53 लाख पालतू पशु जोखिम में

53 लाख पालतू पशु जोखिम में
Camel

Kamal Singh Rajpoot | Updated: 11 Aug 2015, 11:31:00 PM (IST) Barmer, Rajasthan, India

सरकार आमजन के साथ पशुओ की चिकित्सा सुविधाओं के लिए बड़ी राशि खर्च कर कई कल्याणकारी योजनाओं को संचालित कर रही है।

बाड़मेर। सरकार आमजन के साथ पशुओ की चिकित्सा सुविधाओं के लिए बड़ी राशि खर्च कर कई कल्याणकारी योजनाओं को संचालित कर रही है। राजकीय पशु चिकित्सालयो में मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा व जांच योजना के साथ स्पष्ट आदेश है कि पशुओ को दी जाने वाली अधिकांश दवाइयां चिकित्सा संस्थानों में ही नि:शुल्क उपलब्ध हो। इसके लिए कई स्थानों पर अतिरिक्त बजट की स्वीकृति भी की जा रही है। लेकिन जिले के 53 लाख से ज्यादा पशुओ की जीवन सुरक्षा के लिए कोई बीमा योजना संचालित नहीं होने से पशुपालकों को सुरक्षाकवच नहीं मिल रहा है।

बीमा योजनाएं हुई ठप
करीब दस वर्ष पूर्व जिले में अविका कवच व कामधेनु बीमा योजना के तहत गाय, भेड़ व बकरी का बीमा होता था। वर्ष 2006 में अतिवृष्टि के दौरान बड़ी संख्या में पशुओ की मौत पर पशुपालकों को इन योजनाओ से फायदा मिला। दो वर्ष पहले यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेन्स व टाटा एआईजी की तरफ से गाय, भैंस व ऊंट के बीमा से पशुपालकों को काफी राहत मिली। विभागीय जानकारी के अनुसार उस समय जिले में करीब तीन हजार से अधिक पशुओं का बीमा हुआ, लेकिन पिछले दो वर्ष से राज्य सरकार व बीमा कम्पनियों के बीच अनुबंध नहीं होने से लार्खा पशुओ व पशुपालकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

संक्रामक बीमारियों से खतरा
जिले में अधिकांश ग्रामीण रोजगार के लिए बड़ी संख्या में भेड़, बकरी व गाय को पालते हैं। रेगिस्तान में मानसून से पूर्व व बाद में होने वाली संक्रामक बीमारी से इन समूह में रहने वाले पशुओं को बड़ा नुकसान होता है। कई बार सैकड़ों पशु एक साथ काल कलवित हो जाते हैं। गाय व भैंस जैसे दुधारू पशुओ में भी बीमारी से मौत का खतरा बना रहता है।

दुर्घटना के बाद इलाज
बीमित पशु को दुर्घटना के बाद इलाज में राहत मिलती है। दुर्घटना का सर्वाधिक खतरा ऊंट पर होता है। बीमित होने पर राष्ट्रीय राजमार्ग या अन्य सड़कों पर तेज गति से चलने वाहनों से टक्कर के बाद उसके बुरी तरह से चोटिल होने पर उसके इलाज का खर्च बीमा कम्पनी ही वहन करती है।

पशुपालकों को नुकसान
मरूस्थल में पशुपालन रोजगार का प्रमुख साधन है। ऎसे में सरकार की तरफ से बीमा की सुविधा नहीं देने से पशुपालकों को नुकसान हो रहा है। मूलाराम बेरड़, अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ बायतु

नहीं मिल रहा फायदा
सरकार व बीमा कम्पनियो के बीच अनुबंध नहीं होने से पशुपालकों को पशु बीमा का फायदा नहीं मिल रहा है। पशुओं का बीमा करने से क्षति पूर्ति व जोखिम को लेकर पशुपालको को नुकसान कम हो जाता है। इसकी आवश्यकता पर बैठकों में उच्चाधिकारियो को अवगत कराते हैं। डॉ. नारायणसिंह, उप निदेशक, पशुपालन विभाग

जिले में पालतू पशुओं की स्थिति
गोवंश 788366
भैंस 214168
भेड़ 1404031
बकरी 2896620
घोड़ा 2591
ऊंट 43129
(जोधपुर संभाग में सर्वाधिक पालतू पशु बाड़मेर जिले में है।)

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