पत्नी कार्यकर्ता, पति उठाता है पोषाहार की राशि, कागजों में समूह का नाम, आखिर कब तक चलेगा पोषाहार पकाने का फर्जीवाड़ा

- कई गांवों में चल रहा है पोषाहार पकाने का फर्जीवाड़ा
- समूह के खाते में राशि जमा होने के बाद बंदरबांट

By: भवानी सिंह

Published: 09 Dec 2017, 01:15 PM IST

बाड़मेर। आंगनबाड़ी केन्द्रों में पोषाहार की विकेन्द्रीकृत व्यवस्था के बाद कुछ लोगों ने स्वयं सहायता समूहों की आड़ में परिवहन का गैर कानूनी खेल शुरू कर दिया है। भुगतान समूह के नाम पर जमा हो रहा है, लेकिन जा रहा है चंद लोगों की जेब में। नियमों में स्पष्ट है कि स्वयं कार्यकर्ता व सहायिका तथा उनके परिजन इसमें भागीदार नहीं बनेंगे, लेकिन इसकी पालना नहीं दिख रही। पत्रिका टीम की ओर से गुरुवार को किए गए स्टिंग के बाद कई पाठकों ने इस तरह के फर्जीवाड़े की जानकारी दी। सिवाना परियोजना के राखी गांव से एक पाठक ने बताया कि यहां एक जने ने न केवल अपनी पत्नी व मां को आंगनबाड़ी केन्द्र में बतौर कार्यकर्ता व सहायिका लगा रखा है बल्कि वह स्वयं ही समूह की आड़ में बेबी मिक्स पैकेट परिवहन का कार्य कर रहा है। इसकी पुष्टि के लिए पत्रिका टीम ने सिवाना के बाल विकास परियोजना अधिकारी से भी सम्पर्क किया, जिन्होंने जांच का भरोसा दिलाया। यह तो एक बानगी भर है और राखी गांव की वास्तविकता भी जांच के बाद ही उजागर हो पाएगी, लेकिन जिले में इस तरह के फर्जीवाड़े से इंकार नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि राखी गांव के छह केन्द्रों में बेबी मिक्स आपूर्ति वैराई माता स्वयं सहायता समूह को दे रखी है।

खुद का पोषण

आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों का कितना पोषण हो रहा है, किसी से छिपा नहीं है। लेकिन इस पोषण की आड़ में प्रशिक्षण, सेमिनार व भ्रमण के नाम पर खूब सरकारी धन लुटाया जा रहा है। पत्रिका टीम ने जिले के विभिन्न परियोजना अधिकारियों से लेकर कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं से बात की तो अधिकांश ने स्टॉफ की कमी, कम मानदेय व सुविधाओं की कमी पर तो चर्चा की लेकिन पोषाहार व इसके महत्व पर उनका डिब्बा भी गोल मिला।
इस तरह के हैं हालात

एक-एक परियोजना में वर्ष भर में करीब चार लाख रुपए भ्रमण व प्रशिक्षण पर व्यय हो रहे हैं। इसकी एक बानगी सिणधरी में 21 से 28 मार्च 2017 तक आयोजित प्रशिक्षण में मिल जाएगी। अलग-अलग स्टेशनों पर 660 संभागियों के लिए चाय,नाश्ता व खाने की व्यवस्था की गई। कागजों में उपस्थिति अधिकांश की दर्ज हो गई और यहां 77880 रुपए का बिल उठ गया। महालक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह हाई स्कूल सिणधरी को इसका भुगतान किया गया।
16 परियोजनाएं, 13 में पद रिक्त

बच्चों व महिलाओं के पोषण में लगा विभाग स्वयं कुपोषित है। जिले में अभी 16 परियोजनाए हैं, जिनमें से 13 में परियोजना अधिकारियों के पद रिक्त है। ऐसे में जैसे-तैसे अतिरिक्त कार्यभार देकर काम चलाया जा रहा है। जाहिर है कि ऐसे में मॉनिटरिंग भी प्रभावित हो रही है।
70 हजार बच्चे कुपोषित

पोषण का दावा और उसमें करोड़ों के खर्चे के बावजूद जिले में कुपोषित बच्चों का आंकड़ा नहीं थम रहा है। जिले में फिलहाल ऐसे करीब 80 हजार बच्चे हैं, जिनका वजन सामान्य से कम है। हालांकि अति कुपोषित बच्चों की संख्या बेहद कम है।

भवानी सिंह
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