पहले नहीं माना फ्रंटलाइन वर्कर अब कोविड में ड़यूटी, वैक्सीनेशन ना सुरक्षा?

- करीब पांच हजार शिक्षक बिना टीकाकरण के निभा रहे कोरोना वॉरियर्स की ड्यूटी

- दूसरे को दे रहे सीख-लगाएं टीका, खुद के नहीं लगा

By: Dilip dave

Updated: 03 May 2021, 12:38 AM IST

दिलीप दवे बाड़मेर. कोरोना संक्रमण आते ही प्रशासन को इनकी याद आती है और गांवों में ड़यूटी लगा दी जाती है, लेकिन जब टीकाकरण की बारी आई तो इनको भूल गए। फ्रंट लाइन वर्क्र्स इनको नहीं माना इसलिए इनके कोरोना का टीका नहीं लगा। मांग करते रहे लेकिन प्राथमिक शिक्षा, चिकित्सा, पुलिस, प्रशासन, राजस्व सहित अन्य विभागों के कार्मिकों को दो दो डोज लगा दी इनका नाम एक बार भी शामिल नहीं किया। अब फिर से कोरोना की जंग में जरूरत पड़ी तो ड्यूटी लगा दी। अब बिना टीकाकरण के ये दूसरों को समय पर टीका लगाने की प्रेरणा दे रहे हैं। बात हो रही है माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीनस्थ कार्यरत शिक्षकों की जो दोहरी नीति के चलते टीकाकरण से वंचित है और अब बढ़ते कोरोना संक्रमण में फिर से फ्रंट लाइन वर्क्र्स बन प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं।

कोरोना से जंग जीतने की तैयारी कर रही सरकार जिन शिक्षकों को गांव में टीकाकरण की जागरूकता का जिम्मा दे रही है, वे खुद ही कोरोना के टीके से दूर है। क्योंकि माध्यमिक शिक्षा के जिन शिक्षकों को जिम्मा सौंपा गया है उनको फ्रंट लाइन वर्कर नहीं मानने से उनका अब तक सूची में नाम नहीं आया है। उनके साथ कार्य करने वाले प्राथमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को तो सरकार ने पहले ही दौर में टीकाकरण के लिए सूची में शामिल किया तो उनके दो बार डोज लग चुकी है जबकि इनको शामिल नहीं किया गया।

हालांकि आमजन के साथ ४५ साल की उम्र तक के शिक्षकों में से कई जनों ने टीके लगाए लेकिन अभी भी पांच हजार से ज्यादा शिक्षक बिना टीका लगाए ही ड्यूटी दे रहे हैं।

वार्ड कोर कमेटियों में शामिल- प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्रामवार व वार्डवार कोर कमेटियों व सतर्कता समितियों का गठन किया गया है। इसमें ग्रामसेवक, पटवारी, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा, सहयोगिनी के साथ सबसे अधिक संख्या में शिक्षकों को लगाया गया है। इन कोर कमेटियों को सतर्कता समिति व निगरानी कमेटी के रूप में बाहर से आने वाले व्यक्तियों की सूचना देना, बाहर से आने वालों को होम क्वारेन्टीन करने, कोरोना पॉजिटिव को क्वारेन्टीन करना, शादी व सामाजिक समारोह की निगरानी करने के साथ ही डोर टू डोर सर्वे की जिम्मेदारी दी गई है।

मास्क ना सेनेटाइजर- ये कोर कमेटी के सदस्य सीधे तौर पर सभी व्यक्तियों के संपर्क में आते है और बिना किसी सुरक्षा उपकरणों के अपनी जान जोखिम में डाल काम कर रहे हैं। बावजूद इसके ना तो इनको मास्क मिल रहे हैं और न ही सेनेटाइजर की व्यवस्था भी है। एेसे में इन शिक्षकों में कोरोना संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा है।

सुविधाएं मिलनी चाहिए- विभाग की ओर से शिक्षकों के टीकाकरण करने के साथ ही मास्क, सेनेटाइजर व अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करवाने चाहिए। साथ ही शिक्षकों को फ्रंट लाइन वर्कर घोषित करना चाहिए।- बसन्तकुमार जाणी, जिलाध्यक्ष, राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ, रेस्टा बाड़मेर

अब तो सबके हो जाएंगे- वैसे सरकार ने ४५ साल से अधिक आयु के सभी नागरिकों के टीकाकरण के आदेश दे रखे हैं, जिसमें शिक्षकों ने टीके लगाए हैं। अब १८ साल से अधिक आयु के लोगों का टीकाकरण होगा जिसमें ये टीके लगा सकते हैं। वैसे माध्यमिक शिक्षा के शिक्षकों के टीकाकरण को लेकर विशेष आदेश कोई नहीं हुआ है।- जेतमालसिंह राठौड़, एडीईओ माध्यमिक शिक्षा बाड़मेर

सतर्कता जरूरी, टीकाकरण करवाएं- हालांकि टीकाकरण जरूरी है, लेकिन सतर्कता बरती जाए। वैसे अब १८ साल से अधिक के सभी लोगों को टीकाकरण हो रहा है तो शिक्षक प्राथमिकता से टीका लगवाएं। मास्क लगा कर रखें, सेनेटाइजर करें व दूरी बनाएं रखें, सतर्कता ही सुरक्षा है।- डॉ. बी एल मंसुरिया, पीएमओ राजकीय चिकित्सालय बाड़मेर

Dilip dave Desk
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