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कोरोना संक्रमण: लाइफ सेविंग के लिए अब हाईरिस्क ग्रुप पर फोकस

-बाड़मेर में टीमें अलग-अलग क्षेत्र में कर रही सर्वे कार्य-9 श्रेणी के लोग शामिल है हाईरिस्क ग्रुप में-संभावित लक्षण मिलने पर तुरंत करवाई जाएगी कोविड-19 की जांच

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कोरोना संक्रमण: लाइफ सेविंग के लिए अब हाईरिस्क ग्रुप पर फोकस

कोरोना संक्रमण: लाइफ सेविंग के लिए अब हाईरिस्क ग्रुप पर फोकस

बाड़मेर. गंभीर बीमारियों से पीडि़तों के कोरोना की चपेट में आने के बाद होने वाली मौतों को रोकने के लिए अब ऐेस मरीजों की जानकारी जुटाकर उनकी कोविड जांच करवाई जाएगी। जिससे समय पर उनका उपचार कर ऐसी स्थिति ही नहीं बने कि मरीज गंभीर स्थिति में पहुंचे। इसके लिए चिकित्सा विभाग मिशन लीसा के तहत बाड़मेर में सर्वे करवा रहा है। जिससे ऐसे लोगों का पता चल सकेगा, जो गंभीर बीमारियों से पीडि़त है।
चिकित्सा विभाग सर्वे में गंभीर बीमारियों के पीडि़तों के साथ साठ साल से अधिक आयु के लोगों पर भी विशेष फोकस कर रहा है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं का भी डेटा एकत्रित किया जा रहा है। सर्वे के दौरान ही लक्षण मिलने पर संबंधित की सैम्पलिंग की जाएगी। जिससे संक्रमण का पता चल सकेगा।
इन बीमारियों के पीडि़तों पर विशेष ध्यान
सर्वे में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, किडनी व हार्ट के मरीजों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इनकी पूरी जानकारी ली जा रही है। साथ ही कितने समय से बीमार है, कहीं हालत गंभीर तो नहीं है। इस तरह का डेटा लिया जा रहा है।
गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी फोकस
चिकित्सा विभाग गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी पूरा ध्यान दे रहा है। इसलिए सर्वे में उन्हें भी शामिल किया गया है। जिससे किसी गर्भवती में कोरोना के लक्षण दिखते हैं तो उनकी सैम्पलिंग करवा कर जांच की जाएगी। जिससे पॉजिटिव की स्थिति में तुरंत उपचार शुरू करवाया जा सके। जिससे महिला व बच्चे की स्वास्थ्य सुरक्षा हो सकेगी।
हाईरिस्क कैटेगरी का हो रहा सर्वे
चिकित्सा विभाग मधुमेह, उच्च रक्तचाप, किडनी व हार्ट के रोगियों को कोरोना को लेकर हाईरिस्क कैटेगरी में मानता है। इसमें साठ साल के वृद्धजन व गर्भवती महिलाओं को भी शामिल किया गया है। कोरोना की चपेट में आने के सबसे ज्यादा चांस होने के कारण हाईरिस्क में शामिल करते हुए सर्वे करवाया जा रह है।
क्या है मिशन लिसा
मिशन लिसा चिकित्सा, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग की ओर से प्रारंभ किया गया है लाइफ सेविंग मिशन है। इसका उद्देश्य कोविड-19 के रोगियों के साथ हाईरिस्क ग्रुप वाले मरीजों की जिंदगी को कोरोना से बचाना है और मृत्यु दर को न्यूनतम रखना है।
कौन-कौन है हाईरिस्क ग्रुप में
-60 साल से अधिक आयु के व्यक्ति
-10 साल से कम आयु के बच्चे
-गर्भवती महिलाएं
-किसी क्रोनिक बीमारी से पीडि़त व्यक्ति
-पिछले 15 दिनों में दूरस्थ यात्रा करना वाला
-कोविड-19 में सेवा देना वाला स्वास्थ्य कर्मी व अन्य सेवा प्रदाता
-त्वरित रूप से लोगों में संपर्क में आने वाला व्यक्ति
-संक्रमित के संपर्क में आना वाला व्यक्ति
-सर्वे के समय बुखार, खांसी व सांस में तकलीफ का मरीज
मिशन लिसा के तहत करवा रहे हैं सर्वे
हाईरिस्क ग्रुप में आने वालों का मिशन लिसा के तहत सर्वे व स्क्रीनिंग करवाई जा रही है। जिससे कोई संक्रमण के लक्षण वाला हो तो उसकी जांच कर तुरंत उपचार करवाया जा सके।
डॉ. कमलेश चौधरी, सीएमएचओ बाड़मेर

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