दिलीप दवे बाड़मेर. शिक्षा विभाग की लेटलतीफी ने नई ग्राम पंचायतों की उच्च शिक्षा को अधरझूल में डाल रखा है। पिछले दो साल से इन ग्राम पंचायतों में शिक्षा विभाग ने पंचायत प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी (पीईईओ ) क्षेत्राधिकार का निर्णय नहीं किया जिस पर ये नई ग्राम पंचायतें पुरानी के अधीन संचालित हो रही है।

इसके कारण शिक्षा विभाग में ये अभी भी ग्राम पंचायत के रूप में दर्ज नहीं है जिस पर यहां उच्च शिक्षा के द्वार नहीं खुले हैं जबकि नियमानुसार हर ग्राम पंचायत मुख्यालय पर उच्च माध्यमिक विद्यालय होना चाहिए, लेकिन यहां उच्च प्राथमिक विद्यालय ही है तो कहीं पर माध्यमिक स्कू  ल।

कम दूरी पर सुलभ व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए राज्य सरकार की ओर से प्रत्येक ग्राम पंचायत में उच्च माध्यमिक विद्यालय की अनिवार्यता का नियम बन हुआ है जिससे की कक्षा 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त करने के लिए किसी भी विद्यार्थी को अपनी ग्राम पंचायत से बाहर नहीं जाना पड़े।

साथ ही दूरी के कारण किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई नहीं छूटे। पंचायत के उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य को पीईईओ के रूप में अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी जाती है, लेकिन पंचायत पुनर्गठन के दो साल होने बाद भी जिले सहित प्रदेश की सैकड़ों ग्राम पंचायतों में अभी तक उच्च माध्यमिक विद्यालय नहीं है।

एेसे में ग्राम पंचायत में 12वीं तक की शिक्षा के विद्यालय की अनिवार्यता व उपलब्धता कोरी कल्पना साबित हो रही है।

इन ग्राम पंचायतों में माध्यमिक तक विद्यालय- जिले की ग्राम पंचायत दरूड़ा, बाड़मेर गादान, मातासर, ऊनरोड़, हुडों का तला, फगलु का तला, पंवारिया तला, खरावाला, रातड़ी, लक्ष्मीपुरा, सुवाड़ा, आकल, बाधा, आलू का तला, उचिया, नाकोड़ा, मनणावास, एड अमरसिंह, बामणी, मूढ़ों का तला, भागभरे की बेरी, भलीसर, बागलोप, देवरिया, नई खाकरलाई, अम्बों का बाडा, कम्मों का बाड़ा, सांवरड़ा, समदड़ी स्टेशन, गादेवी, सुराली, मेकरनवाला, चडवा तखताबाद, अर्जुन की ढाणी, सहित 50 से अधिक ग्राम पंचायतों में माध्यमिक विद्यालय ही है।

उच्च माध्यमिक नहीं उच्च प्राथमिक स्कू  ल- जिले की बाड़मेर आगोर, गुडीसर, गेहूं, लूणू, लाखेटाली, धने का तला, मगरा, घोनिया,पोशाल, नई ऊंदरी, धोलपालिया नाडा, पालियाली, पुराणियों का तला, बरियाड़ा, कायम की बस्ती, रोहिला, आदर्श केकड़, आदर्श आडेल, जूना खेड़ा, कोशले की ढाणी, आलमसर खुर्द, दूधिया, डोली, राजगुरा, अराबा, दुदवता, जास्ती, देवड़ा, कुम्हारों की बेरी, खारिया खुर्द, साड़ेचा, मानावास, काऊखेड़ा, साईंयों का तला (बायतु), खानजी का तला, जागुओं की ढाणी, बायतु चिमनजी, एकलिया धोरा, सेवरों की ढाणी, पूंजाबेरी, डेलुओं का तला, डुडियों की ढाणी, आचाराणियों की ढाणी, बूढ़ातला, दानपुरा, उतरनी, खेमपुरा सहित 100 से अधिक ग्राम पंचायतों में केवल उच्च प्राथमिक स्तर तक के ही विद्यालय है।

इसी सत्र में स्कू  ल हो क्रमोन्नत- उच्च माध्यमिक विद्यालयों से विहीन ग्राम पंचायतों में सबसे बडे़ विद्यालय को इसी सत्र से क्रमोन्नत किया जाए जिससे कि विद्यार्थियों को अपनी ग्राम पंचायत में ही कक्षा 12 तक की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुलभ हो सके। जिस ग्राम पंचायत में उच्च प्राथमिक तक का विद्यालय है, उनको लगातार उच्च माध्यमिक तक क्रमोन्नत किया जाए।- छगनसिंह लूणू, प्रदेशाध्यक्ष राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम ( प्राथमिक)

विद्यालय क्रमोन्नति की जरूरत- जब बारहवीं तक हर ग्राम पंचायत में स्कू  ल होनी चाहिए तो दो साल से नई ग्राम पंचायतें वंचित क्यों है। जनप्रतिनिधि पैरवी कर जल्द से जल्द सीबीईओ कार्यालय व ग्राम पंचायतों में उच्च माध्यमिक स्कू  लों क संचालन शुरू करे।- वीरमाराम गोदारा, जिलाध्यक्ष राजस्थान शिक्षक संघ युवा

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