मनरेगा मजदूरों से कम मानदेय पर काम करने को मजबूर सफाईकर्मी

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By: Mahendra Trivedi

Published: 07 Jan 2019, 12:12 PM IST

नरेगा श्रमिकों को प्रतिदिन 192 रुपए तो सफाईकर्मियों को प्रतिदिन मिलते हैं 189 रुपए
मनरेगा मजदूरों से कम मानदेय पर काम करने को मजबूर सफाईकर्मी
बालोतरा . मनरेगा की न्यूनतम मजदूरी से भी कम मानदेय पर ग्राम पंचायतों में सफाई व्यवस्था का जिम्मा सफाई कार्मिकों को दे रखा है। एक तरफ जहां मनरेगा में पानी, छाया और प्राथमिक चिकित्सा सुविधा भी है तो दूसरी ओर इन सफाईकर्मियों को पानी भी घर से लाकर या लोगों से मांग कर पीना पड़ रहा है।
प्रदेश सरकार ने अलग से बजट भी नहीं दे रखा है, एेसे में कई बार समय पर मानदेय भी इन सफाईकर्मियों को नहीं मिलता। वर्षों नहीं दशकों से सेवाएं दे रहे सफाईकर्मियों को आज भी नाममात्र मानदेय दिया जाता है। अशिक्षित, असंगठित सफाईकर्मियों को श्रम विभाग की निर्धारित न्यूनतम मजदूरी राशि भी उपलब्ध नहीं करवाईजा रही है। इनसे अधिक महानरेगा श्रमिक को दिहाड़ी राशि का भुगतान किया जाता है।
गौरतलब है कि शहरों में जहां नगरपालिका, नगरपरिषद आदि है, वहां स्थायी नौकरी के साथ तनख्वाह मिलती है तो दूसरी ओर कस्बों व गांवों में लगे सफाईकर्मी मनरेगा श्रमिकों से भी कम मानदेय पर काम करने को मजबूर है। गौरतलब है कि ग्राम पंचायतें निजी आय से इन्हें मानदेय का भुगतान करती है। प्रदेश सरकारें सफाई कार्य के भुगतान के लिए ग्राम पंचायतों को अलग से कोई बजट उपलब्ध नहीं करवाती है। ग्राम पंचायत जसोल में कार्यरत 18 सफाईकर्मियों को पंचायत 189 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से 5 हजार 670 रुपए मासिक मानेदय भुगतान करती है। इस पर महंगाई के दौर में नाममात्र इस मानदेय पर सफाईकर्मियों के लिए घर चलाना मुश्किल हो गया है।
जसोल में रविवार पांचवें दिन भी सफाईकर्मी मानदेय में बढ़ोतरी करने की मांग को लेकर सामूहिक हड़ताल पर रहे। इससे कस्बे की सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। कचरे, गंदगी के ढेर से फैलने वाली दुर्गंध से रहवासी सांस लेने को तरस गए हैं। दुर्गंध भरे माहौल पर मौसमी बीमारियां फैलने को लेकर लोग आशंकित है।
सरकार नहीं देती बजट
&पंचायतीराज में दैनिक मजदूरी निर्धारित नहीं है। ग्राम पंचायतें निजी आय से सफाईकर्मियों को मानदेय देती है। उच्चाधिकारियों को समय-समय पर बजट उपलब्ध करवाने की मांग करते हैं।
- सांवलाराम चौधरी, विकास अधिकारी पंचायत समिति बालोतरा
नाम मात्र की दिहाड़ी
&कई वर्षों से सफाईकर्मी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन मात्र 189 रुपए दिहाड़ी के हिसाब से मानदेय भुगतान किया जाता है। महंगाई में घर कैसे चलाएं समझ नहीं आ रहा है।
- अशोक बाराचा
घर चलाना मुश्किल
&हर चीज के दाम हर दिन बढ़ रहे हैं, लेकिन मजदूरी राशि नहीं बढ़ाईजा रही है। नाममात्र मानेदय में घर चलाना मुश्किल हो गया है। ग्राम पंचायत व सरकार राशि बढ़ाएं।
- राजेन्द्र बाराचा
कई सालों से मांग
&कई वर्षों से मजदूरी राशि बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाईनहीं की जा रही है। मानदेय बढ़ोतरी के नाम पर आश्वासन दिए जाते हैं। ग्राम पंचायत व सरकार शीघ्र मानदेय में बढ़ोतरी करें।
- अंतरो देवी, सफाई कर्मचारी

Mahendra Trivedi Reporting
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