यहां से शुरू होती है दिवाली, तभी घरों पर सजते हैं दीपक

-तीन पीढिय़ां दीपक बनाने की कला से जुड़ी हुई
-पिता, बेटा और पौत्र तीनों कला के पारंगत
-बाड़मेर का एकमात्र परिवार जिनकी तीन पीढिय़ां निभा रही अपनी कला की परम्परा

By: Mahendra Trivedi

Published: 11 Oct 2021, 10:13 PM IST

बाड़मेर. दीपावली पर दीपक जलाने की परम्परा है, ठीक उसी तरह बाड़मेर शहर के बलदेव नगर के एक परिवार ने भी अपनी पुरातन रीति-नीति पर चलते हुए पुश्तैनी काम की परम्परा को कायम रख रहा है। भले ही लोग अब दीपक कम लेते हों, लेकिन यह परिवार अपने बच्चों को भी जड़ों से जोड़ते हुए उन्हें भी दीपक बनाने की कला में पारंगत किया है। डिजिटल हो रही दुनिया में पुश्तैनी काम-धंधा करने वाले परिवार काफी कम हो गए हैं। लेकिन यह परिवार अभी उसे कायम रखे हुए है। जबकि यह तो सीजन का काम है।
हर कोई मन लगाकर करता है काम
फिर भी दिवाली से पहले जहां सधे हाथों से पिता लालाराम दीपक को आकार देते हैं तो बेटा पीराराम भी उसी शिद्धत से काम से खुद को जोड़े हुए हैं, अब तीसरी पीढ़ी में पौत्र हुक्माराम भी मिट्टी की इस कारीगरी में पूरी तरह दक्ष नजर आते है। हाथ बिल्कुल सधे हुए हैं, जबकि काफी मुश्किल काम, जहां मिट्टी को आकार देना है, उसमें दक्षता साफ झलक रही है।
45 साल से दिवाली पर बनाते हैं दीपक
पिछले 45 सालों से परिवार अपनी माटी से जुड़ा हुआ है। हालांकि काम में काफी दिक्कतें आती है, अब आसानी से कच्चा माल भी नहीं मिलता है। फिर भी दिवाली पर लोगों के घर रोशन करने में ऐसे परिवारों से ही उसकी शुरूआत होती है।

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