सीसीटीवी कैमरों का काम बंद, कंपनी ने किए हाथ खडे़! जानिए पूरी खबर

सीसीटीवी कैमरों का काम बंद, कंपनी ने किए हाथ खडे़! जानिए पूरी खबर
CCTV camera stop working

bhawani singh | Updated: 18 Aug 2019, 12:20:09 PM (IST) Barmer, Barmer, Rajasthan, India

- एक साल पहले कंट्रोल रूम स्थापित हुआ, फिर भी नहीं लगे कैमरे- सरकार बदली तो कंपनी ने खड़े किए हाथ, भुगतान हुआ नहीं, कंपनी ने रोका काम

 

भवानीसिंह राठौड़@बाड़मेर. शहर में निर्भय रहने के लिए राज्य सरकार की ओर से 250 सीसीटीवी कैमरे लगाने का दावा फाइलों में कैद हो गया है। यहां विभाग ने 125 पोल खड़े कर दिए और 50 कैमरे भी लगा दिए, लेकिन उसके बाद सरकार परिवर्तित होने पर यह मामला अटक गया है। अब न तो कैमरे शुरू हो पा रहे हैं और न ही फाइबर केबल बिछाई गई है।


शहर में राज्य सरकार की अभय कंट्रोल व कमांड योजना के तहत 250 कैमरे लगने थे। इसके लिए जिला कलक्ट्रेट में एक साल पहले कंट्रोल रूम स्थापित किया गया। विभागों में तालमेल के अभाव में छह माह तक कंपनी को कैमरे लगाने के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने के लिए एनओसी नहीं मिल पाई। एनओसी नहीं मिलने के चक्कर में काम अटक गया। उसके बाद सरकार परिवर्तित हो गई। अब कंपनी कह रही है कि भुगतान करवाओ। सरकार ने कंपनी का भुगतान नहीं किया। ऐसे में कंपनी काम अधूरा छोड़ लौट गई। इधर, पुलिस के 10 कैमरों व 50 ऑफ लाइन कैमरों के लिए पुलिस की टीम कंट्रोल रूम में 24 घंटे कार्यरत है।

 

विभाग व एसपी ने भेजे पत्र
सूचना एवं प्रोद्यौगिकी विभाग व पुलिस अधीक्षक ने शहर में कैमरे संचालित करने को लेकर राज्य सरकार को कई बार पत्र भेजे हैं। लेकिन कोई काम नहीं हो पाया है। ऐसे में शहर में निर्भय रहने की योजना ठण्डे बस्ते में चल रही है।

 

यह होना था काम
कंट्रोल रूम में शहर में लगने वाले 250 कैमरे से नजर रहती। यहां किसी भी आपराधिक घटना की कैमरे के जरिए जानकारी मिलने पर संबंधित थाने की पुलिस को तत्काल सूचित करने के बाद सीसीटीवी से पूरी तरह आपराधिक वारदात पर नजर रखी जाती। लेकिन योजना अधरझूल होने पर ऐसा कुछ नहीं हो पाया।

 

फैक्ट फाइल

- 4 बड़ी एलइडी स्क्रीन लगाई
- 4 पुलिस ऑपरेटर रखेंगे पैनी नजर

- 2 वायरलैस ऑपरेटर
- 250 स्थानों पर शहर में लगने थे कैमरे

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- कंपनी वापस आई नहीं, मामला अटक गया

कैमरे लगाने व ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने का मामला अटका हुआ है। काम करने वाली कंपनी वापस नहीं आई। कई बार राज्य सरकार को पत्र लिख चुके हैं। लेकिन कुछ नहीं हुआ है। - मोहनकुमारसिंह, उप निदेशक, सूचना एवं प्रोद्यौगिकी विभाग, बाड़मेर,
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