सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद से प्रदेश में रुका था अवैध बजरी खनन, राज्य सरकार भी हुई सख्त

सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद से प्रदेश में रुका था अवैध बजरी खनन, राज्य सरकार भी हुई सख्त

Vijay ram | Publish: Aug, 12 2018 11:13:08 AM (IST) | Updated: Aug, 13 2018 04:26:06 PM (IST) Barmer, Rajasthan, India

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सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद से प्रदेश में रुका था अवैध बजरी खनन, राज्य सरकार भी हुई सख्त

जयपुर/बाडमेर.
बजरी खनन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद प्रदेश भर में बजरी का भंयकर संकट पैदा हो गया है, दूसरी तरफ बजरी का अवैध कारोबार पैर पसारने लगा है। इस पर प्रदेश में बजरी खनन पर रोक मामले में राज्य सरकार ने मई में सुप्रीम कोर्ट में माना भी था कि बजरी का अवैध खनन हो रहा है; इसे रोकने के लिए अब वह सख्त है।

 

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, राजस्थान में बजरी खनन से अभी रोक नहीं हटेगी; बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और MOEF को नोटिस जारी किया था। राजस्थान में बजरी खनन को लेकर न तो राज्य सरकार को अभी भी राहत नहीं मिली है, न ही खनन से जुडे लोगों को। कारण साफ है कि सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में बजरी खनन पर रोक हटाने से इनकार कर रखा है। साथ ही कोर्ट ने एमओईएफ और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। बजरी खनन के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई हैं। एनजीओ दस्तक की ओर से कोर्ट में बजरी को लेकर एप्लीकेशन लगाई गई। एनजीओ की ओर से डाॅ सुरेंद्र सिंह ने कोर्ट में पैरवी की। सुरेंद्र सिंह ने खेती की जमीन पर कुछ समय के लिए बजरी खनन की अनुमति देने के सरकार के फैसले पर रोक लगाने की अपील की।

 

बार—बार रोक की उठी मांगें
बालोतरा. शहर में भारतीय किसान संघ तहसील पचपदरा की बैठक अध्यक्ष चेलाराम एवं जिला कोषाध्यक्ष अखाराम चौधरी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में पदाधिकारियों ने विभिन्न समस्याओं पर चर्चा करते हुए लूणी नदी में बजरी के अवैध खनन रुकवाने फैक्ट्रियों से निस्तारित रासायनिक पानी को लूणी नदी में नहीं बहाने व पचपदरा रिफाइनरी क्षेत्र में रेत का अवैध खनन रुकवाने की मांग का ज्ञापन तैयार कर भिजवाया।

 

किरोडी ने लगाया था ये आरोप
सूबे के एक बडे नेता किरोड़ी लाल के अनुसार, सूबे में बजरी खनन में 10 हजार करोड़ का घोटाला हो चुका है। अवैध बजरी खनन सहित अपनी 41 सूत्री मांगों को लेकर वे कई बार राज्य सरकार पर आरोप लगाए थे, हालांकि बाद में भाजपा से उन्हें राज्यसभा भेज दिया गया।

 

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