उपेक्षित पड़े बालेरा बांध को उम्मीदों के पंख, 15 साल बाद सुधरेगा बांध

- 15 साल बाद होगा बालेरा बांध का निर्माण, डीएमएफटी योजना के तहत मिली प्रशासनिक स्वीकृति, 1 करोड़ 94 लाख रुपए करेगा विभाग खर्च

By: भवानी सिंह

Published: 07 Sep 2021, 06:21 PM IST

बाड़मेर
पन्द्रह साल से उपेक्षित पड़े बालेरा बांध की अब जल्द सेहत सुधरेगी। सिंचाई विभाग एक करोड़ 94 लाख रुपए की लागत से बांध का निर्माण कर कृषकों को राहत प्रदान करेगी। इसके लिए विभाग ने पूरी तैयारी शुरू कर दी गई है। दरअसल, यह बालेरा का बांध 80 के दशक में इंदरा गांधी के समय निर्माण करवाया गया था। उसके बाद राजीव गांधी भी यहां आकर गए थे। वर्ष-1982 के बाद विभाग ने करोड़ो रुपए खर्च करने के बाद सुध नहीं ली गई, ऐसे में यह बांध उपेक्षित हो गया।


सिंचाई विभाग ने बालेरा बांध के पुर्ननिर्माण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य करने के लिए वर्ष- 2016 में प्रयास शुरू किए गए। उसके बाद पूर्वनिर्मित बांध एवं भू-गर्भ जल स्तर बढ़ोतरी एवं स्टेट वाटर पॉलिसी में पेयजल की प्रथम प्राथमिकता के मध्यनजर ग्राउण्ड वाटर एक्विफर्स में जल उपलब्धता सुनिश्चित होने व सिंचाई के लिए लिफ्ट इरिगेशन से कृषक लाभांवित होने के उद्देश्य से प्रस्ताव लिए। उसके बाद जिला प्रशासन के प्रयासों से डीएमएफटी योजना के तहत बजट स्वीकृत किया गया। बाढ़ जीर्णोद्वार के लिए 1 करोड़ 94 लाख रुपए की स्वीकृति जारी की गई है। अब जल्द बांध का निर्माण कार्य शुरू होगा।


बांध की लम्बाई 1400 मीटर
सिंचाई विभाग ने वर्ष- 2016 में बालेरा बांध की सुध लेनी शुरू की गई। उस दौरान 36 वर्ष पुरानी फाइल ढूंढ निकाली। सिंचाई विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार बांध की लम्बाई करीब 1500 मीटर है। जिसमें अंतिम छोर पर वर्ष 1982 में 200 मीटर तक पक्का मिर्नाण करवाया गया था। उसके बाद जब वर्ष 2006 में बाढ़ के दौरान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था।

वर्ष- 2006 के बाद 15 वर्ष से उपेक्षित पड़े बालेरा बांध की उम्मीदों को पंख लगने के बाद बालेरा के ग्रामीणों के चेहरे खुशी से खिले हुए हैं। टूटा हुआ बांध बनने के बाद यहां पर भूमिगत जल स्तर पुरानी स्थिति में आ जाएगा, जिससे जो कृषि कुएं व जलदाय विभाग के ओपनवेल सूखे हुए हैं, वे फिर पानी से भर जाएंगे और इस क्षेत्र में सिंचित कृषि होने लगेगी।


दस हजार ग्रामीणों को मिलेगा पानी
बांध का जीर्णोद्वार होने से जूनापतरासर, बालेरा, रड़वा, राणीगांव, सेजरी, पारा सहित अन्य एक दर्जन गांवों में पेयजल की उपलब्धता होगी। इसके अतिरिक्त लिफ्ट सिंचाई पद्धति से आस-पास के कुओं का जल स्तर बढने से कृषकों को सिंचाई उपलब्ध होगी। साथ ही करीब दस हजार से अधिक ग्रामीणों को पेयजल की उपलब्ध हो सकेगा।


पत्रिका ने उठाया था मुद्दा
राजस्थान पत्रिका ने बालेरा बांध की दुर्दशा को लेकर 19 जुलाई 2016 को मेरी टूटी दीवार बनो दो, खुशियों से लबालब कर दूंगा शिर्षक से समाचार प्रकाशित किया। इसके बाद लगातार समाचार प्रकाशित किए। उसी दौरान तत्कालीन जिला कलक्टर सुधीरकुमार ने बांध के पुनर्निर्माण के प्रयास शुरू किए, जो चार साल बाद पूरे हुए है।


- जल्द होगा बांध का निर्माण
बालेरा बांध निर्माण के लिए डीएमएफटी योजना के तहत 1 करोड़ 94 लाख रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति जारी हो गई। उसके बाद विभाग ने तकनीकी स्वीकृति जारी कर दी गई है। जल्द ही टेण्डर जारी कर बांध का निर्माण किया जाएगा। इससे हजारों कृषकों को पेयजल की उपलब्धता होगा और जल स्तर पर बढ़ेगा। - हरीश बाबू शर्मा, अधिशाषी अभियंता, जालोर खण्ड, सिंचाई विभाग

भवानी सिंह
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