अदालत ने पूछा— मामला क्या है? तो पंचों की बंध गई घिग्गी; फरमान की बात दूर, एक-दूजे के बारे में भी कुछ नही बता सके

अदालत ने पूछा— मामला क्या है? तो पंचों की बंध गई घिग्गी; फरमान की बात दूर, एक-दूजे के बारे में भी कुछ नही बता सके

Vijay ram | Publish: Aug, 12 2018 08:05:11 AM (IST) Barmer, Rajasthan, India

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जोधपुर/बाडमेर.
'थांने मालूम है कि किणी तरेह रो दंड लेवणो गुनाह है। हैं थांने एक मौको दे रियो हूं, जो भी दंड लियो है वो फरियादी ने पाछो दे दो, नहीं तो जाणो हो के अदालतों ने आदेश देवणो भी आवे है।'

 

(अर्थात आपको पता है कि किसी भी तरह का दंड लेना अपराध है। हम आपको एक मौका दे रहे हैं। जो भी दंड लिया है, वह फरियादी को वापस दें अन्यथा जानते हो कि अदालतों को आदेश देना भी आता है)।

 

राजस्थान हाईकोर्ट जस्टिस विजय विश्नोई ने शुक्रवार को यह हिदायत सिरोही जिले की रेवदर
तहसील के गांव जीरावाला में मोटर एक्सीडेंट के आरोपी से २८ ला ा वसूल कर दो माह तक सौ लोगों का जीमण कराने वाले ाांप पंचों को दी। ाा ाले की सुनवाई ों स ाी १६ पंच हाईकोर्ट में पेश हुए और कहा कि पंचों ने दंड नहीं लिया। लेकिन कोर्ट में उपस्थित मामले के अनुसंधान अधिकारी उपअधीक्षक की मौजूदगी में वे आगे कुछ ाी नहीं कह सके।

 

पुलिस उपअधीक्षक की ओर से पेश रिपोर्ट ों बताया था रेबारी समाज के पंचों ने दो साल पूर्व एक मोटर एक्सीडेंट के आरोपी से
पहले 28 लाख रुपए वसूले तथा दो महीने तक उसके घर पर सैंकड़ों लोगों का जीमण करवाते रहे। जीवाराम की ओर से क्रिमिनल रिट दायर करने से उजागर हुए मामले के बाद जस्टिस विश्नोई ने मामले की सुनवाई पर सभी 17 जाति पंचों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने को पाबंद किया था।

 

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राजेश शाह ने बताया कि दो वर्ष पूर्व याचिकाकर्ता के वाहन से उसकी ही जाति के एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी। इस पर जाति पंचायत बैठी व पंचों ने याचिकाकर्ता से 28 लाख रुपए देने की मांग की। सरकार की ओर से विक्रमसिंह राजपुरोहित ने पक्ष रखा। हाईकोर्ट ने पंचों को एक मौका देते हुए कहा कि अगली सुनवाई 18 सित बर तक राशि लौटा दी जाए अन्यथा कोर्ट आदेश पारित करेगा।
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