पश्चिमी सरहद की निगेहबानी कर रहे ऊंटों की गर्दन गौरव से ऊंची, पाकिस्तान ने भी माना इनका लाेहा

सरहद की निगेहबानी कर रहे ऊंटों की गर्दन गौरव से ऊंची हो गई है। उनके मुकाबले में उतारे गए सेंड स्कूटर कोई खास परिणाम नहीं दे पाए।

By: santosh

Published: 09 Feb 2018, 04:04 PM IST

बाड़मेर। पश्चिमी सरहद की निगेहबानी कर रहे ऊंटों की गर्दन गौरव से ऊंची हो गई है। उनके मुकाबले में उतारे गए आधुनिक संसाधनों से लेस सेंड स्कूटर कोई खास परिणाम नहीं दे पाए। ऐसे में ऊंची गर्दन और लंबी-चौड़ी कदकाठी के ऊंट लगातार बीएसएफ के साथ चलते रहेंगे और सीमा के उस पार होने वाली हर हरकत पर जवान इन ऊंटों पर सवार होकर नजर रखेंगे। ऊंटों के हैंडलिंग का प्रशिक्षण जवानों को मिलेगा।

 

गौरतलब है कि वर्ष 2015 में केंद्र सरकार ने प्रायोगिक तौर पर सीमा सुरक्षा बल जैसलमेर के दक्षिणी सेक्टर को दो सैंड स्कूटर मुहैया करवाए थे। रेत पर आसानी से चलने वाले इन स्कूटरों से शाहगढ़, धनाना, मुरार सरीखे ऊंचे धोरों वाले सीमा क्षेत्र की निगरानी का काम किया गया। लेकिन सरहद पर निगरानी तंत्र मजबूत करने के लिहाज से यह प्रयोग ज्यादा कारगर नहीं रहा। अब इनका उपयोग केवल वीआईपी विजिट तक सीमित होकर रह गया है।

 

400 से ज्यादा ऊंट हैं बीएसएफ की मजबूती
बीकानेर , गंगानगर, जैसलमेर, बाड़मेर और गुजरात तक में चार सौ से अधिक ऊंट हैं जो पेट्रोलिंग का जिम्मा संभाल रहे हैं। हर बीओपी पर दो-तीन ऊंट है। इसके लिए हैंडलिंग का प्रशिक्षण जवानों को दिया जाता है। ऊंट को गर्मियों में आसानी से रखा जाता है लेकिन सर्दियों में उसके तेवर बदल जाते हैं। ऐसे में सर्दियों के लिए जवान का प्रशिक्षित होना जरूरी है।

 

पाकिस्तान में भी ऊंट ही जरिया
पाकिस्तान की ओर से वैसे तो आम तौर पर पेट्रोलिंग नहीं होती, लेकिन जब भी सीमा पार रेंजर्स नजर आते हैं वे ऊंटों पर ही सवार दिखते हैं। भारत में तो रोज ऊंट का फट्टा लगाने का नियम है।

 

बीएसएफ की शान भी है ऊंट
बीएसएफ के लिए ऊंट केवल पेट्रोलिंग का हिस्सा ही नहीं, बल्कि ये बीएसएफ की शान भी है। ऊंटों को बीएसएफ ने इस तरह प्रशिक्षित किया है कि गणतंत्र दिवस की परेड में भी ये हिस्सा लेते हैं और बीएसएफ की कैमल विंग की ओर से कई करतब दिखाए जाते हैं जो अचंभित भी करते है।

 

इसलिए नहीं आएंगे स्कूटर्स
राजस्थान के अलावा गुजरात के सीमावर्ती रण क्षेत्र तथा पंजाब के सीमाई इलाकों में सैंड स्कूटर से निगरानी चुनौती।

 

प्रत्येक सैंड स्कूटर की कीमत 40 लाख रुपए आंकी गई।
-इटली की कम्पनी की ओर से तैयार होने वाले स्कूटर्स की रिपेयरिंग भी विदेशी इंजीनियरों की ओर से संभव।

- 4 गुणा 4 की ताकत रखने वाली 40 स्वदेशी टाटा जिनोन गाडिय़ां भी। इस गाड़ी में एयरकंडीशनर की सुविधा के साथ पीछे लम्बी ट्रॉली की सुविधा भी।

- 03 वर्ष पहले केंद्र सरकार ने सीसुब को मुहैया कराए थे सैंड स्कूटर
- 02 सैंड स्कूटर प्रायोगिक तौर पर दिए गए थे जैसलमेर के दक्षिणी सेक्टर को
- 03 सरहदी क्षेत्रों शाहगढ़, धनाना, मुरार में ऊंचे धोरों पर तैनात किए थे स्कूटर
- 40 लाख रुपए के करीब कीमत आंकी गई है प्रति स्कूटर की कीमत

 

दो स्कूटर आए थे
ऊंट बीएसएफ पेट्रोलिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जैसलमेर में दो सैंड स्कूटर आए थे। इसके बाद नहीं आए।
- रवि गांधी, उप महानिरीक्षक, सीसुब

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