scriptPakistani battalion escaped from Chhachro, 70 soldiers of India captur | छाछरो से भाग छूटे पाकिस्तानी बटालियन , भारत के 70 सैनिकों ने किया कब्जा | Patrika News

छाछरो से भाग छूटे पाकिस्तानी बटालियन , भारत के 70 सैनिकों ने किया कब्जा

- छाछरो जीत के सात दिन बार पहुंचे थे मुख्यमंत्री बरकतुल्लाह खां यहां
- राष्ट्रगान गाया था श्रवणकुमार छंगाणी ने जो आज रहते है बाड़मेर शहर में
- छंगाणी कहते है- छाछरो में जश्न का माहौल हो गया था

बाड़मेर

Published: December 07, 2021 12:55:01 pm

7 दिसंबर 1971: छाछरो से भाग छूटे पाकिस्तानी बटालियन , भारत के 70 सैनिकों ने किया कब्जा
- छाछरो जीत के सात दिन बार पहुंचे थे मुख्यमंत्री बरकतुल्लाह खां यहां
- राष्ट्रगान गाया था श्रवणकुमार छंगाणी ने जो आज रहते है बाड़मेर शहर में
- छंगाणी कहते है- छाछरो में जश्न का माहौल हो गया था
फोटो समेत
बाड़मेर पत्रिका.
7 दिसंबर 1971..., 70 भारतीय सैनिक पाकिस्तान के छाछरो कस्बे में पहुुंच गए। पाक रेजिमेंट भारतीय सेना के आने की खबर से ही भाग छूटी और 25 हजार कस्बे वाले छाछरो में जश्न का माहौल हो गया।
25 हजार की आबादी वाले के छाछरो कस्बे में नगर पालिका थी तथा पाकिस्तानी रेंजर्स की बटालियन तैनात थी। युद्ध की शुरूआत होते ही रैंजर्स की गतिविधियां बढ़ गई थी। गांव के सबसे ऊंचे धोरे पर रेंजर्स ने एक बड़ी तोप लगा दी थी लेकिन वो काम नहीं कर सकी। तोप की विफल तैनाती के अगले ही दिन गांव में सूचना पहुंची कि भारत की सेना ने गांव की तरफ कूच कर दिया है। रातों रात रेंजर्स, स्थानीय थाना पुलिस, प्रशासन और यहां तक कि एकमात्र पाकिस्तान नेशनल बैंक की शाखा के सभी कर्मचारी यहां से भाग छूटे।
सुबह से इंतजार
7 दिसंबर की सुबह से ही छाछरो में इंतजार था कि भारत की सेना आ रही है। पूरा का पूरा गांव रात से जगा हुआ था। ठीक रात चार बजे गाडिय़ों में भारत के सैनिकों ने गांव में प्रवेश किया। वो करीब 70-80 सैनिक थे। नेतृत्व कर रहे भवानीसिंह ने गांव में सभी से कहा कि अब वे सुरक्षित है और वे आगे नगरपारकर की ओर चल दिए थे।
तहसीलदार की नियुक्ति
छाछरो अब बाड़मेर जिले का हिस्सा बन गया था। बाड़मेर कलक्टर आइसी श्रीवास्तव को यहां का प्रभार दिया गया तो श्रीवास्तव ने अपने ऑफिस सुपरीडेंट भीमसिंह चूली को यहां के लिए नियुक्त किया था। यहां पर पुलिस थाना बाड़मेर संचालित होने लगा था और डिप्टी की नियुक्ति भी की गई थी। छाछरो में पाकिस्तानी सेना के जाने के बाद बाड़मेर के अधिकारी-कार्मिक यहां लंबे समय तक रहे और इस दौरान वहां बसे लोगों ने इनकी आवभगत में कमी नहीं रखी तो भारतीय सेना ने इनकी सुरक्षा में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।
मुख्यमंत्री आए थे सात दिन बाद
छाछरो पर कब्जे के सात दिन बाद मुख्यमंत्री बरकतुल्लाहखां छाछरो आए थे। उनके सामने राष्ट्रगान गाने के लिए दो छात्रों को तैयार किया गया, जिसमें एक श्रवणकुमार छंगाणी और दूसरे घनश्याम महेश्वरी थे। बाड़मेर में अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी से सेवानिवृत्त हुए श्रवणकुमार छंगाणी कहते है कि मंैं उस समय नवीं कक्षा का छात्र था। सात दिन में हमें राष्ट्रगान सिखाया गया था। मुख्यमंत्री के सामने गान गाया और इसके बाद पूरे गांव ने भारत माता की जय के नारे लगाए थे। श्रवणकुमार की आंखों में गौरवमिश्रित नमी आते हुए कहते है आज वे आवाजें कानों में गूंजती है, ऐसे लगता है कल की ही बात हों।
फिर छोडऩा पड़ा था गांव
श्रवणकुमार कहते है कि भारतीय सेना आते ही हिन्दू परिवारों को संकेत मिल गया था कि अब जीती हुई जमीन वापिस पाकिस्तान को देनी होगी। 25 परिवार ऊंटों पर सवार होकर भारत आए थे और चौहटन तहसील के बावड़ी कल्ला पहुंचे। फिर सब अपने-अपने हिसाब से राजगार की तलाश में गए। बेरियों का वास, रायकॉलोनी में रह रहे श्रवणकुमार कहते है कि भारत ने बहुत कुछ दिया। 7 दिसंबर 1971..., कभी भुलाया नहीं जा सकता है। छाछरो पर भारत का कब्जा था...,हमारे भारतीय होने का पहला दिन कहा जा सकता है..।
छाछरो से भाग छूटे पाकिस्तानी बटालियन , भारत के 70 सैनिकों ने किया कब्जा
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