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राजस्थान के इन जिलों में युवा सर्वाधिक है मनरेगा में मजदूर

सिर पर तगारी- झड़ नहीं रही बेरोजगारी की धूल और धूमिल युवा सपने
- मनरेगा में मजदूरी में 18 से 30 के युवा
- तगारी उठा रहे युवाओं को हुनर का काम नहीं
- बाड़मेर में सर्वाधिक 2 लाख 55 हजार

बाड़मेर

Published: January 12, 2022 12:15:56 pm

रतन दवे
बाड़मेर पत्रिका.
इक्कीसवीं सदी युग परिवर्तन के दौैर में युवा जिसका उल्टा वायु है वह कितना पढ़ लिखकर आगे बढ़ा है इसका आईना महात्मा गांधी नरेगा योजना के आंकड़े दर्शा रहे है। राज्य में सर्वाधिक बाड़मेर जिले में 18 से 30 उम्र के 2 लाख 55 हजार 29 युवा पंजीकृत है और रोजगार 1 लाख 48 हजार 851 ने प्राप्त किया है। प्रदेश में पंजीकरण का आंकड़ा 28 लाख 92 हजार 218 है, यानि बेरोजगारी का दंश भुगत रहे इन युवक-युवतियों के सिर पर तगारी है और जाहिर है तगारी उठाने वाले ये युवा पढ़ाई-लिखाई में भी कमजोर रह चुके है। प्रदेश में शिक्षा और रोजगार की यह बड़ा प्रश्न है।
सर्वाधिक मजदूर युवा(पंजीकृत)
1. बाड़मेर- 258029
2. बांसवाड़ा-204414
3. जोधपुर-161552
4. उदयपुर- 158306
5. झालावाड़-149394
सबसे कम (पंजीकृत)
1.झुंझूनू-22521
2.सीकर-27944
3.दौसा-33439
4.कोटा-34289
5.हनुमानगढ़-36752
बाड़मेर में मजदूर ज्यारा क्यों?
- शिक्षा व साक्षरता का स्तर कमजोर
- पलायन और मजदूरी की कमी
- गरीबी और ग्रामीण रोजगार के कम अवसर
22100 रुपए मिलते है साल के
मनरेगा में पंजीकृत इन युवाओं को साल में 100 दिन पूरा रोजगार मिले तो 221 रुपए क हिसाब से 22100 रुपए सालाना मिल रहे है, यानि मासिक औसत निकाला जाए तो दो हजार रुपए से भी कम इनके हाथ में आ रहे है। पंजीकृत में से करीब 70 प्रतिशत रोजगार ले रहे है।
प्रदेश में यह स्थिति चिंतनीय
प्रदेश में पंजीकृत 18 से 30 के युवाओं की संख्या 2892218 है। ठीक बात है कि सरकार बेरोजगार युवाओं को रोजगार दे रही है लेकिन आबादी का बड़ा हिस्सा आज भी पढ़ाई लिखाई में इतना कमजोर रह गया है कि उसको मनरेगा में मजदूरी करनी पड़ रही है। मनरेगा में भी इन मजदूरों में अधिकांश भवन निर्माण कार्य कर रहे है जो उनको हुनर या कुशलता के गुर भी नहीं सिखा रहे है और मजदूरों को तालाब, नाडी और अन्य खुदाई के कार्यों में लगाया हुआ है।
युवाओं को दिशा देने की योजना बनें
मनरेगा मजदूरी के लिहाज से काम देने की योजना हैै लेकिन युवाओं को इस योजना के अलावा ऐसी योजनाओं से जोड़ा जाए जो उनको हुुनरमंद बनाए। उनको तगारी थमाने से अच्छा है कोई हुनर सिखाया जाए। 18 से 30 की उम्र के पंजीकृत युवाओं को लेकर अलग सोचा जाए।-रूमादेवी, विजेता नारी शक्ति पुरस्कार
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