कागजों में दफन हो गई स्वच्छता की योजना, गांवों में नहीं नजर आया 'मिशन'

- 2 अक्टूबर 2017 को लागू हुई थी योजना

बाड़मेर. स्वच्छ भारत मिशन अभियान के तहत ओडीएफ ग्राम पंचायत स्तर पर स्वच्छता का संदेश देने के लिए लागू की गई मुख्यमंत्री स्वच्छ ग्राम योजना महज कागजों में नजर आई, लेकिन योजना के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर कोई काम नहीं हो पाया। योजना के तहत गांव को स्वच्छ, स्वच्छता के लिए जागरूकता, ठोस कचरे का प्रबंधन होना था।

साथ ही 150 परिवार के समूह पर प्रतिवर्ष 6 श्रमिकों को नरेगा के तहत रोजगार मिलता। वहीं कचरे के निस्तारण से बनने वाली जैविक खाद से ग्राम पंचायत की आय सृजित होती। लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते यह योजना कागजों से बाहर नहीं आई।

ऐसे होना था काम

मुख्यमंत्री स्वच्छ ग्राम योजना के तहत कार्यकारी एजेंसी ग्राम पंचायत में सफाई कार्य प्रस्तावित था। प्रत्येक गांव में 150-150 घरों का क्लस्टर (समूह) बनाकर एक क्लस्टर पर दो श्रमिक नरेगा के तहत लगने थे। इसके बाद सामुदायिक कचरा पात्र से ठोस कचरे का संग्रहण एवं परिवहन होना था।

अलग-अलग लगने थे डस्टबिन

योजना के तहत गांव में दो अलग-अलग डस्टबिन लगने थे। जिसमें कचरा अलग-अलग एकत्रित किया जाता है। वहीं एक ट्राई साइकिल की खरीद होनी थी। जिसमें दो पार्ट में हरा व लाल रंग के डस्टबिन लगाकर ठोस तरल अपशिष्ठ अलग-अलग एकत्रित करना था।

बननी थी जैविक खाद

योजना के तहत ग्राम पंचायत में कचरा निस्तारण के लिए पंचायत की भूमि पर कचरा संग्रहण के लिए तीन गड्ढ़े बनाकर जैविक कचरा निस्तारण होता। उसके बाद पहले गड्डे में कचरे का संग्रहण जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया, दूसरे में जैविक कचरा संग्रहण किया जाता। उसके बाद जैविक खाद को पौधरोपण में काम लेना था।

मुख्यमंत्री स्वच्छ ग्राम योजना

- ठोस व तरल कचरे का अलग-अलग निरस्तारण
- जैविक खाद बनाने का था प्रोजेक्ट

- नरेगा के तहत दो श्रमिकों को मिलना था रोजगार
- 150 परिवार पर लगने थे दो श्रमिक, प्रतिवर्ष 6 श्रमिकों मिलता रोजगार

- योजना के तहत कोई काम नहीं हुआ

मुख्यमंत्री स्वच्छ ग्राम योजना के तहत अलग से कोई काम स्वीकृत नहीं हुआ। इसलिए कोई काम नहीं हो पाया है। यह योजना महज कागजों में दिखाई गई थी। काम होता तो श्रमिकों को रोजगार के साथ गांव में स्वच्छता का संदेश जाता।

- हनुमान बेनीवाल, सरपंच, सिंगोडिय़ा

- इस साल कोई काम नहीं हुआ

इस योजना में इस साल तो कोई काम नहीं हुआ है। इसमें अलग से कोई बजट नहीं मिला। पहले कोई हुआ है तो पता करवाता हूं।

- मोहनदान रतनु, सीइओ, जिला परिषद, बाड़मेर

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Mahendra Trivedi
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