युवाओं के पलायन को रोकने की महत्ती योजना आर्या

- केवीके गुड़ामालानी में नर्सरी प्रबंधन प्रशिक्षण का आयोजन

By: Dilip dave

Published: 18 Dec 2020, 07:32 PM IST

बाड़मेर. जिले में पिछले एक दशक से बागवानी का क्षेत्रफल बढ़ता जा रहा है। बागवानी में अच्छे उत्पादन के लिए पौध सामग्री नितान्त आवश्यक है लेकिन वर्तमान में पौध सामग्री अन्य जिलों एवं राज्यों से आयात करनी पड़ रही है। यह बात गुड़ामालानी में नर्सरी प्रबंधन पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में केवीके गुड़ामालानी के प्रभारी डॉ. प्रदीप पगारिया ने कही।

उन्होंने कहा कि जिले में अनार के 50 लाख, खजूर 22 हजार, अंजीर 1 लाख, बेर 1.25 लाख पौधे लगे हुए हैं लेकिन अच्छी पौधशाला का अभी भी अभाव है। इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र गुडामालानी आर्या प्रोजेक्ट के अंतर्गत नर्सरी प्रबंधन प्रशिक्षण लिया है जिसमें स्थानीय मांग की आपूर्ति करने के साथ-साथ ही स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार से जोड़ सके।

भारत सरकार ने एक जिला एक उत्पाद के अंतर्गत भी अनार को बाड़मेर जिले के लिए चयन किया है जिसमें भी इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की प्रभावी भूमिका रहेगी।

निदेशक, प्रसार शिक्षा निदेशालय, कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर डॉ. ईश्वरसिंह ने वर्चुअल रूप से भाग लेते हुए कहा कि नई चुनौतियों एवं संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली की ओर से आर्या नामक एक महत्वपूर्ण परियोजना युवाओं के लिए प्रारंभ की गई है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों के 35 वर्ष से कम आयु के युवाओं को कृषि की ओर आकर्षित करने और उन्हें कृषि में आकर्षक अवसर प्रदान करने लिए विशेष कदम उठाए गए हैं जिससे कि आजीविका के लिए शहरों की ओर युवाओं के बढ़ते पलायन को रोका जा सके।

कार्यक्रम अध्यक्ष प्रधान वैज्ञानिक एवं नोडल अधिकारी आर्या अटारी जोन-2 जोधपुर डॉ. एम.एस. मीणा ने कहा कि भारत में आर्या परियोजना को कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से सत्र 2016-17 में 25 राज्यों के 25 जिलों में लागू किया गया तथा वर्तमान में राजस्थान में 10 जिलों में चल रहा है। इस योजना के तहत प्रत्येक राज्य के चुने हुए एक जिले से 200 ग्रामीण युवाओं को कुशल बनाकर लघु उद्योगों जैसे मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, बीज प्रसंस्करण, मृदा परीक्षण, मुर्गीपालन, डेयरी, बकरीपालन, वर्मीकम्पोस्ट आदि इकाइयों की स्थापना के लिए तकनीक व सहायता प्रदान करना है।

आर्या परियोजना प्रभारी डॉ. हरिदयाल चौधरी ने बताया कि कार्यक्रम का मूल उद्देश्य ग्रामीण युवाओं के लिए आर्थिक मॉडल स्थापित करना है, जिससे वे कृषि की ओर आकर्षित हो। वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष केवीके नागौर डॉ. गोपीचंद ने बताया कि ग्रामीण युवाओं में इस तरह के कौशल विकास से उनका आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष कृषि विज्ञान केन्द्र मोलासर (नागौर) डॉ. अर्जुन सिंह जाट ने कहा कि इस परियोजना से युवाओं को उद्यम स्थापित करने में उचित सहायता मिलेगी। कृषि विज्ञान केन्द्र सिरोही से डॉ. कामिनी पारासर, केवीके मोलासर से डॉ. अनोपकुमारी ने भी विचार व्यक्त किए।

Dilip dave Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned