बाड़मेर. नेपियर घास एक बार बुवाई करने से 6 साल तक हरे चारे का उत्पादन देती है और पशुओं को संतुलित पशु आहार उपलब्ध होने से दूध की धार बढ़ी है। यह बात श्योर व केयर्न फाउंडेशन के सौजन्य से संचालित डेयरी विकास एवं पशुपालन परियोजना के तहत वापा ग्राम पंचायत देवड़ा में आयोजित एक दिवसीय नेपियर घास प्रदर्शन प्रक्षेत्र दिवस प्रशिक्षण के दौरान संदर्भ व्यक्ति एवं काजरी के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डी कुमार ने कही।

उन्होंने कहा कि पशुपालक हरा चारा उत्पादन के लिए पानी एवं भूमि की जांच कराकर आवश्यकतानुसार कंपोस्ट, वर्मी कंपोस्ट एवं उर्वरक का उपयोग करें। डॉ कुमार ने बीज एवं भूमि को उपचारित कर वैज्ञानिक तरीके से हरा चारागाह विकास करने का आह्वान किया। कार्यक्रम प्रबंधक हनुमान राम चौधरी ने कहा कि पशुओं के लिए वर्ष पर्यंत हरा चारा एवं संतुलित पशु आहार की उपलब्धता सुनिश्चित कर डेयरी को आजीविका का मुख्य आधार बनाएं।

वेहना राम चौधरी ने परियोजना के तहत किए जा रहे डेयरी एवं पशु प्रबंधन व हरा चरागाह विकास को लेकर विचार व्यक्त किए।
सहायक परियोजना समन्वयक माला राम गोदारा ने नेपियर घास पशुओं को खिलाने की विधि एवं परियोजना के तहत किए जा रहे प्रयासों के बारे में जानकारी प्रदान की।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned