scriptBarmer on high alert mode, preparations in Bakhasar, Pak army was in f | बाड़मेर हाई अलर्ट मोड पर, बाखासर में तैयारियंा, सूंदरा के सामने थी पाक की सेना | Patrika News

बाड़मेर हाई अलर्ट मोड पर, बाखासर में तैयारियंा, सूंदरा के सामने थी पाक की सेना

बल्र्ब- युद्ध की कल्पना ही रोंगटे खड़े कर देती है। 1971 वो युद्ध है जो रेगिस्तान की इस जमीन ने देखा है। यहां के पुराने लोगों की आंखों में एक-एक दृश्य तैर रहा है। बाड़मेर-बाखासर और मुनाबाओ का इलाका...यहां सामने दिख रहा था कि युद्ध होगा तो या तो इस पार या उस पार...4 दिसंबर 1971 के दिन सेना ने जब मोर्चो की ओर कूच करने की रफ्तार बढ़ाई और दोनों ओर से गोलीबारी का दौर शुरू हुआ...इस जिले का हर नागरिक युद्ध के खौफ के साथ में तो था ही साथ ही यह जज्बा भी था कि उस पार या उस पार....जरूरत पड़ते ही देश के लिए

बाड़मेर

Published: December 04, 2021 11:53:16 am

4 दिसंबर 1971....
बाड़मेर हाई अलर्ट मोड पर, बाखासर में तैयारियंा, सूंदरा के सामने थी पाक की सेना
बल्र्ब- युद्ध की कल्पना ही रोंगटे खड़े कर देती है। 1971 वो युद्ध है जो रेगिस्तान की इस जमीन ने देखा है। यहां के पुराने लोगों की आंखों में एक-एक दृश्य तैर रहा है। बाड़मेर-बाखासर और मुनाबाओ का इलाका...यहां सामने दिख रहा था कि युद्ध होगा तो या तो इस पार या उस पार...4 दिसंबर 1971 के दिन सेना ने जब मोर्चो की ओर कूच करने की रफ्तार बढ़ाई और दोनों ओर से गोलीबारी का दौर शुरू हुआ...इस जिले का हर नागरिक युद्ध के खौफ के साथ में तो था ही साथ ही यह जज्बा भी था कि उस पार या उस पार....जरूरत पड़ते ही देश के लिए दौडऩा है।
बाड़मेर पत्रिका.
बाड़मेर का स्टेशन रोड़ बाजार..। सामने ही रेलवे स्टेशन और आगे तक जाते हुए छोटा बाजार हुआ करता था। बीएसएनएल का ऑफिस तब भी था और आगे कलेक्ट्रेट। भारत-पाकिस्तान की युद्ध की घोषणा 3 दिसंबर को ही हो गई थी। तब आकाशवाणी पर बीबीसी लंदन सुना करते थे और रेडियो भंवरलाल अग्रवाल स्टेशन रोड़ के घर पर तो भीड़ जमा हो जाती थी। 3 दिसंबर की घोषणा ने ही बाड़मेर को अलर्ट कर दिया था कि युद्ध शुरू हो गया है। पूर्वी सीमा की तरह पश्चिमी सीमा से भी युद्ध होना है, यानि बाड़मेर-जैसलमेर दोनों हाई अलर्ट मोड पर आ चुके थे।
बाड़मेर शहर अलर्ट
बाड़मेर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक शांतनुकुमार और जिला कलक्टर आईसी श्रीवास्तव ने सेना के अधिकारियों से संपर्क करने के साथ ही यहां तैनात सेना से भी कॉर्डिनेशन कर लिया था। जिला कलक्टर और पुलिस अधीक्षक के क्वाटर सहित अन्य लोगों को भी हिदायत दी थी कि वे अपने-अपने घरों में बंकर बना लें। कोई घर से बाहर नहीं निकले। रात में ब्लैक आऊट की स्थितियां रहेगी। युद्ध को लेकर सेना की मदद के भी तैयार रहे। मुख्य सड़क पर भी पुलिस ने सूचना दे दी थी। पुलिस अधीक्षक प्रतिदिन शाम को गढ़ मंदिर पहुंच जाते थे।
बाखासर-बलवंत-भवानी मिले
जयपुर से आए ब्रिगेडियर भवानीङ्क्षसह को बलवंतसिंह बाखासर की जानकारी जोधपुर से ही मिल गई थी। सांचौर, जालौर, कच्छ का रण से लेकर छाछरो तक बलवंत के चर्चे थे। वे बलवंतङ्क्षसह के पास पहुंचे। रौबदार चेहरा, ऊंची कद काठी, कंधे पर बंदूक, लंबी मूंछे और हट्टे कट्टे बलवंतसिंह से मिलने थाने की पुलिस भी थी। दोनों की मुलाकात ने यहीं से मैप बना लिया था किस तरह छाछरो तक का रास्ता तय किया जाएगा। 4 दिसंबर को ही इसके लिए सेना की टुकड़ी के साथ बलवंत हो लिए थे। कच्छ के रण से लेकर रेगिस्तान तक का मोर्चा संभाला जा रहा था।
गडरारोड़ : सुंदरा की ओर बढ़ रही थी पाक सेना
पाकिस्तान की सेना ने इधर मुनाबाओ और सून्दरा की ओर अपनी ताकत आजमाने की तैयारियंा कर ली थी। भारतीय सेना के जाबांज यहां थे तो सही लेकिन इतनी संख्या में नहीं थे। मुनाबाव के बाद गडरारोड़ बड़ा कस्बा था जो 1947 के बंटवारे में यहां आकर बसा था। आगे सूंदरा का इलाका था। इस इलाके से पाकिस्तान की बढ़ती हरकत की जानकारी देने के लिए ग्रामीण ऊंट पर सवार होकर रवाना हो गए थे। खबर लग चुकी थी कि पाकिस्तान इधर से हमला कर सकता है और इधर भारत की सेना को कच्छ के रण बाखासर, मुनाबाओ और जैसलमेर तक फैलना था। इतने बड़े रेगिस्तान में तत्काल आने जाने के साधन नहीं थे। लिहाजा गांवों में अलर्ट किया गया था कि घरों से नहीं निकलें,हो सके तो गांव खाली कर दें। भारत की सेना भी यहां के लिए कूच कर चुकी थी।
युद्ध के लिए सीमा की ओर
स्टेशन रोड़ पर दुकान करने वाले मंछाराम बताते है कि दिनभर सेना के बड़े-बड़े वाहन और फौजियों का सीमावर्ती क्षेत्र की ओर जाने का एक कारवां शुरू हो गया था। रेडियो की खबरें ही एक माध्यम थी जो बताती थी। बाड़मेर-जैसलमेर 1965 का युद्ध देख चुके थे,इसलिए 1971 के लिए तैयार थे। यह पता चल गया था कि बॉर्डर पर अब गोलियां चलने लगी है।
बाड़मेर में तैयार हुआ नागरिक संगठन
सेवाभावी और देश के लिए कार्य करने वालों की एक पूरी टुकड़ी थी बाड़मेर में। ये लेाग अपनी तरफ से तैयार हो गए थे। संगठन बने हुए थे। सबको संदेश दिया गया था कि अब स्वयंसेवक तैयार हो जाए। सेना के लिए राशन, खाना और मदद के लिए इन संगठनों ने कमर कस ली थी। (क्रमश:)
बाड़मेर हाई अलर्ट मोड पर, बाखासर में तैयारियंा, सूंदरा के सामने थी पाक की सेना
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