दिलीप दवे
बाड़मेर. बढ़ते कोरोना के कहर के बीच मरुधरा खुशियां बिखेर रही है। बारिश से पहले उनालू फसलों से कई किसानों के घर महक रहे हैं तो खेतों में अंकुरित हो रही खजूर आने वाले दिनों में करोड़ों की कमाई का जरिया बनेगी। ऐसे में रेतीले धोरों के बीच करोड़ों की हरियाली लहलहा रही है।
सीमावर्ती जिला बाड़मेर मरुस्थलीय जिलों में आता है। यहां रेतीले धोरों के बीच खरीफ की फसल की किसानों की आवाजीविका का सदियों से साधन रही है, लेकिन अब स्थिति बदली है। वर्तमान में यहां सब्जियां, फसलें व बागवानी से किसानों की किस्मत चमक रही है। खास बात यह है कि मार्च में कोरोना ने दस्तक दी, उसी वक्त यहां सब्जियों, रिजका, बाजरा आदि की बुवाई चल रही थी। दो माह से आमजन जहां कोरोना की चिंता लिए बैठा था तो कई किसान कोरोना का सदुपयोग करते हुए खेतीबाड़ी संभाल रहे थे। दो माह में अब उनकी मेहनत हरियाली बन कर लहलहा रही है। जानकारी के मुताबिक वर्तमान में करीब पांच हजार हैक्टेयर में बाजरा की सिट्टे निकले हुए हैं तो बैंगन, टमाटर, पालक, मिर्ची सहित कई सब्जियां तैयार हो रही है। इधर, पशुओं का चारा रिजका हर रोज किसानों को आय दे रहा है। करीब एक करोड़ रुपए की उनालू फसलें व सब्जियां किसानों की किस्मत को कोरोना में चमकाने को तैयार है।
सात करोड़ की खजूर से भी खुशियां- जिले में काफी किसान अब खजूर की उपज भी ले रहे हैं। अमूमन जून में खजूर की आवक शुरू होती है। इससे पहले खजूर तैयार होने लगती है। वर्तमान में कच्ची खजूर पेड़ों पर लगी नजर आ रही है।
लॉकडाउन के चलते सिर्फ परिवार की मेहनत की कमाई- गौरतलब है कि 22 मार्च से कोरोना संक्रमण की आशंका के चलते देश में लॉकडाउन लग गया। ऐसे में किसानों को मजदूर नहीं मिले। किसानों ने परिवार के साथ खड़ी फसलों की देखभाल की। अब परिवार की मेहनत के चलते फसलें तैयार हो चुकी है जिससे कमाई होने की उम्मीद से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं।
फैक्ट फाइल
फसल क्षेत्रफल हैक्टेयर आय
बाजरा 5000 २०-25 लाख
रिजका/बाजरा 7000 8-10 लाख
सब्जियां 700 45-50 लाख
खजूर 112 5-7 करोड़
फसल बुवाई चक्र
फसल बुवाई कटाई
बाजरा मार्च का अंतिम सप्ताह जून का तीसरा सप्ताह
रिजका मार्च का अंतिम सप्ताह जून तक चार बार कटाई
सब्जियां मार्च का अंतिम सप्ताह मई-जून तक
खजूर जून के प्रथम पखवाड़े से आवक शुरू
उनालू फसलों से उम्मीद- उनालू फसलों से कुछ कमाई की उम्मीद है। रबी व खरीफ फसलों के बीच इन तीन माह में उनालू फसलें बोने से किसानों को अच्छी आय होती है।-सवाईसिंह राठौड़, किसान भिंयाड़
उनालू फसलों से उम्मीद- वैसे जिले में उनालू फसलों की बुवाई कम होती है, लेकिन काफी किसान कमाई कर रहे हैं। खजूर की कमाई अतिरिक्त आय का जरिया है।- डॉ. प्रदीप पगारिया, कृषि वैज्ञानिक
सब्जियों से फायदा- वैसे मार्च से जून के बीच किसान बुवाई नहीं करते। ऐसे में सब्जियोंं की बुवाई कर अच्छी कमाई की जा सकती है। जिले में सब्जियों की बुवाई के प्रति रूझान बढ़ा है।- पदमसिंह भाटी, सहायक निदेशक कृषि विभाग बाड़मेर

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