scriptrepublic day special | पहले देश सेवा, अब प्रकृति के प्रहरी | Patrika News

पहले देश सेवा, अब प्रकृति के प्रहरी

-प्रकृति के साथ रहे और घर में गाय पालने की दे रहे प्रेरणा
-नशे से दूर रहने को कर रहे हैं जागृत

बाड़मेर

Published: January 26, 2022 07:30:55 pm

बाड़मेर. सेना में रहकर 15 साल तक देश सेवा करने के बाद जब सेवानिवृत्त हुए तो एक ही लक्ष्य बना लिया कि प्रकृति संरक्षण के कार्य करना है और लोगों को नशे से दूर रखना है। इसी को ध्येय बनाते हुए 54 साल के बाड़मेर के खेमाराम आर्य जुटे हुए हैं। प्रकृति के सामिप्य में खुद को समर्पित करते हुए घर-घर गाय पालने और पेड़-पौधे लगाने का संदेश गांव-गांव दे रहे हैं। किसी तरह के वाहन से दूर बस अपनी साइकिल ली और निकल पड़ते हैं।
पर्यावरण और पशु-पक्षियों की जरूरतों के लिए खेमाराम हमेशा तैयार रहते हैं। रात-दिन की परवाह किए बिना अपनी साइकिल से वहां पहुंच जाते हैं। वे बताते हैं कि पर्यावरण से ही हम सभी है। इसे शुद्ध रखेंगे तो हम स्वस्थ रहेंगे। पर्यावरण की अशुद्धता के कारण ही हम बीमार होते हैं। प्रकृति हमारा संरक्षण करती है हम इसका ध्यान रखे तो कभी बीमार नहीं होंगे और न कभी महामारी आएंगी।
19 साल से पर्यावरण और गो-संरक्षण
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद खेमाराम पिछले 19 साल से पर्यावरण और गो-संरक्षण के प्रति समर्पित है। साथ ही आमजन को भी इसके लिए जागरूक करते हैं। बच्चों के साथ ही संवाद के माध्यम से उन्हें प्रकृति की खुबियों से रूबरू करवाते हैं। सबसे ज्यादा जोर नशे से दूर रहने पर देते हैं। उनका कहना है कि नशा शरीर और समाज दोनों को कमजोर करता है।
गूगल-गिलोय हर घर में हो
ऋषि परम्परा में विश्वास रखने वाले आर्य गूगल और गिलोय के बारे में बताते हैं कि यह दोनों पौधे हर घर में होने चाहिए। यह हमारे स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। दोनों का आयुर्वेद में विशेष स्थान भी है। पौधों में बड़ और पीपल लगने चाहिए।
सादा जीवन- साइकिल पर यात्रा
बाड़मेर जिले में दूर-दूर तक कहीं जाना है तो साइकिल पर निकल जाते हैं। सादा जीवन जीते हैं। दांता स्थित मोहन गोशाला ही उनका एक तरह से निवास बन चुका है। यहां गायों की सेवा और गोविज्ञान पर शोध में संलग्न है। चारपाई का उपयोग नहीं करते हैं और गोबर से लीपी हुई भूमि को ही अपना शयन स्थल बनाया है। अपने ध्येय को लेकर पक्के सैनिक 54 साल की उम्र भी युवा और ऊर्जावान है।
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