एक भी उपभोक्ता निशुल्क पानी योजना में नहीं, 28 हजार को भरना पड़ रहा है पूरा बिल

एक भी उपभोक्ता निशुल्क पानी योजना में नहीं, 28 हजार को भरना पड़ रहा है पूरा बिल

Mahendra Trivedi | Publish: Aug, 14 2019 10:08:13 PM (IST) Barmer, Barmer, Rajasthan, India

जलदाय विभाग ने सभी उपभोक्ताओं (consumers) के लिए औसत उपभोग माना 20 हजार लीटर हर महीने (every month), एक भी उपभोक्ता के मीटर रीडिंग (meter reading) से नहीं आता है बिल, विभाग के पास रीडिंग के लिए नहीं कार्मिक, 15 हजार लीटर तक निशुल्क पानी की योजना (free water scheme) का एक को भी नहीं फायदा (advantage)

बाड़मेर. सरकार की 15 हजार लीटर तक पानी के प्रतिमाह उपभोग पर किसी तरह के शुल्क से मुक्ति की योजना (free water scheme) का बाड़मेर के शहरी उपभोक्ताओं (consumers) में से एक को भी फायदा नहीं मिल सकता है। ऐसा इसलिए है कि जलदाय विभाग (phed) औसत आधार पर बिल जारी (issue avarage water consume bill) कर रहा है। इसमें भी 20 हजार लीटर पानी प्रतिमाह निर्धारित किया गया है। उसी के आधार पर विभाग राशि वसूल रहा है। विभाग की नजर में कोई भी उपभोक्ता 15 हजार लीटर तक पानी (water)का उपयोग नहीं करता है। सभी को विभाग 20 हजार लीटर पानी प्रतिमाह आपूर्ति कर रहा है। इसलिए वह पानी का चार्ज वसूल करेगा।
जलदाय विभाग के जिम्मेदारों ने योजना की धज्जियां उड़ा दी है। सरकार की मंशा के अनुरूप काम करने वाले जिम्मेदार खुद ही उसकी योजनाओं का लाभ आमजन तक नहीं पहुंचा रहे हैं। इसका कारण ये भी सामने आया है कि घाटे में चल रहे पानी-बिजली विभाग अधिक वसूली कर भरपाई की कोशिश में लगे हैं। ऐसे में सरकारी योजनाओं पर पानी फिर रहा है।
15 हजार लीटर तक पानी निशुल्क
सरकार ने प्रतिमाह 15 हजार लीटर पानी का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को निशुल्क पानी देने की घोषणा की थी। इसको अप्रेल माह से लागू किया गया। लेकिन बाड़मेर में मार्च से चार माह के बिल में शहर के सभी उपभोक्ताओं के 80 हजार लीटर पानी का बिल भेज दिया गया। जिसमें 20 हजार लीटर प्रतिमाह का औसत दिखाते हुए राशि वसूल की गई।
औसत निर्धारित करने का अजीब तरीका
विभाग के जिम्मेदारों के प्रतिमाह जलापूर्ति के औसत निर्धारित करने का तरीका भी अजीब है। विभाग की ओर से आरटीआइ में मांगी गई सूचना में बताया गया है कि नहर के माध्यम से आने वाले पानी के अनुसार 28 हजार उपभोक्ताओं को एक समान वितरण मानते हुए यह आंकड़ा प्रतिमाह 20 हजार लीटर निर्धारित किया गया है।
विभाग का दावा हर दूसरे दिन 1333 लीटर पानी
औसत के अनुसार मानें तो प्रत्येक उपभोक्ता को एकांतरे होने वाली जलापूर्ति में 1333 लीटर पानी उपलब्ध हो रहा है। हकीकत में इसके ठीक उलट है। कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पर लम्बे समय से एक बूंद तक नहीं आई है। फिर भी उपभोक्ताओं को 20 हजार लीटर प्रतिमाह के अनुसार बिल थमाया जा रहा है।
एक भी मीटर रीडर नहीं
विभाग के पास एक भी मीटर रीडर नहीं है। ऐसे में कुछ उपभोक्ताओं के मीटर लगे भी हैं तो उनकी रीडिंग आज तक नहीं ली गई और ना ही उसी अनुरूप कभी बिल आया। विभाग खुद मान रहा है कि 28 हजार के करीब उपभोक्ताओं में केवल 1600 कनेक्शन पर ही मीटर है। ऐसे में 27 हजार उपभोक्ताओं के मीटर कब लगेंगे, इसका जिम्मेदारों के पास भी जवाब नहीं है।

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