सेतराऊ में प्रधानाचार्य सहित 13 पद खाली ,कैसे हो चार सौ बच्चों का शिक्षण कार्य....

_शिक्षण कार्य के अभाव में पिछड़ रही ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाएं..

 

By: Dilip dave

Published: 11 Oct 2021, 10:37 PM IST



रामसर उपखंड मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सेतराऊ में 13 अध्यापकों के पद खाली होने से 460 से ज्यादा विद्यार्थियों को अध्ययन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है । यहां पर स्वीकृत 20 पदों में से मात्र 7 अध्यापक की कार्यरत है ।ऐसे में विद्यालय प्रशासन को करीब साढ़े चार सौ से ज्यादा बालकों को अध्ययन करवाने में दिक्कत हो रही है ।

यहां गणित, विज्ञान अंग्रेजी जैसे विषयों के व्याख्याताओं की कमी है । वर्तमान में यहां एक मात्र व्याख्याता ही कार्यरत है।यहां 2 व्याख्याता,चार वरिष्ठ अध्यापक सहित कंप्यूटर कार्मिक के पद रिक्त है ।ऐसे में विद्यार्थियों को अध्ययन संबंधी परेशानियां झेलनी पड़ रही है 12 कक्षाओं को मात्र सात कार्मिक ही संभाल रहे हैं। अध्यापकों के अभाव में यहां 5 कक्षाएं रिक्त चल रही है। अन्य विषयों का अध्ययन करवाने एवं गृह कार्य देने की समस्या हो रही है ।

विद्यालय में पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। यहां एकमात्र आटा का बना हुआ है जो जर्जर हालात में है।उसकी साफ-सफाई भी नहीं होती है ।विद्यार्थियों को मजबूरन बरसाती पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।


प्रधानाचार्य के अभाव में यहां अध्यापकों एवं बालकों की सार संभाल करने वाला भी कोई नहीं है। ऐसे में यहां अध्ययन कार्य व्यवस्थित नहीं हो रहा है । अभिभावकों को भी संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है ।ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों को लेकर बहुत चिंतित नजर आ रहे हैं ।वर्तमान में यहां पर एक व्याख्याता, दो वरिष्ठ अध्यापक और चार अन्य कार्मिक कार्यरत हैं।

"यहां पर पानी की भी प्राप्त सुविधा नहीं है । टांका जर्जर हालत में पड़ा है ।उसमें साफ सफाई भी नहीं हो रही है।विद्यालय में पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से विद्यार्थियों को गंदा पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है । यहां एक हैंडपंप भी बनवाया गया है जो अभी शुरू नहीं हुआ है ।"
-मोटाराम सियोल

"सेतराऊ विद्यालय में एक दर्जन से ज्यादा अध्यापकों के पद रिक्त होने से बालकों को अध्ययन सुचारु नहीं रहा है ।ऐसे में बालक विद्यालय के गोते लगाकर समय एवं भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। -सताराम ग्रामीण सेतराऊ

सरकारी विद्यालय में करीब साढ़े चार सौ बालकों का प्रतिदिन आना जाना होता है। लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए 5 अध्यापक ही अध्यापन कार्य कर पाते है ।ऐसे में बालकों को परेशानी हो रही है।जहां सरकार को अध्यापकों की व्यवस्था करनी चाहिए।
- पप्पू राम सारण


"वर्तमान में प्रतिस्पर्धा का युग है। ऐसे में यहां पर बालकों को समय पर अध्ययन नहीं करवाया जा रहा है। जिससे बालक आने वाले प्रतिस्पर्धा के युग में पिछड़ रहे हैं ।उन्हें कंप्यूटर, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों का मार्गदर्शन नहीं मिल रहा है। ऐसे में ग्रामीण प्रतिभा पिछड़ रही है।"
_उदाराम समाज सेवी

Dilip dave Desk
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