जैन साध्वी के अंतिम दर्शन में उमड़ा जन सैलाब, सजल आंखों से दी अंतिम विदाई, पढि़ए पूरी खबर

- शुक्रवार को हुआ था देवलोक गमन

By: Dilip dave

Published: 20 Jan 2018, 09:48 PM IST

 

 

जसोल. साध्वी गुलाबकंवर के शुक्रवार को देवलोक गमन पर शनिवार को बैकुण्ठी यात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
तेरापंथ समाज जसोल की ओर से पुराना ओसवाल भवन से सुबह 11 बजे बैकुण्ठी यात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मुख्य मार्गों से होती हुईबैकुण्ठी यात्रा श्मशान घाट पहुंची। यहां साध्वी के पीहर पक्ष की ओर से नरपतराज कठोतिया व ससुराल पक्ष की ओर से संपतराज दशानी ने मुखाग्नि दी।

इससे पूर्व प्रात: 7 बजे जसोल तेरापंथ समाज की ओर से ओम भिक्षु, जय भिक्षु का जाप किया गया। मुनि देवेंद्रकुमार, साध्वी रामकुमारी,रतिप्रभा, भानुमति, हेमरेखा ने अपने प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। साध्वीवृन्द ने सामूहिक गीतिका की प्रस्तुति दी। इससे पूर्व साध्वी के शुक्रवार शाम निधन पर तेरापंथ सभा, तेयुप, महिला मंडल, कन्या मंडल, किशोर मंडल,बालोतरा स्वर संगम टीम की ओर से धम्म जागरण किया गया। तेरापंथ समाज जसोल की ओर से रविवार सुबह 9.30 बजे पुराना ओसवाल भवन में कार्यक्रम आयोजित होगा।

शिक्षा और संस्कार की बाते सीखा गई साध्वी- साध्वी गुलाबकंवर का साध्वी जीवन शिक्षा और संस्कार के प्रचार-प्रसार में ही बीता। उन्होंने समाज में शिक्षा के साथ संस्कार की बातें सीखाती थी। वे लम्बे समय से अस्वस्थ होने के कारण जसोल व आसपास के क्षेत्र में प्रवास कर रही थी। बीमारी के बावजूद वे प्रतिदिन धर्मसभा में भाग लेती और लोगों को प्रवचन देती थी। उन्होंने विद्यार्थियों को कई बार शिक्षा देते वक्त कहा कि शिक्षा जितनी जरूरी है, उससे ज्यादा जरूरी संस्कार भी है।
हर आंख हुई नम- साध्वी का जीवन सरल, व्यवहार मधुर और मिलनसार था। उनके मिलने वाला हर सख्स उनकी प्रभावित होता था। उनके अनुयायियों में पूरे देश के कई नामी-गिरामी व्यापारी थे।
जैन तीर्थ नाकोड़ा के पास प्रवास- जैन धर्म के प्रसिद्ध तीर्थों में से एक नाकोड़ा तीर्थ के आसपास ही उनका अंतिम जीवन बीता । वे जसोल में ही रही।

Dilip dave Desk
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