जहां रखे जाते थे अमरकोट के आम, वहां आगोर में बबूल

जहां रखे जाते थे अमरकोट के आम, वहां आगोर में बबूल

bhawani singh | Publish: Jul, 14 2018 11:23:53 AM (IST) Barmer, Rajasthan, India

आगोर पर नहीं गौर :- अव्यवस्थित खुदाई से बिगड़ रहा स्वरूप - घाट क्षतिग्रस्त, आगोर पर अतिक्रमण

 

शिव/ बाड़मेर. भारत-पाकिस्तान के बीच तारबंदी नहीं थी और सहज रूप से व्यापारिक कार्याें व मजदूरी के लिए थार के लोग पाकिस्तान के कराची, अमरकोट और अन्य इलाकों में आते-जाते थे तब अमरकोट से आम लाकर उनको ठण्डा और कई दिनों तक सहेजकर रखने के लिए आसपास के लोग शिव गांव के मानसरोवर तालाब की बेरियों में रखा करते थे। तालाब का बड़ा आगोर होने से यहां पानी सालभर खत्म नहीं होता। अंदर बनी बेरियां सालपर्यन्त रिचार्ज रहती थीं और आस पास में बगीचे भी थे लेकिन अब यह सब देखने को नहीं है। अतिक्रमी आगोर को खा गए औैर उसके बाद रखरखाव की फिक्र नहीं होने से यह तालाब और इसका वजूद संकट में पड़ गया है। आगोर पर आज भी काम हो तो यह तालाब क्षेत्र के लिए फिर से वरदान साबित हो सकता है।

 

यह है आगोर के हाल

आगोर क्षेत्र में बबूल की झाडिय़ां उगने तथा अतिक्रमण की वजह से पानी की आवक कम हो गई है। वर्ष 2006 में आई बाढ़ के कारण तालाब में रेत के ढेर लगने से बारिश का पानी ठहर नहीं पा रहा है। तालाब के घाट क्षतिग्रस्त हो गए हैं। मरम्मत नहीं होने से इनके क्षतिग्रस्त होने का खतरा बढ़ गया है ।

 

गड्ढे और खतरा

रखरखाव के अभाव में पानी की आवक तथा ठहराव में कमी आई है। तालाब की मिट्टी लोग जमीन को उपजाऊ बनाने व मकान निर्माण के दौरान भर्ती के लिए काम में लेते हैं। मिट्टी की व्यवस्थित खुदाई नहीं होने से इसमें कई जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। इससे जनहानि का खतरा है।

 

बन सकता है सहारा

तालाब का भराव क्षमता इतनी है कि यदि सरकार चाहे तो आसपास ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल समस्या का समाधान बन सकता है । सालभर भराव होने से यहां कई प्रवासी पक्षियों का कलरव रहता था ।


एेसी है किंवदंती

किंवदंती है कि वर्षों पहले इस तालाब का निर्माण भगवान शिव के हाथों से हुआ था। वह पार्वती के साथ भ्रमण के लिए आए थे। इसी दौरान उन्होंने अपने साथ लाए कैलाश मानसरोवर का पानी गिरा दिया था। इसी पानी से तालाब का उद्भव हुआ।

 

व्यू

- मानसरोवर तालाब कस्बे की प्राकृतिक धरोहर है ,जिसकी सारसंभाल के लिए प्रशासन तथा स्वयंसेवी संस्थाओं को आगे आना चाहिए। आगोर का कार्य सबसे महत्वपूर्ण है। - चैनमल खत्री, शिक्षाविद्

- तेज बरसात पर तालाब की एक ओर से पानी नदी के रूप में बहता हुआ कस्बे के मोहल्लों में घुस जाता है। जनजीवन प्रभावित हो जाता है जिसका उचित प्रबंधन होना चाहिए। - हीरानाथ स्वामी, पूर्व उपसरपंच
- मानसरोवर तालाब को मनरेगा योजना के तहत आदर्श तालाब घोषित किया गया है जिसके लिए 33 लाख का बजट स्वीकृत है। इसकी खुदाई का कार्य चल रहा है। घाट निर्माण का कार्य भी जल्दी प्रारंभ करवाया जाएगा। - रिड़मल राम कुमावत, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत, शिव

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

Ad Block is Banned