अपनों के पास आए, करीब नहीं ....

कोरोना और कोरोना और लॉक डाउन..लॉक डाऊन

By: Dilip dave

Published: 08 Apr 2020, 12:13 PM IST


बाड़मेर पत्रिका.
कोरोना और लॉक डाउन...जैसे ही सुना परदेस में रह रहे हजारों लोग अपनों के पास घर चल पड़े। वाहन मिलता तो ठीक नहीं तो पैदल ही। चिंता के इस दौर में उन्हें घर के अलावा कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। वजह साफ थी अपना घर अपना होता है, परिवार से बढक़र कोई नहीं..खुद की सुरक्षा के साथ परिवार की फिक्र भी खत्म, लेकिन घर आने के बाद भी बड़ी संख्या में लोगों ने कोई लापरवाही नहीं बरती। अपनों के पास तो आए, लेकिन करीब नहीं गए। होम आइसोलेशन पर इन लोगों ने अपने ही घर-खेत में दूरियां बना दी। कोई अलग खेत की झोंपड़ी में तो कोई अलग कमरे में। रोटी-पानी का प्रबंध भी इस तरह जैसे वो परिवार से अलग दुनिया जी रहे हैं। ये भले इनको अखरता है लेकिन अहसास है कि वे अपने कारण किसी को खतरे में नहीं डालेंगे। इन जागरूक लोगों का नतीजा है कि बाड़मेर में अब तक एक भी कोरोना पॉजिटिव नहीं मिला है।
बालोतरा-बेटी की सीख
शहर के कपड़ा कारोबारी जगदीश राठी की पुत्र करिश्मा राठी पूना के नेशनल इंस्ट्ीयूट बैंक मैनेजमेंट की छात्रा 19 मार्च को वह पूना से हवाई जहाज से जोधपुर पहुंची, यहां से बस से बालोतरा घर पहुंची। हवाई अड्डे पूना व जोधपुर में स्क्रीनिंग की गई। स्वस्थ होने के बावजूद उसने होम आईसोलेशन रहने का निर्णय लिया। एक कमरे में उसने अकेले रहकर 14 दिन बिताए। लैपटॉप पर पढ़ाई करते हुए समय बिताया।
तेलंगाना से आया,घर में अकेला
बुड़ीवाड़ा निवासी महेन्द्र चौधरी पुत्र तुलसाराम तेलगांना के जामबाद से 30 मार्च को गांव पहुंचा। खेत में बने मकान के एक कमरे में अकेला रहता है। परिवार के लोग भोजन बनाकर देते हैं। परिवार से व सदस्य उससे दूरी बनाए हंै। वह कहता है कि मोबाइल से अन्य स्थानों से आए प्रवासियों से अकेले रहने व निर्देशों की पालना करने की सलाह लगातार दे रहा हूं ।
रामसर.
राज्य में कोरोना के केन्द्र भीलवाड़ा से जायडू निवासी प्रकाश पुत्र सांवताराम व करनाराम पुत्र गोरधनराम 21 मार्च को गांव आए। परिवार से अलग कमरे में रह रहे हैं । कपड़े, खाने के बर्तन ,बिस्तर, पानी का मटका सहित सभी आवश्यक वस्तुएं अलग रखी हुई है । प्रकाश जैसे क्षेत्र में 266 लोग है जो ऐसी ही जिंदगी जी रहे है। पीइइओ चुतराराम चौधरी बताते है कि इनकी यह दूरी क्षेत्र में कोरोना को दूर किए हुए है।

अधिकारी भी अपनों से दूर..
कलक्टर: बेटा साथ, परिवार जयपुर
जिला कलक्टर विश्राम मीणा के साथ इन दिनों उनका बेटा है। परिवार के सदस्य जयपुर है। देर रात फ्री होने के बाद परिवार के सदस्यों से बात करते हैं, लेकिन इसके लिए भी पूरा समय नहीं मिल पा रहा है।
अतिरिक्त कलक्टर: तीन दिन पहले लौटा परिवार
अतिरिक्त जिला कलक्टर राकेशकुमार का परिवार 3 दिन पहले बाड़मेर आया है। परिवार के लौटने की वजह भी उनकी फिक्र है। घर पहुंचने के बाद भी पूरी ऐहतियात बरतते हंै।
पुलिस अधीक्षक- परिवार जयपुर
पुलिस अधीक्षक आनंद शर्मा बताते हैं कि छुट्टियां थीं, इसलिए परिवार जयपुर है। बात होती है, यहीं कहते है ध्यान रखना, बाहर निकलो तक मास्क पहन कर निकलना।
सीएमएचओ-बेटे की सगाई स्थगित
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कमलेश चौधरी के परिवार के सभी सदस्य जोधपुर है, वीडियो कॉलिंग के जरिए बात होती है। सामाजिक जिम्मेदारियां भी निभा रहे है। बेटे की सगाई होनी थी, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनी अब उसे आगे करेंगे।


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शिव. कानासर ग्राम पंचायत के कहानियों की ढाणी निवासी पीरे खान पुत्र शकूर खान 2 अप्रेल को बिहार से गांव पहुंचा था। प्रशासन को सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर उसे अलग कमरे में होम आइसोलेशन में रहने के निर्देश दिए। वही प्रतिदिन चिकित्सा विभाग की टीम की ओर से स्वास्थ्य जांच किया जा रहा है। पीरेखां का कहना है कि उस इस बात का सुकून है कि वह घरवालों के पास है, फिर अलग रहना भी तो घर, परिवार व पड़ोसियों की हिफाजत के लिए ही है। कुछ दिन तो यों ही निकल जाएंगे।

धोरीमन्ना. कजाकिस्तान में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा छात्र कृष्णकुमार ढाका कोरोना वायरस के चलते कजाकिस्तान से घर आया। कृष्ण कजाकिस्तान से दुबई, दिल्ली, सांचौर होते हुए धोरीमन्ना पहुंचा और आते ही परिवार से अलग रहने लगा। कृष्ण के पिता विरधाराम ढाका ने उसे धोरीमन्ना के सुभाषनगर में बने आवास पर होम आइसोलेटेड कर दिया। इस दौरान बाड़मेर के अस्पताल में जांच व इलाज के बाद वापिस घर आया। अब वह परिवार के साथ खुशी-खुशी रह रहा है।

Dilip dave Desk
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