बाड़मेर की अधूरी आस, 10 दिन तय करेंगे अकाल-सुकाल

सीमावर्ती रामसर, शिव और गडरारोड इलाकों के गांवों (border area villeges) में अपर्याप्त बारिश (insufficient rain) की वजह से पीने के पानी का संकट (drinking water crisis) भी खत्म नहीं हुआ है। अगस्त (august) के पहले पखवाड़े में ही इन इलाकों में मेह बरसा है वो भी इतना, जिससे कुछ चारा हो जाए तो गनीमत।

By: Mahendra Trivedi

Published: 20 Aug 2019, 08:10 AM IST

बाड़मेर. प्रदेशवासी जहां बारिश और अतिवृष्टि के कारण लबालब खुशियों का आनंद ले रहे हैं, वहीं बाड़मेर जिले का सीमावर्ती क्षेत्र (border area) लगातार चौथे अकाल (drought) की आहट सुनने लगा है। जिले में इस वर्ष अब तक महज 199.47 मिमी बारिश (rain) हुई है जो औसत 347 से आधी भी नहीं है। पांच लाख हैक्टेयर में बुवाई कर चुके किसानों (farmers) को बाजरे की आस खत्म हो गई है। मूंग, मोठ और ग्वार से उम्मीदें बची हैं, वो भी तब, जब आने वाले दिन दिनों (incoming days) में अ'छी बारिश हो। सीमावर्ती रामसर, शिव और गडरारोड इलाकों के गांवों (border area villeges) में अपर्याप्त बारिश की वजह से पीने के पानी का संकट भी खत्म नहीं हुआ है। अगस्त के पहले पखवाड़े में ही इन इलाकों में मेह बरसा है वो भी इतना, जिससे कुछ चारा हो जाए तो गनीमत।
पशुओं को पालना मुश्किल
- जिले में 55 लाख के करीब पशुधन है, जिसमें से 8 लाख गोवंश है। चारा नहीं होने से पशुपालकों के लिए पशुधन को पालना मुश्किल है। सालभर तक इनको पालने के लिए हजारों रुपए खर्च होने है। सरकार की ओर से पशु शिविर बंद कर दिए गए हैं और अब नवंबर तक सरकार नियमों व प्रक्रियाओं में उलझी रहेगी।
स्थायी हो अकाल प्रबंधन
- जिले में दस में से सात साल अकाल आम है। लगातार चौथे साल आई इस स्थिति पर सरकार अभी से सोचे। जिले में अकाल से राहत के स्थायी प्रबंध होने चाहिएं। इसके लिए रोजगार, चारा, पानी का इंतजाम कैसे किया जाएगा, यह ध्यान में रखा जाए। - डा. गोविंद कृष्ण व्यास, कृषि वैज्ञानिक
लूणी को जोड़ नदियों से
- अकाल के बावजूद एक अ'छी स्थिति है कि लगातार तीसरे साल लूणी नदी में अजमेर, पाली और जोधपुर में अ'छी बारिश होने से पानी आया है। लूणी को सहायक नदियों से जोड़ते हुए अतिक्रमण हटाए जाएं और इसका पानी जो क'छ के रण में फैल जाता है उसका भी समाधान तलाशें। इससे बड़ा फयदा हो सकता है। - सवाईसिंह भिंयाड़, उन्नत कृषक
दस दिन शेष
- जिले में करीब पांच लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई है। इस बुवाई का फ ल तब मिलेगा जब आने वाले दस दिनों में फि र बारिश हो। औसत बारिश अभी भी नहीं हुई है। ऐसे में स्थिति ठीक नहीं है। जमाने की आस नहीं बंधी है। अकाल चौथे साल रहा तो हालात विकट होंगे। -
डा. प्रदीप पगारिया, कृषि वैज्ञानिक

Mahendra Trivedi Reporting
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