिर्लिंग का मंत्रः-
ऊँ भीमशंकराय ज्योतिर्लिंगाय नमः

10. श्री रामेश्वर ज्योतिर्लिंग का मंत्रः-
ऊँ रामेश्वराय ज्योतिर्लिंगाय नमः

11. श्री विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का मंत्रः-
ऊँ विश्वनाथाय ज्योतिर्लिंगाय नमः

12. श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का मंत्रः-
ऊँ नागेश्वराय ज्योतिर्लिंगाय नमः

सावन के सोमवार का कैसे करें व्रत

श्रावण मास के सोमवारों में शिव जी के व्रतों एवं पूजा का विशेष विधान एवं महत्व है। शिव जी के यह व्रत शुभ फलदायी होते हैं। इस व्रत में भगवान शिव का पूजन करके एक समय ही भोजन किया जाता है। इस व्रत एवं पूजन में शिव एवं माता पार्वती का ध्यान कर शिव का पंचाक्षर मंत्र का जाप करते हुये पूजन करना चाहिए। सावन के प्रत्येक सोमवार को श्री गणेश जी, शिव जी, पार्वती जी तथा नंदी की पूजा करने का विधान है। शिव जी की पूजा में जल, दूध, दही, चीनी, घी, शहद, पंचामृत, कलावा, वस्त्र, यज्ञोपवि, चन्दन, रोली, चावल, फूल, बिल्ब पत्र, दूर्वा, आक, धतूरा, कमलकट्टा, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, पंचमेवा, धूप, दीप, दक्षिणा सहित पूजा करने का विधान है। साथ ही कपूर से आरती करके भजन कीर्तन और रात्रि जागरण भी करना चाहिए। पूजन के पश्चात् रूद्राभिषेक कराना चाहिए। ऐसा करने से भोले भगवान शिव शीघ्र ही प्रसन्न होकर सभी मनोकामनायें पूर्ण करते हैं। सोमवार का व्रत करने से पुत्र, धन, विद्या आदि मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

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