नहीं रुक रही टिड्डियां, 2018 का क्लेम अटका, खराबे का अब तक सर्वे नहीं

- किसानों को नहीं मिल रही राहत
- बारिश में भीगी फसल का आधा भी नहीं मिल रहा दाम

बाड़मेर. गडरारोड जिले में लगातार दो वर्षों से हुए फसल खराबे का किसानों को अभी तक राहत का रास्ता साफ नहीं हो पाया है। सीमावर्ती क्षेत्र में अभी तक टिड्यिों की आवक से किसान परेशान हैं। वहीं कुछ दिन पूर्व काट कर एकत्र की खरीफ फसल पर बरसे ओलों के बाद बीमा कम्पनी ने अर्जियां तो ली, लेकिन अभी तक सर्वे नहीं करवाया है।

ऐसे में किसान अब बारिश से खराब हुई फसल को ही लेकर बाजार में पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां उन्हें उसका आधा मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में चार माह तक भीषण गर्मी में किसानों का बहा पसीना बेकार हो रहा है।

इसके अलावा वर्ष 2018 में सूखे के कारण प्रभावित किसानों को अभी तक उसका क्लेम नहीं मिल पाया है। उस दौरान भी कर्जा लेकर खेती करने वाले लोगों के लिए उसका ब्याज चुकाना भी मुश्किल हो रहा है।
नहीं हो रहा टिड्यिों पर नियंत्रण

सीमावर्ती क्षेत्र में पिछले 6 माहा से लगातार टिड्डियों का आना जारी है। इससे रबी की फसल नुकसान का खतरा मंडरा रहा है। तारबंदी के नीचे से लाखों दल पहुंच रहे हैं।

किसानों का आरोप है कि लोकस्ट विभाग की टीमें सड़क किनारे खेतों में ही कीटनाशक छिड़काव कर रही है। ऐसे में धोरों में पनप रहे फाके पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।

किसान पहुंचे तहसील कार्यालय

वर्ष 2018 का बीमा क्लेम दिलाने, ओलावृष्टि से खराब फसलों का सर्वे कर लाभ दिलाने व टिड्डियों पर नियंत्रण सहित अन्य मांगों को लेकर किसानों ने मंगलवार को तहसीलदार कार्यालय पहुंच मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौपा।

भाकिसं तहसील अध्यक्ष गोविंदराम चौहान का कहना है कि किसानों को अभी तक राहत नहीं मिलना सरकार की संवेदनहीनता दर्शाती है।

शेरसिंह तामलोर का आरोप है कि बीमा कंपनियां लीपापोती कर सड़क पर ही किसानों से अंगूठे लगवा रही है। यह भी नहीं बताया जा रहा है किसान के खेत में कितना खराबा लिखा है। आलमखान पनेला, गेनाराम सहित अन्य ने तहसीलदार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

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Moola Ram
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