मनरेगा: नियम अपने हिसाब से कर लिए, टांका निर्माण के लिए मिलते हैं 3 लाख बाड़मेर में 2 लाख ही दे रहे अधिकारी

- मनरेगा के तहत होता है व्यक्तिगत टांके का निर्माण
-सरकार के नियम में 3 लाख तक की स्वीकृति
-अधिकारियों ने मनमर्जी से कर दिए एक लाख कम

By: Mahendra Trivedi

Published: 12 May 2020, 09:52 PM IST

बाड़मेर. लॉकडाउन के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा बेरोजगारों के लिए मददगार बन रही है। बाड़मेर जिले में वर्तमान में मनरेगा के तहत करीब सवा लाख श्रमिक प्रतिदिन काम कर रहे हैं। इस बीच अब व्यक्तिगत टांका निर्माण के तहत 3 लाख रुपए के प्रस्ताव पर जिला प्रशासन मंजूरी जारी करेगा। दरअसल, बाड़मेर जिले में व्यक्तिगत टांका निर्माण के लिए अब तक 2 लाख रुपए स्वीकृत किए जा रहे थे। जबकि केन्द्र व राज्य सरकार की गाइडलाइन के अनुसार व्यक्तिगत टांका निर्माण में 3 लाख रुपए तक की स्वीकृति जारी कर सकते हैं।
बाड़मेर जिला पेयजल के लिए लंबे समय से जूझ रहा है। यहां भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए टांका निर्माण की उपयोगिता है। ऐसी स्थिति में टांका निर्माण की संख्या को देखते हुए जिला प्रशासनिक अधिकारियों ने इसकी रेट कम कर दी गई। जिसमें तर्क दिया कि यहां टांका निर्माण पर 3 लाख रुपए खर्च नहीं होते है। ऐसी स्थिति में इसे दो लाख किया जाए।
विधायकों ने उठाया मुद्दा
गुड़ामालानी विधायक हेमाराम चौधरी, बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन व चौहटन विधायक पदमाराम ने टांका निर्माण में 2 लाख की जगह सरकार की गाइडलाइन अनुसार 3 लाख रुपए की स्वीकृति जारी करने की जिला कलक्टर के समक्ष मांग रखी। इस पर जिला कलक्टर ने सहमति जाहिर करते हुए सीईओ से सम्पूर्ण समीक्षा करने की बात कही है।
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- 3 लाख की स्वीकृति जारी करें
सरकार की गाइडलाइन अनुसार व्यक्तिगत टांका निर्माण के लिए 3 लाख की स्वीकृति जारी कर सकते हंै। लेकिन यहां लंबे समय से 2 लाख रुपए की स्वीकृति जारी कर रहे है। इससे लाभार्थी का हक मारा जाता है।
- हनुमान बेनीवाल, पूर्व सरपंच, सिंगोडिय़ा
- प्रस्ताव मांगे है, समीक्षा करेंगे
व्यक्तिगत टांका निर्माण को लेकर प्रस्ताव मांगे है। इस पर समीक्षा कर नियमानुसार कार्यवाही करेंगे।
- मोहनदान रतनु, सीईओ, जिला परिषद, बाड़मेर
- गाइडलाइन अनुसार 3 लाख लाभ मिलना है
मनरेगा में व्यक्तिगत टांका निर्माण के लिए केन्द्र व राज्य सरकार की गाइडलाइन अनुसार 3 लाख रुपए का लाभ मिलना है। यहां दो लाख के टांके स्वीकृत हो रहे थे। मेरे ध्यान में मामला आने पर सीईओ से विस्तृत जानकारी मांगी है। मेरा तो यहीं मानना है कि लाभार्थी को अधिक से अधिक लाभ मिलें। अभी तक कोई प्रस्ताव नहीं आया है।
- विश्राम मीणा, जिला कलक्टर, बाड़मेर

Mahendra Trivedi Reporting
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