किस्मत ऐसी रूठी है कि नम्बर आने के बाद भी नहीं मिल रही नौकरी

- शिक्षक भर्ती परीक्षा 2012 में अधिक अंक के बावजूद वंचित अभ्यर्थी कर रहे नियुक्ति का इंतजार
- कोर्ट ने दिया निर्णय पक्ष में, पंचायतीराज विभाग में नहीं हो रही पालना

By: Dilip dave

Published: 05 Aug 2020, 08:17 PM IST


दिलीप दवे
बाड़मेर. प्रदेश 375 युवाओं की किस्मत है कि रूठी हुई ही है। पहले चयन हुआ तो त्रुटि के चलते उनसे कम अंक वालों का चयन हो गया और वे रह गए। इसके बाद उच्च न्यायालय जोधपुर की शरण में गए जहां से करीब सात माह पहले नियुक्ति देने का निर्णय आया, लेकिन अभी तक इसकी पालना नहीं हो रही। ऐसे में चयन के बावजूद ये चयनित अभ्यर्थी शिक्षक बनने से वंचित है।
2012 में तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा में लेवल द्वितीय की वरीयता सूची ने कई अभ्यर्थियों के भविष्य पर अंधेरा फैला दिया। दरअसल पंचायतरीराज विभाग की ओर से जिला परिषदों मार्फत दी गई नियुक्ति के दौरान कई अभ्यर्थियों के अधिक अंक होने के बावजूद चयन नहीं हुआ और कम अंक वाले नौकरी पर लग गए। इस गड़बड़झाले का पता चला तो वंचित अभ्यर्थी सरकार की चौखट पहुंचे और आपबीती सुनाई। सरकार के दरवाजे पर सुनवाई नहीं होती देख उन्होंने न्यायालय की शरण ली। मामला न्यायालय में चला गया तो दूसरी ओर जो कम अंक वाले अभ्यर्थी थे, वे नौकरी लग गए। लम्बे समय तक मामला अटका रहा। इसके बाद न्यायालय ने 8 जनवरी 2020 को फैसला दिया जिसमें स्पष्ट किया कि जिन अभ्यर्थियों ने न्यायालय में परिवाद पेश किया है, उनको सरकार नौकरी दे। आदेश आया तो लगा कि अब तो नौकरी लगी समझो, लेकिन आठ माह बाद भी सरकार की ओर से इसकी पालना नहीं की जा रही।
जिले के 56, प्रदेश के 375 अभ्यर्थी- जानकारी के अनुसार अधिक अंक के बावजूद नौकरी से वंचित अभ्यर्थियों में बाड़मेर जिले के 56 व प्रदेश के 375 अभ्यर्थी है, जिनको नियुक्ति के आदेश न्यायालय ने दिए हैं।

कहीं मिली तो कहीं वंचित- चयनित अभ्यर्थियों के अनुसार प्रदेश के कुछ जिलों में तो जिला परिषद ने न्यायालय के आदेश की पालना में शिक्षकों को नियुक्ति दे दी, लेकिन अधिकांश जिलों में आदेश की पालना नहीं हुई है।
गेंद पंचायतीराज के पाले में- न्यायालय के डबल बैच ने नमोनारायण शर्मा बनाम राजस्थान सरकार मामले में फैसला देते हुए अभ्यर्थियों को नियुक्ति के आदेश दिए। आदेश की पालना का जिम्मा प्रदेश के पंचायतीराज विभाग के पास है, लेकिन पालना नहीं की जा रही। खास बात यह है कि बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को वंचित अभ्यर्थियों को अविलम्ब नियुक्ति की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इसे नहीं सुना।

नहीं हो रही पालना- राजस्थान उच्च न्यायालय की डबल बैंच ने नमोनारायण शर्मा बनाम राजस्थान सरकार मामले में 8 जनवरी 2020 को अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के आदेश दिए है, लेकिन इसकी पालना नहीं हो रही।-जैसाराम माली, याचिकाकर्ता निवासी बाड़मेर

Dilip dave Desk
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