छात्रसंघ चुनाव 2018: पीजी कॉलेज में 53 साल में पहली बार छात्रा बनी पदाधिकारी, उधर बहन बोली मैंने देखा सपना, भाई ने किया साकार

छात्रसंघ चुनाव 2018: पीजी कॉलेज में 53 साल में पहली बार छात्रा बनी पदाधिकारी, उधर बहन बोली मैंने देखा सपना, भाई ने किया साकार

bhawani singh | Publish: Sep, 11 2018 08:54:29 PM (IST) Barmer, Rajasthan, India

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बाड़मेर. जिले के सबसे बड़े राजकीय पीजी महाविद्यालय के छात्रसंघ के इतिहास में वर्ष 2018 का चुनाव यादगार बन गया। इसमें कॉलेज में 53 साल बाद पहली बार छात्रा महासचिव पद पर चुनी गई है। यहां छात्रसंघ चुनावों में लगातार जातिगत समीकरण के कारण घमासान रहता है। हालांकि छात्रसंघ चुनाव में दो बार अध्यक्ष पद के लिए छात्राएं दावेदार रहीं लेकिन जीत दर्ज नहीं करवा पाई। इस बार महासचिव पद पर प्रमीला चौधरी ने 622 मतों से रिकॉर्ड जीत हासिल की है।


तीन चुनाव में छात्राओं की दावेदारी, पहली बार जीत मिली
पीजी कॉलेज की छात्र राजनीति में सबसे पहले2001 के चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए जयश्री तापडिय़ा ने दावेदारी जताई। लेकिन वह जीत नहीं पाई। इसके बाद अध्यक्ष पद पर नीलम लीलावत ने वर्ष 2012 में चुनाव लड़ा। वह भी हार गई। इस बार महासचिव पद पर प्रमीला ने जीत कर रेकार्ड कायम किया है।

 

- छात्राओं को आगे आना चाहिए
छात्राओं को राजनीति में सक्रिय होकर आगे आना चाहिए। यहां पीजी कॉलेज में कई छात्राएं भी अध्ययनरत हैं। छात्र हितों के लिए संघर्ष करूंगी। मेरा मानना है कि छात्राओं को राजनीति में सक्रिय रहकर महिलाओं के मुद्दों की लड़ाई लडऩी चाहिए। - प्रमीला चौधरी, नवनिर्वाचित महासचिव

 

भाई ने सपना पूरा किया, मुझे गर्व
पीजी कॉलेज के नवनिर्वाचित अध्यक्ष जगदीश पूनिया की बहन आज बहुत खुश थी। उसने बताया कि जो सपना कभी उसने देखा था, वह आज उसके भाई ने पूरा कर दिया। जगदीश की बहन छगनी पूनिया ने बताया कि एमबीसी गल्र्स कॉलेज में पढ़ाई के दौरान छात्रसंघ चुनाव हो रहे थे। मैने भी सोचा कि चुनाव मैदान में भाग्य आजमाना चाहिए और अध्यक्ष बनने का मेरा सपना था। लेकिन परिस्थितियां ऐसी नहीं बनी और चुनाव नहीं लड़ पाई। वह सपना मेरे मन में रह गया। लेकिन आज भाई ने बहन का देखा सपना पूरा कर दिया। मुझे गर्व है।

- पीजी कॉलेज में 1965 में शुरू हुए थे छात्रसंघ चुनाव

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