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जानिए गुजरात की ऐसी विधानसभा सीट जहां है सारे हिन्दुस्तान से आए मतदाता

locationबाड़मेरPublished: Nov 14, 2022 07:36:39 pm

Submitted by:

Ratan Singh Dave

वाह! यह है बहुत खूब सूरत
- सूरत में है 90 प्रतिशत भारत के अलग-अलग राज्यों के मतदाता
- हर भाषा, प्रांत और क्षेत्र के लोगों का है यहां चुनावों में दखल
- मिलकर चुनते है एक खूबसूरत लोकतंत्र

जानिए गुजरात की ऐसी विधानसभा सीट जहां है सारे हिन्दुस्तान से आए मतदाता
जानिए गुजरात की ऐसी विधानसभा सीट जहां है सारे हिन्दुस्तान से आए मतदाता

रतन दवे
सूरत से विधानसभा चुनाव के लिए
गुजरात में चुनावी रंग परवान चढऩे लगा है। भाजपा के गढ़ दक्षिण गुजरात के सूरत में अलग ही खूबसूरती है, जो पूरे हिन्दुस्तान में इसको अलग करती है। सूरत की 12 सीटों में हर जाति,वर्ग और धर्म नहीं देश के हर कोने के लोग वोट करेंगे। 80 लाख की आबादी के शहर में 10 प्रतिशत से भी कम मूलसूरती है, शेष 90 फीसदी पूरे भारत से रोजगार की तलाश में यहां आकर बसे लोग है जो अब सूरत के लोकतंत्र को मजबूत किए है जिसे सुनकर ही निकलता है वाह, बहुत खूब सूरत।
सूरत में 80 लाख के करीब की आबादी में सर्वाधिक वोटर्स सौराष्ट्र(गुजरात) के है,जो 20 लाख के करीब आंके जाते है। ये यहां की पांच विधानसभाओं काम्बरेज, वराछा, करंज, उत्तर गुजरात और कतारगांव में है। इसमें भी पाटीदार का बाहुल्य है,लिहाजा यहां सौराष्ट्र के ही प्रतिनिधि चुनाव लड़ते और जीतते आए है। दूसरी बड़ी संख्या यहां हिंदी भाषी यानि उत्तरप्रदेश-बिहार और इससे जुड़े राज्यों की है जिसे 15 लाख के करीब आंका गया है। ये लोग यहां की राजनीति में बड़ा महत्व रखते है। इसके बाद राजस्थानी वोटर्स 10 लाख से पार है जिसमें मारवाड़ी अधिक है। पार्टियों में संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर राजस्थानी है,हालांकि विधानसभा में अभी तक राजस्थानी को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। उडिय़ा यानि उड़ीसा के 8 लाख, तेलगू/तमिलनाडु के 1.5 लाख, पंजाबी 3 लाख है तो मराठी यहां पर 12 लाख मतदाता है। मराठियों को लिंबायत सीट से विधानसभा में प्रतिनिधित्व भी मिला है।
सूरती और सौराष्ट्र का दबदबा
80 लाख मतदाताओं में 90 फीसदी यानि करीब 70 लाख अन्य होने के बावजूद यहां विधानसभा में सौराष्ट्र और मूलसूरती प्रतिनिधि चुने जाते है। उत्तर गुजरात को भी अवसर मिलता है। मूल गुजरात होने से यह दबदबा कायम है।
निकाय तक सबको अवसर
सूरत नगर निकाय में 130 सीट है,जबकि विधानसभा में 12 सीट। लिहाजा नगर निकाय तक के चुनावों में बाहर से आए लगभग सभी राज्यों के प्रतिनिधियों को अवसर मिलता है। राजस्थान,उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, पंजाब, महाराष्ट, उड़ीसा और अन्य राज्यों से आए हुए लोग भी यहां निकाय सदस्य चुने गए है,जिन्हें यहां कॉर्पोरेटर कहते है।
स्कूल में पढ़ाते है सात भाषा
दरअसल, सूरत व्यापारिक हब है। हीरा, कपड़ा और अन्य व्यापार की वजह से यहां हर राज्य के लोग आकर बसे है। सकून, शांति, व्यापारिक प्रगति और रोजगार ने यहां का माहौल इतना खूबसूरत बना दिया है कि परिवार सहित ताउम्र रहना भी लोगों को पसंद है। सूरत में बसे भारत का यह उदाहरण है कि यहां की प्राथमिक स्कूल में सात ऐच्छिक भाषा है हिन्दी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी, तमिल,उडिय़ा और ऊर्दू।
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