जसोल हादसा : नाना जिसे तलाश रहा था टेंट में, व्हाट्सएप पर उसकी मृत तस्वीर देखी

जसोल हादसा : नाना जिसे तलाश रहा था टेंट में, व्हाट्सएप पर उसकी मृत तस्वीर देखी
Accident during narrative organized in Jasol

Moola Ram Choudhary | Updated: 28 Jun 2019, 08:26:51 PM (IST) Barmer, Barmer, Rajasthan, India

जसोल (jasol) दुखांतिका कई घरों को जिंदगी भर का गम दे गई। कई लोगों की हालात ये गई कि अब क्या करेंगे। किसी के सिर से पिता का साया चला गया तो कहीं पर दोहिते का गम नाना को पूरे जीवन सालता रहेगा।

बालोतरा. जसोल (jasol) दुखांतिका कई घरों को जिंदगी भर का गम दे गई। कई लोगों की हालात ये गई कि अब क्या करेंगे। किसी के सिर से पिता का साया चला गया तो कहीं पर दोहिते का गम नाना को पूरे जीवन सालता रहेगा। जसोल निवासी दो परिवारों पर मानों हादसा कहर बनकर बरसा है। हर किसी को अपनी पीड़ा बताते हुए परिजनों के जुबान लडख़डा़ जाती है। परिजनों का कहना है कि ना जाने कैसे अब जी पाएंगे...?

नाना बदहवाश दोहिते को खोज रहा था, किसी ने व्हाट्सएप (Whatsapp) पर दिखाया कि यह तो नहीं रहा...

जसोल के नरसिंग मेघवाल कथा सुनने गए थे। नाना के कथा में जाने के बाद दोहिता जितेन्द्र भी चला गया था। हादसा होने के बाद नरसिंगराम घर पर लौटे और पूछा जीतू कहां है? घरवालों ने कहा वो तो कथा में है। बदहवाश नाना उल्टे पांव दौड़ पड़ा। वह टेंट (pandal collapse) में हर किसी परीचित को पूछ रहे थे जीतू को देखा..जीतू को देखा.. तभी एक गांव के युवक ने उन्हें व्हाट्सअप पर मृतकों की तस्वीर दिखाई। दोहिते की मौत का सुनते ही नाना दहाड़े मारकर रो पड़ा। मुश्किल से संभालकर घर लाया।

इकलौती बेटी, जीतू मेरा बेटा था...

नरसिंग मेघवाल के एकमात्र पुत्री मोहनी है। पुत्री पारलू गांव में रहती है। बूढ़े नाना-नानी दोहिते को अपने पास ले आए थे। जितेन्द्र को बचपन से ही नाना-नानी ने ही पाला था। जितेन्द्र को दोहिते की बजाय बेटे की तरह पाल रहे थे। नाना कथा सुनने गए थे यह सुनकर ही जितेन्द्र भी उनके पीछे-पीछे गया था। नरसिंगराम को यह गम उम्रभर सालेगा।
हर किसी की आंख में आंसू- जितेन्द्र नाना का ही नहीं मौहल्ले का दुलारा था, परिवार के सदस्य, पड़ौस के लोग, जब भी उसे किसी काम का कहते, तब वह मना नहीं करता वह इसे खुशी खुशी करता। उसके निधन पर परिवार जहां कोहराम मचा है, वहीं पड़ौसियों के आंसू थम नहीं रहे हैं। जितेन्द्र की अर्थी उठी तो उसके साथ खेलने वाले बच्चे भी फफक-फफक कर रो पड़े।

पता नहीं था,वो कथा यों समाप्त कर देंगे...

पेमाराम प्रजापत और उनका बेटा पारस रविवार को एक साथ निकले थे। पारस परिवार सहित जोधपुर गया और प्रेमाराम कथा सुनने। पारस अभी जोधपुर पहुंचा ही नहीं था कि उसको समाचार हुआ कि लौट आओ..। पारस पिता को घर से रामकथा (Shri ram katha) की ओर जाते हुए देखता गया था लौटा तो वे अपने जीवन की कथा समाप्त कर चुके थे। दीहाड़ी मजदूर पारस कहता है वो अब कभी नहीं आएंगे..?

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