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जीतनी हों चांदी तो आओ इस मेले में जल्दी

एनआरआइ पृथ्वीराज कोळू ने की पहल

बाड़मेर

Updated: March 11, 2022 06:13:38 pm

जीतनी हों चांदी तो आओ इस मेले में जल्दी
- एनआरआइ पृथ्वीराज कोळू ने की पहल
- 28 माचज़् से भरेगा तिलवाड़ा मेला
- प्रथम को एक किलोग्राम, द्वितीय को 500 और तृतीय को 250 ग्राम
सोशल प्राइड
बाड़मेर पत्रिका.
देश में पशुमेलों के प्रति घटते रूझान और पशुपालन को लेकर आ रही कमी के बीच में सीमांत बाड़मेर जिले से अच्छी खबर है कि यहां आयोजित होने वाले भारत प्रसिद्ध तिलवाड़ा पशुमेले में इस बार पशुओं को प्रतियोगिता जीतने पर पशुपालकों को एक-एक किलोग्राम चांदी इनाम में दी जाएगी। पशुओं के लिए इतना बड़े इनाम की पहल राज्य के किसी भी मेले में पहली बार हुई है। एनआरआइ पृथ्वीराजङ्क्षसह कोळू ने श्री मल्लीनाथ पशुमेला तिलवाड़ा के लिए यह पहल की है।
बाड़मेर जिले में तिलवाड़ा पशुमेला 28 माचज़् को होगा। करीब 750 साल से हो रहा यह मेला राज्य का सिरमौर है। इस मेले में घोड़े,ऊंट, बैल व अन्य पशु आते है। आधुनिकता के इस युग में पशुपालन को लेकर स्थितियां बदली है लेकिन इस मेले की रंगत अभी भी है। मेले में पशुधन को जोडऩे के लिए इस बार एक एनआरआइ ने बड़ी पहल की है। उन्होंने मेले में प्रथम रहने वाले घोड़े, ऊंट व गाय के लिए एक-एक किलोग्राम चांदी, द्वितीय रहने वाले के लिए 500-500 ग्राम और तृतीय रहने वाले के लिए 250-250 ग्राम चांदी देने की घोषणा की है, जो प्रतियोगिताओं के निणज़्य के आधार पर प्रशासन तय करेगा। घोड़ों को दौड़, ऊंटों को श्रृंगार और गायों को दुग्ध उत्पादन के लिए यह पुरस्कार मिलेगा।
2000 घोड़े पहुंचते है
तिलवाड़ा मेले में 2000 के करीब घोड़े पहुंचते है जो काठियावाड़ी, मालानी, पंजाबी नस्ल के है और इन घोड़ों की मेला मैदान पर प्रतिदिन होने वाली दौड़ देखने के लिए भीड़ उमड़ती है। इसके अलावा यहां ऊंटों का श्रृंगार दूल्हे की तरह किया जाता है, जो सजने-धजने के बाद अलग ही रंगत में आते है।
गायों का प्रवेश हों शुरू
मेले में गायों का प्रवेश और बिक्री अब तक नहीं हुई है लेकिन इस बार नवाचार किया जा रहा है। गायों को दुग्ध और नस्ल के आधार पर पुरस्कृत किया जाएगा। इससे पशुपालक मेले में गायों को लाने को प्रोत्साहित होंगे।
सवज़्समाज आगे आएं
मेले, पशुधन, कला, संस्कृति यह हमारी विरासत है। श्री मल्लीनाथ पशुमेला 750 साल पुराना और समूचे मारवाड़ ही नहीं कई राज्यों से जुड़ा है। इन मेलों की विरासत को आगे बढ़ाने को सवज़्समाज को प्रयास करने चाहिए। मैने यह पहल की है ताकि पशुपालकों को मान सम्मान और प्रोत्साहन मिले। - पृथ्वीराजङ्क्षसह कोळू, एनआरआइ
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